चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) बिहार-झारखंड के बाद अब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। पार्टी यहां की सभी 403 सीटों पर अकेले मैदान में उतरेगी। इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। लखनऊ से लेकर अयोध्या तक चिराग पासवान के बड़े-बड़े पोस्टर्स लगााए जा रहे हैं। इस पोस्टर्स पर नारे गढ़े जा रहे हैं ‘क्यों मांगे उधार, अपना नेता तैयार’.. ‘यूपी फर्स्ट यूपी वाले मस्ट…’ पार्टी के अध्यक्ष और चिराग पासवान पहले भी ये ऐलान कर चुके हैं कि वे यूपी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में भास्कर ने LJP(R) के टॉप लीडरशीप से बात की। हमने उनसे समझा, आखिर चिराग पासवान यूपी में चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं। यूपी के किस-किस इलाके पर इनका फोकस है। पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव क्यों नहीं लड़ना चाहती है। पढ़िए रिपोर्ट..। BJP के साथ गठबंधन केवल बिहार-झारखंड में LJP(R) में पार्टी के नंबर-2 और जमुई के सांसद अरुण भारती ने भास्कर को बताया, ‘फिलहाल हमारा पूरा फोकस यूपी विधानसभा चुनाव पर है। हम यूपी में संगठन विस्तार पर काम कर रहे हैं। हम सभी सीटों पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं। पार्टी इस दिशा में आगे बढ़ चुकी है।’ गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा, ’BJP के साथ हमारा गठबंधन बिहार और झारखंड में है। यूपी में फिलहाल हमारा किसी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं है। फिलहाल उनका न ही किसी के साथ गठबंधन हुआ है और न ही किसी के साथ गठबंधन का इरादा है।’ चुनाव में 8 महीने का समय बचा है, वहां आपका क्या बेस है? पार्टी के सांसद और चिराग के बहनोई अरुण भारती ने बताया, ’पहले चरण में संगठन को विस्तार देने और मजबूत करने की दिशा में काम चल रहा है। हम जिला से लेकर बूथ तक संगठन को खड़ा कर रहे हैं। लोगों से चुनाव लड़ने संबंधी राय ले रहे हैं। जहां हमारा संगठन पहले से मजबूत है, वहां लोगों से विधानसभा चुनाव के कैंडिडेट पर चर्चा कर रहे हैं।’ चिराग पासवान को उत्तर भारत का नेता बनाने की तैयारी पार्टी के नेताओं ने बताया कि हम चिराग पासवान को पूरे उत्तर भारत का नेता बनाना चाहते हैं। हमारी पार्टी पहले ही बिहार में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हमने झारखंड में भी चुनाव लड़ा। अब यूपी में भी चुनाव लड़ेंगे। चिराग पासवान की अपनी लोकप्रियता है। हर इलाके में उनकी मजबूत पकड़ है। पहले भी हमारी पार्टी का यूपी में जनाधार रहा है। हाल के कुछ वर्षों में हम यहां चुनाव नहीं लड़े। अब हम इसे नए सिरे से शुरू करने जा रहे हैं। पूर्वांचल और सेंट्रल यूपी में पार्टी मजबूती से लड़ेगी, इसी इलाके में पासी सबसे अधिक सूत्रों की मानें तो LJP(R) की तरफ से एक प्राइमरी लेवल का सर्वे कराया गया है। पार्टी के बड़े नेता फिलहाल एक्सपर्ट की मदद से इसके डेटा का अध्ययन कर रहे हैं। बिहार में पार्टी के एक बड़े नेता ने भास्कर को बताया, ‘ जब एक बार पूरे डेटा की स्टडी हो जाएगी तब हम इस पर कुछ भी स्पष्ट तरीके से बोल पाएंगे। हमारा फोकस पूर्वांचल और सेंट्रल यूपी पर है। इन इलाकों में हम पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे। पहले लेवल के सर्वे में कैंडिडेट के कुछ चेहरे भी फाइनल हो गए हैं। लेकिन, इसका खुलासा हम इसकी प्रॉपर स्टडी करने के बाद ही करेंगे।’ पूर्वांचल और सेंट्रल यूपी क्यों? यूपी के इन दो इलाकों में फोकस करने का खास कारण भी हो सकता है। एक तो पूर्वांचल के जिले बिहार से सटे हैं तो यहां बिहार का प्रभाव पड़ता है। दूसरा बड़ा कारण ये है कि यूपी के 21 फीलदी दलित आबादी में से लगभग 3 फीसदी आबादी पासी की है। इनका ज्यादातर प्रभाव क्षेत्र सेंट्रल यूपी और पूर्वांचल ही है। यूपी में पासी और बिहार के पासवान दोनों एक ही हैं। ऐसे में पार्टी की कोशिश है कि इस कम्युनिटी के बीच खुद को एस्टेब्लिश किया जाए और ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल किया जाए। पार्टी के नेता भी इस बात को अच्छे से समझ रहे हैं कि यहां उनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है और पाने को सबकुछ है। दलितों के साधने के लिए पासी महापुरुषों के नाम पर आयोजन पार्टी के एक बड़े नेता की मानें तो सर्वे की स्टडी के बाद पार्टी सभी जिलों में संगठन खड़ा करेगी। इसके बाद पासी समाज के बड़े नेताओं का सम्मेलन करेगी। अरुण भारती बताते हैं, ‘पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान का सपना रहा है, पासवान-पासी गठजोड़ का। इसी रणनीति के तहत पासी समाज के सभी महापुरुषों की जयंती और उनके नाम पर सम्मेलन का आयोजन पूरे UP में किया जाएगा। इसकी भी स्ट्रैटजी तैयार की जा रही है। इन कार्यक्रमों की घोषणा बहुत जल्द की जाएगी।’ क्या मायावती के कमजोर पड़ने के बाद दलित स्पेस में जगह बनाना चाहते हैं चिराग? इस सवाल पर पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल ने कहा, ‘चिराग पासवान युवा हैं। लंबा राजनीतिक सफर है। उनके पिता दिवंगत रामविलास पासवान की पकड़ बिहार की राजनीति पर थी। उनकी पहचान दलितों के राष्ट्रीय स्तर के नेता की थी।’ ‘मायावती की उम्र हो रही है। उनकी राजनीतिक पकड़ भी कमजोर हुई है। मायावती के बाद इस वक्त हिन्दी पट्टी में दलितों का कोई देशव्यापी चेहरा नहीं है। युवा नेता हैं तो उनकी पकड़ सीमित एरिया में ही है। चिराग उस स्पेस को भरने का प्रयास करना चाहते हैं।’ क्या चुनाव लड़कर चिराग BJP को फायदा पहुंचा सकते हैं? चिराग पासवान के UP में चुनाव लड़ने के पीछे BJP की स्ट्रेटजी होने की संभावना है। दरअसल, BJP को दलित वोटरों के मायावती, सपा-कांग्रेस की तरफ जाने की आशंका है। 2024 लोकसभा चुनाव का रिजल्ट इसका उदाहरण है… 105 सीट पर लड़ी थी सहनी की पार्टी, एक भी नहीं जीती ऐसा पहली बार नहीं है, जब बिहार की पार्टी यूपी में अपनी जमीन तलाश रही है। इससे पहले जदयू यूपी में चुनाव लड़ती रही है। पिछले चुनाव में मुकेश सहनी की पार्टी VIP चिराग पासवान की तरह बिहार में NDA गठबंधन का हिस्सा रहते हुए यूपी में 105 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ी थी। पार्टी का पूरा फोकस पूर्वांचल की सीटों पर था, एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो पाई। यूपी चुुनाव के बाद बीजेपी ने उनके बिहार में सभी तीन विधायकों को अपने साथ मिला लिया था। गठबंधन तोड़कर मुकेश सहनी से मंत्रीपद भी छीन ली थी। जबकि जदयू 16 सीटों पर चुनाव लड़कर 2 सीट जीतने में सफल रही थी।