भास्कर न्यूज | जालंधर सामजिक न्याय विभाग ने 15 मई को स्टूडेंट्स की नई लिस्ट जारी है। राज्य सरकार की पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना के तहत शिक्षा हासिल कर रहे जालंधर सहित पूरे राज्य के हजारों अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्ग के छात्रों का वजीफा अधर में लटकने का गंभीर अंदेशा पैदा हो गया है। हाल ही में जारी आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि अकेले पिछले 4 शैक्षणिक वर्षों में राज्य भर के 11,566 छात्रों के आवेदनों में आधार सीडिंग न होने और बैंक स्तर की बड़ी खामियां पाई गई हैं। अब ये वजीफा लेने के लिए स्टूडेंट्स को अपने बैंक जाना होगा। वहां पर बैंक खाते में सरकार की सीधा बैंक खाते में पैसा डालने वाली स्कीम का आप्शन ओपन करा होगा, जिनके आवेदन फार्म में गलतियां हैं, उन्हें ठीक कराना होगा। बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक करवाना है। कई स्टूडेंट्स ऐसे हैं जिनका आधार कार्ड 2 बार बनाया हुआ था। अब आधार कार्ड अथारिटी ने डुप्लीकेसी के कारण एक आधार कार्ड बंद कर दिया है। स्टूडेंट्स इसकी जानकारी नहीं रखते। जो आधार कार्ड बंद है, उसके जरिए वजीफा स्कीम का लाभ नहीं लिया जा सकता है। बंद आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक नहीं किया जा सकता है। यहीं से वजीफा लेने के लिए आवेदन अटक जाता है। पिछले चार शैक्षणिक वर्षों में कुल 11,566 छात्रों के आवेदनों में तकनीकी त्रुटियां पाई गई हैं। आंकड़ों के ग्राफ पर नजर डालें तो शैक्षणिक वर्ष 2022-23 में 2,831 छात्र, 2023-24 में 1,799 छात्र, 2024-25 में 2,147 छात्र और वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में सबसे अधिक 4,789 छात्र इस समस्या से प्रभावित हुए हैं। इस प्रकार बीते चार वर्षों में प्रभावित छात्रों का कुल आंकड़ा 11,566 तक पहुंच गया है। आंकड़ों की गहन पड़ताल से सामने आया है कि छात्रों की स्कॉलरशिप रुकने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी गलतियां और कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ी और आम गलती है जो छात्रों के स्तर पर हुई है। इसका मतलब है कि छात्र का बैंक खाता तो खुला हुआ है, लेकिन उन्होंने अपने बैंक जाकर उसे डीबीटी यानी सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे खाते में पाने के लिए सक्रिय नहीं करवाया। दूसरी दिक्कत ये है कि जिनका खाता पहले डीबीटी के लिए चालू था, लेकिन लंबे समय से ट्रांजेक्शन न होने, बैंक अकाउंट फ्रीज होने या केवाईसी अपडेट न कराने के कारण बैंक ने उनके आधार को डीबीटी मोड से डिसएबल (निष्क्रिय) कर दिया है। तीसरी दिक्कत के मुताबिक छात्रों के आधार कार्ड को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा ही किसी तकनीकी कारण या डुप्लीकेसी की वजह से कैंसिल कर दिया गया है, जिसकी जानकारी छात्रों को खुद भी नहीं है।