रांची में धोनी के पड़ोसी बनेंगे पटना वाले ईशान किशन:11 मंजिला बिल्डिंग को परमिशन मिली; पिता बोले- बेटे के सपनों का आशियाना जल्द बनेगा

भारतीय क्रिकेट टीम के विकेट कीपर और बल्लेबाज ईशान किशन महेन्द्र सिंह धोनी के पड़ोसी बनेंगी। रांची के नगड़ी अंचल स्थित दलादली में ईशान किशन का नया आशियाना बनने की तैयारी शुरू हो गई है। ईशान किशन की बिल्डिंग धोनी के घर से करीब 300 मीटर की दूरी पर होगा। नगड़ी अंचल अंतर्गत मौजा दलादली के खाता संख्या-1 और प्लॉट संख्या-515 की 75 डिसमिल जमीन पर ईशान किशन का बहुमंजिला भवन बनेगा। रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (आरआरडीए) ने रिंग रोड के किनारे स्थित इस जमीन पर जी प्लस 10 तल्ला बिल्डिंग का नक्शा पास कर दिया है। बिल्डिंग का 2 फ्लोर बिजनेस परपस के लिए होगा। जबकि आठ फ्लोर आवासीय फ्लैट होगा। इस सोसाइटी में काफी लग्जरी सुविधाएं दी गई है। नक्शा पास हो गया, अब जल्द तैयार होगी बिल्डिंग ईशान किशन के पिता प्रणव कुमार पांडे ने बताया कि, जल्द ही रिंग रोड के किनारे ईशान के सपनों का बिल्डिंग तैयार होगा। क्योंकि, बिल्डिंग को आधुनिक तरीके से विकसित किया जाएगा। सोसाइटी में प्लेग्राउंड से लेकर गेस्ट हाउस तक होगा ईशान किशन की जमीन पर स्वीकृत नक्शे में काफी सुविधाएं होंगी। इस प्रोजेक्ट में ओपन स्पेस के रूप में प्ले ग्राउंड, इंडोर गेम, स्विमिंग पूल, जिम, गेस्ट हाउस, कम्युनिटी हॉल, गार्डन, सैलून-पार्लर, मेडिकल और डिपार्टमेंटल स्टोर की सुविधाएं होंगी। पूरे सोसाइटी में ओपन स्पेस अधिक रखने पर जोर दिया गया है। सामने के हिस्से में फ्रंट सेट बैंक भी अधिक रखा गया है, ताकि बिल्डिंग का फ्रंट लुक बेहतरीन लगे। 2022 में हुआ था भूमि पूजन ईशान किशन ने दिसंबर 2022 में इस 75 डिसमिल जमीन पर भूमि पूजन किया था। शगुन ईशान इंफ्रा नाम से एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी बनाई थी। इसी कंपनी के तहत इस प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। भूमि पूजन के समय ही तय हो गया था कि अब वे धौनी के पड़ोसी बनेंगे। इलाके में बढ़ी जमीनों की कीमत धोनी का फार्म हाउस बनने के बाद से ही रांची का दलादली और रिंग रोड इलाका चर्चा में था. लेकिन अब ईशान किशन के इस कदम से यह क्षेत्र तेजी से एक बड़े कॉमर्शियल जोन में तब्दील हो रहा है। इसका सीधा असर यहाँ की जमीनों की कीमतों पर पड़ा है. आज की स्थिति यह है कि मुख्य सड़क के किनारे प्लॉट उपलब्ध ही नहीं हैं, और अंदरूनी इलाकों में भी जमीन के भाव 10 लाख रुपये प्रति डिसमिल के पार पहुंच चुके हैं। ईशान को बिहार सरकार ने दिया था 1 करोड़ का इनाम भारतीय क्रिकेट टीम की टी-20 विश्व कप 2026 में ऐतिहासिक जीत में बिहार के स्टार क्रिकेटर ईशान किशन की शानदार भूमिका रही है। ईशान किशन के पटना पहुंचने पर चीफ मिनिस्टर सेक्रेट्रिएट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ईशान किशन का भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने ईशान को 1 करोड़ रुपये का चेक सौंपा, उन्हें एक खास मेमेंटो भी दिया। अब जानिए ईशान किशन के बारे में पटना के बेली रोड के आशियाना में 7 साल की उम्र में ही बल्ला पकड़ने वाले ईशान बेहतरीन विकेटकीपर और बैट्समैन हैं। वे झारखंड की ओर से रणजी खेलते थे। ईशान का टैलेंट कोच और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ के मार्गदर्शन में निखरा और उन्हें अंडर-19 टीम की कप्तानी का मौका मिला। ईशान बचपन से ही क्रिकेट के दीवाने रहे। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून ऐसा था कि वे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते थे। उनके इस जुनून के चलते वे पढ़ाई में पीछे हो गए थे। डेफिनेट के नाम से बुलाते हैं दोस्त ईशान को उनके दोस्त डेफिनेट बुलाते हैं। यह नाम फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में जीशान कादरी द्वारा निभाए गए डेफिनेट के किरदार से आया था। दोस्तों का मानना है कि किशन जो एक बार तय कर लेते हैं, उसे पूरा ही करते हैं। इसलिए लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं। ईशान एडम गिलक्रिस्ट, राहुल द्रविड़ और महेंद्र सिंह धोनी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। क्रिकेट के अलावा, ईशान को टेबल टेनिस और बिलियर्ड्स खेलना काफी पसंद है। ईशान ने क्रिकेट के लिए स्कूल छोड़ दिया था इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने वाले ईशान किशन ने खेल के लिए स्कूल छोड़ दिया था। ईशान की क्रिकेट के प्रति दीवानगी से टीचर भी परेशान थे। बार-बार क्लास में खड़ा किए जाने के बाद भी ईशान ग्राउंड में टिके रहते। टीचर ने साफ कह दिया कि पढ़ाई और क्रिकेट एकसाथ नहीं चल सकता, ईशान को दोनों में से एक रास्ता चुनना होगा। ईशान ने टीचर से साफ कह दिया कि वे खेल के लिए पढ़ाई भी छोड़ सकते हैं। ईशान के बचपन के दोस्त यशस्वी सिंह बताते हैं कि ईशान के जैसा क्रिकेट का दीवाना नहीं देखा। वह खाना-पीना सब भूल जाते थे। ऐसा लगता था कि ईशान के लिए क्रिकेट से बढ़कर कुछ भी नहीं। वह कब खेलने के लिए पटना से रांची पहुंच जाते थे, कुछ पता ही नहीं चलता था। स्कूल से बाहर कर दिए जाने के बाद भी ईशान को कोई तकलीफ नहीं थी, क्योंकि वह जानते थे कि उनका बल्ला एक न एक दिन भारत के लिए इतिहास बनाएगा। यशस्वी बताते हैं कि वे क्लास 9 में ईशान के साथ डीपीएस पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे। इस स्कूल से ईशान को निकाल दिया गया था। बाद में ईशान ने फुलवारी के एक प्राइवेट स्कूल से मैट्रिक किया था।

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