पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की है। इसका असर अब पंजाब में भी दिखना शुरू हो गया है। इसी कड़ी में चंडीगढ़ में बुधवार को सभी सरकारी दफ्तरों के कर्मचारी बसों या साइकिल से ऑफिस आएंगे। वहीं, अधिकारियों व वीवीआईपी के काफिलों में चलने वाले वाहनों की संख्या भी कम होगी। पंजाब के गवर्नर एवं चंडीगढ़ प्रशासक ने यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने सिक्योरिटी विभाग को पत्र लिखा है, ताकि बाद में किसी तरह की दिक्कत न हो। अब 2 पॉइंट्स में जानिए क्या बोले गवर्नर 1. “देखो, मैं सोचता हूं कि मैंने तो पहले ही दिन सबको कह दिया था कि बुधवार के दिन हमारा कोई भी स्टाफ मेंबर अपनी सरकारी गाड़ी का उपयोग नहीं करेगा। चाहे वो साइकिल से आए, चाहे पैदल आए, चाहे जो बसें हमारी चलती हैं, उनसे आए। अगर उससे भी नहीं हो, तो उसका परिवार का कोई व्यक्ति उसे छोड़कर जाए। लेकिन एक प्रयास अगले बुधवार से हम कर रहे हैं।” 2. “तो मैं सोचता हूं, और दूसरा यह है कि हमने सिक्योरिटी डिपार्टमेंट को भी भेजकर कहा है कि हम अपने साधनों को कम कर सकते हैं। कोई घटना-दुर्घटना होगी तो वे कहेंगे कि आपने हमारे बिना पूछे किया, इसलिए हमने उनको पत्र भेज दिया है। कोशिश करेंगे कि हमारे रिहायशी रवाज में जितने लोग रहते हैं, उनमें से जितनी कम से कम गाड़ियां की जा सकती हैं, करें।” 250 से 300 वाहन का अनुमान है
चंडीगढ़ में सरकारी/वीवीआईपी उपयोग हेतु कुल वाहन बेड़े की माने तो यह संख्या ढाई सौ से तीन सौ के बीच है। पुलिस विभाग ने हाल के वर्षों में 81 नए वाहन जोड़े हैं (26 PCR गाड़ियां व 55 अन्य वाहन) और वरिष्ठ IPS अधिकारियों के लिए कम से कम 20 वाहन आबंटित हैं। इसके अलावा शहर की सीमाओं, चौकी गश्त, बंदोबस्त आदि के लिए गाड़ियां एवं मोटरसाइकिलें चल रही हैं। प्रशासनिक विभागों और नगर निगम कार्यालयों में भी दर्जनों वाहन (कार, जीप आदि) हैं। स्वास्थ विभाग के 16 एम्बुलेंस भी शामिल करें तो कुल बेड़े का मोटा अनुमान 250–300 से अधिक वाहन बनता है।