पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस सुधार और पुलिसकर्मियों की सुविधाओं को लेकर दायर जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन (UT) के मुख्य सचिवों को अपनी मांगों का आवेदन देने की अनुमति दी है। इसके साथ ही सरकारों को दो महीने के भीतर इस पर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। यह जनहित याचिका निखिल सराफ ने दायर की थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने 18 मई को फैसला सुरक्षित रखा था। पुलिस सुधारों की उठाई मांग याचिका में पुलिस विभाग के नियमों में बदलाव, पुलिस कार्यप्रणाली के डिजिटाइजेशन, पुलिसकर्मियों के प्रमोशन, बेहतर वेतन और कार्यस्थितियों में सुधार जैसी कई मांगें उठाई गई। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग कि पुलिस थानों और चौकियों में महिलाओं के लिए अलग और साफ शौचालय बनाए जाएं। लॉकअप सेल साफ-सुथरे और रोशनी वाले हों तथा आरोपियों को मीडिया के सामने पेश न किया जाए क्योंकि अदालत से दोषी साबित होने तक उन्हें अपराधी नहीं माना जा सकता। इसके अलावा पुलिस शिकायत प्राधिकरणों की जानकारी सभी थानों और चौकियों में प्रमुखता से लगाने की भी मांग की गई थी। 8 घंटे ड्यूटी और प्रमोशन की मांग याचिका में कहा गया था कि पुलिसकर्मियों को लगातार 8 घंटे से ज्यादा ड्यूटी न कराई जाए। उनके लिए हाउसिंग स्कीम लाई जाए और छुट्टियां देने में उदारता बरती जाए। याचिकाकर्ता ने कांस्टेबलों को करियर में कम से कम तीन प्रमोशन देने, अतिरिक्त 45 दिन का वेतन देने और पुलिस स्टेशनों में शिफ्ट सिस्टम लागू करने की मांग भी उठाई थी। याचिका में ट्रैफिक पुलिस को गर्मियों में पर्याप्त ब्रेक देने, जहरीली गैसों और धुएं से सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा हर तीन महीने में मेडिकल जांच कराने की भी मांग शामिल थी। सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित मुद्दे सुनवाई के दौरान राज्य सरकारों की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिका में उठाए कई मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अन्य मामले में विचाराधीन हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया था कि वह केवल उन्हीं मुद्दों को स्पष्ट करे जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित नहीं हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने फरवरी 2024 में जवाब दाखिल कर छह प्रमुख मुद्दों पर सुनवाई की मांग की थी। इनमें पुलिस थानों में मानवीय सुविधाएं, आरोपियों को मीडिया के सामने पेश न करना, पुलिस शिकायत प्राधिकरणों की जानकारी प्रदर्शित करना, पुलिस कार्यप्रणाली का डिजिटाइजेशन और पुलिस नियमों में संशोधन जैसे मुद्दे शामिल थे। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े हैं। इन पर संबंधित सरकारों और सक्षम प्राधिकरणों को विचार करना चाहिए। 30 दिन के भीतर लें निर्णय कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले संबंधित सरकारों के सामने कोई विस्तृत प्रतिनिधित्व नहीं दिया था। अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को 30 दिन के भीतर पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों को अपनी मांगों संबंधी आवेदन देने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि आवेदन मिलने के दो महीने के भीतर संबंधित अधिकारी फैसला लेकर उसकी कॉपी याचिकाकर्ता को दें।