बिहार सरकार के खर्चे पर विदेश यात्रा पर रोक लगेगी। मंत्री और अफसर सरकारी खर्चे पर दूसरे देशों की यात्रा नहीं कर पाएंगे। इधर, सरकार ने अपने अफसर-कर्मियों को सपरिवार बिहार के पर्यटन स्थलों पर घुमाने की बात तय की। उन्हें 3 महीने में एक बार शुक्रवार व शनिवार को पर्यटन स्थल पर जाना होगा। वहां रात्रि विश्राम करना होगा। सरकार तय टीए-डीए देगी। बाकी खर्चे अफसर-कर्मियों के होंगे। मंशा, ‘’लोकल फॉर वोकल’’ को बढ़ाने की है। घूमने वाले अपना अनुभव और सुझाव बताएंगे। इसी अनुसार सुधार या इंतजाम होंगे। सूत्रों के मुताबिक, विदेश यात्रा पर रोक अगले 6 महीने तक रह सकती है। सरकारी खर्चे पर बिहार के मंत्री-अफसर विदेश जाते रहे हैं। इसको लेकर एकाध दिनों में बाकायदा आदेश जारी होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर इसका मजमून लगभग तैयार है। इसे अमेरिका-ईरान-इजराइल युद्ध को ले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए पेट्रोल बचत से लेकर विदेश यात्रा तक से परहेज करने के आह्वान से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री के इस आह्वान का बिहार में फौरी असर हुआ। प्रधानमंत्री ने अपना कारकेड छोटा किया, तो तत्काल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी यही किया। अपने कारकेड को सिर्फ 3 गाड़ियों तक सीमित किया। एक गाड़ी खुद के लिए, तो आगे-पीछे की 2 गाड़ियों में उनके सुरक्षाकर्मी तथा अन्य लोग। राज्यपाल ने भी ठीक यही किया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री-अफसरों के आगे-पीछे घूमने वाली गाड़ियां भी कम हुईं। मुख्यमंत्री ने ‘’नो व्हीकल डे’’ मनाने की बात कही। अफसरों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से मीटिंग करने को कहा। ‘’वर्क फ्रॉम होम’’ पर जोर दिया। विदेश यात्रा पर पाबंदी की बात, इसी कड़ी का खास हिस्सा है। ‘बिहार दर्शन’… शुक्रवार-शनिवार को पर्यटन स्थल पर कर्मियों को घुमाएगी सरकार
गृह जिला छोड़कर होगा ‘बिहार दर्शन’, 3 स्थलों का भ्रमण जरूरी
बिहार सरकार ने ‘बिहार दर्शन’ योजना शुरू की है। इसके तहत अफसर-कर्मी गृह जिला छोड़कर दूसरे जिलों में सपरिवार भ्रमण करेंगे। शुक्रवार और शनिवार को पर्यटन स्थल पर रुकना होगा। यात्रा के बाद फोटो, अनुभव और सुझाव का प्रतिवेदन विभाग को सौंपना अनिवार्य रहेगा। घूमने की फोटो व जानकारी साझा करनी होगी
गृह जिला छोड़कर दूसरे जिले में भ्रमण करना जरूरी होगा।
शुक्रवार-शनिवार को पर्यटन स्थल पर रात्रि विश्राम करना होगा।
अफसर-कर्मी सपरिवार बिहार दर्शन के लिए भ्रमण करेंगे।
घूमने के दौरान फोटो और जानकारी साझा करनी होगी।
अनुभव और सुझाव का प्रतिवेदन विभाग को देना होगा।
होम स्टे और ईको टूरिज्म को प्राथमिकता देनी होगी।
प्रतिवेदन जुटाने के लिए नोडल अफसर तैनात किए जाएंगे।
पर्यटन सुविधाओं की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। पर्यटन बढ़ेगा, बिहार में ही खर्च होगा पैसा
बिहार में लोकल पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।
पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार आसानी से हो सकेगा।
दूसरे लोग भी घूमने आने के लिए प्रेरित होंगे।
स्थानीय कारोबार और रोजगार को नया बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन क्षेत्रों के विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी।
अफसरों के सुझाव से सुविधाओं में सुधार हो सकेगा।
होम स्टे और ईको टूरिज्म को मजबूती मिल सकेगी।
बिहार का पैसा बिहार में ही खर्च हो सकेगा। इधर मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा की, सौर ऊर्जा का खूब प्रचार-प्रसार करने को कहा
बिहार के 10 लाख घर सौर ऊर्जा से रोशन हाेंगे : सम्राट
बिहार अब अपनी बिजली खुद पैदा करने की राह पर बड़े कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि राज्य में अब पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम की जाएगी और सूरज की रोशनी से हर घर को जगमग किया जाएगा। सोमवार को ऊर्जा विभाग की हाई-लेवल समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘नेक्स्ट लेवल’ का विजन साझा किया। उन्होंने दो टूक कहा कि 10 लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के घरों पर युद्ध स्तर पर सोलर संयंत्र लगाए जाएं। वे सोमवार को ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को जमीन पर उतारने के लिए रफ्तार बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि हरित और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है। सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जहां भी सोलर पैनल लगे हैं, उनका मेंटेनेंस हर हाल में दुरुस्त रहना चाहिए। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है-लोगों को बिजली के लिए दूसरों का मुंह न ताकना पड़े। आत्म निर्भरता का विकल्प जरूरी
बिहार में बिजली की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे केवल पारंपरिक कोयला आधारित बिजली से पूरा करना न तो सस्ता है और न ही पर्यावरण के अनुकूल। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का 10 लाख घरों पर सोलर लगाने का दांव एक बड़ा गेम-चेंजर है। इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होगा और उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का विकल्प भी मिलेगा। जीविका दीदियों को इस मिशन से जोड़ना एक सोची-समझी रणनीति है। वहीं, कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का मतलब है-किसानों की लागत में भारी कमी। यह योजना न केवल पर्यावरण को बचाएगी, बल्कि बिहार के हर गरीब और किसान की जेब में सीधे बचत का पैसा डालेगी।