PM नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बिहार के नेता-मंत्री भी अब अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम कर रहे हैं। सीएम सम्राट चौधरी भी पटना शहर के भीतर इलेक्ट्रिक कार की सवारी कर रहे हैं। उन्होंने अपने काफिले की कारें कम की हैं, साथ ही दूसरे मंत्रियों से गाड़ियों की संख्या कम करने की अपील की है। इधर, मंत्रियों ने कार पुलिंग भी शुरू कर दी है। अधिकारी भी पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह कि अगर बिहार के मंत्री सिर्फ अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या आधी कर देते हैं तो कितने लीटर डीजल की बचत होगी। इससे बिहार सरकार के खजाने को कितना लाभ होगा। लोगों तक क्या मैसेज जाएगा। भास्कर ने पूरे मामले को समझने की कोशिश की। पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट…। एक मंत्री के काफिले में कितनी गाड़ियां हर मंत्री और अधिकारी को गाड़ियों की सुविधा उनके विभाग की तरफ से दी जाती है। मंत्री बनते ही विभाग की गाड़ी उनके दरवाजे पर पहुंच जाती है। मंत्री के काफिले में चलने वाली गाड़ियों का खर्च कौन उठाता है?
मंत्री और विभाग के अधिकारी की गाड़ी का पूरा खर्च राज्य सरकार और संबंधित विभाग उठाता है। इसमें गाड़ियों का ईंधन, ड्राइवर, सुरक्षा, मेंटेनेंस और पुलिस बल का खर्च शामिल है। बिहार सरकार के एक मंत्री ने नाम नहीं छापने की शर्त पर भास्कर को बताया, ‘हमें केवल तेल बाउचर यानी बिल रखना होता है। बिल वे विभाग को सब्मिट करते हैं और उसका भुगतान हो जाता है। मंत्री के तेल खर्च करने की कोई लिमिट नहीं होती है। मंत्री की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मी और स्कॉट की गाड़ी का खर्च गृह विभाग की तरफ से वहन किया जाता है।’ मंत्रियों के कारकेड कम करने से सरकार को कितने का फायदा होगा? विभाग की तरफ से कोशिश करने के बाद भी किसी मंत्री की तरफ से सब्मिट किए जाने वाली बिल की जानकारी नहीं दी गई। एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एक मंत्री की गाड़ी एक दिन में औसतन 100-150 किलोमीटर चलती है। सरकार की तरफ से क्या तैयारी की जा रही है? सरकार की तरफ से इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो अगले एक से दो दिन में सरकार बड़ा एक्शन कर सकती है। सरकार मंत्रियों को मिलने वाले अनलिमिटेड पेट्रोल और डीजल की राशनिंग कर सकती है। एक लिमिट में ही उन्हें तेल का खर्च दिया जा सकता है। इसके अलावा उनके कारकेड की गाड़ियों को भी कम करने का आदेश दिया जा सकता है। अधिकारियों के लिए पेट्रोल-डीजल खर्च की सीमा हो सकती है आधी PM की अपील के बाद कई राज्यों ने अपने यहां अधिकारी और मंत्रियों के लिए अलग-अलग नियम बनाने शुरू कर दिए हैं। कहीं गाड़ियों की संख्या को आधा किया गया है तो कहीं तेल के खर्च को लिमिट कर दिया गया है। अब बिहार में भी सरकार इस नियम को लागू कर सकती है। बिहार में फिलहाल सरकार की तरफ से सचिव स्तर के अधिकारी को 200 से 300 लीटर प्रति माह पेट्रोल या डीजल मिलता है। वहीं, BPSC रैंक के अधिकारी को 150 से 200 लीटर दिया जा रहा है। इसे आधा या कम किया जा सकता है। CM सम्राट चौधरी ने क्या अपील की है? बिहार के CM सम्राट चौधरी ने बुधवार को जनता से अपील की है कि लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। प्राइवेट और सरकारी ऑफिस में वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाए। मंत्री और जनप्रतिनिधि अपनी गाड़ियां कम करें।