जालंधर ब्लास्ट इंस्टाग्राम से रची साजिश:आतंकी बने मुनीर ने ₹1 लाख के लिए किया ब्लास्ट, वीडियोग्राफी करने वाला निकला सुरक्षा एजेंसी का ही मुखबिर

जालंधर के बीएसएफ हेडक्वार्टर के पास हुए आईईडी ब्लास्ट की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने दो आतंकियों, मुनीर खान और अनिल शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि इस धमाके का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठा गैंगस्टर शहजाद भट्टी है, जिसने मुनीर खान को एक लाख रुपये का लालच देकर इस वारदात को अंजाम दिलवाया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और खुफिया इनपुट के आधार पर दोनों को अमृतसर भागते समय दबोच लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि वीडियोग्राफी करने वाला अनिल शर्मा सुरक्षा एजेंसियों का मुखबिर था, जिसने ब्लास्ट की सूचना पहले ही अधिकारी को देने का दावा किया है। इंस्टाग्राम से शुरू हुई साजिश पुलिस पूछताछ में आतंकी मुनीर खान ने बताया कि वह 10वीं फेल है और इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी के संपर्क में आया था। भट्टी ने उसे जिहाद के नाम पर उकसाया और कहा कि अल्लाह ने तुम्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है और यह अल्लाह का ही काम है।” मुनीर को इस काम के बदले एक लाख रुपये का लालच दिया गया था और वादा किया गया था कि काम सही होने पर बड़ी रकम मिलेगी। कांपते हाथों से लगाया 8 मिनट का टाइमर मुनीर खान ने खुलासा किया कि उसने सोशल मीडिया के जरिए बम की टाइमिंग सेट करना सीखा था। घटना वाले दिन वह कार से पीएपी चौक तक आया और फिर पैदल ही ‘रॉन्ग साइड’ से ब्लास्ट वाली जगह की ओर बढ़ा। उसने बताया कि वह पहली बार ऐसा कर रहा था, इसलिए उसके हाथ कांप रहे थे। उसे डर था कि बम रास्ते में ही न फट जाए। उसने 8 मिनट का टाइमर सेट किया, बम रखा और भागकर सड़क पार कर अपनी कार में बैठकर जीरकपुर निकल गया। 150 कैमरों ने खोला राज, जीरकपुर से मिला सुराग पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए बस अड्डे से लेकर पीएपी चौक तक के 150 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे खंगाले। जांच में एक संदिग्ध कार दिखाई दी, जो ब्लास्ट से ठीक पहले रुकी और धमाके के 5 मिनट बाद वहां से निकल गई। पुलिस ने जब इस कार का पीछा किया तो वे जीरकपुर पहुंच गए, जहां मुनीर खान का फुटेज मिल गया। हालांकि, जब पुलिस उसके घर पहुंची तो वह फरार हो चुका था। इस मामले में गिरफ्तार दूसरा आरोपी अनिल शर्मा है, जो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। अनिल ने चौंकाने वाला दावा किया है कि वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए काम कर रहा था। उसने बताया कि वह भट्टी के संपर्क में था और अप्रैल में एक एजेंसी ने उसे 7 दिन अपनी कस्टडी में रखकर इस शर्त पर छोड़ा था कि वह भट्टी के हर इनपुट साझा करेगा। अनिल के मुताबिक, उसने 5 मई को ही धमाके की जानकारी ‘साहब’ को दे दी थी, लेकिन फिर भी ब्लास्ट हो गया। धमाके के समय अनिल शर्मा बीएसएफ चौक पर शराब के ठेके के सामने खड़ा था। उसने भट्टी को ‘लाइव धमाका’ दिखाया ताकि वह विश्वास दिला सके कि काम पूरा हो गया है। धमाके के बाद वह बस में बैठकर फरार हो गया। शुक्रवार को पुलिस मुनीर खान को उस जगह ले जाएगी जहां से उसने बम बरामद किया था। फिलहाल, पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर ने इस संवेदनशील मामले पर चुप्पी साधी हुई है और आगे की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

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