बिहार में UP-दिल्ली, मुंबई से महंगा पेट्रोल-डीजल क्यों:सरकार पेट्रोल पर 21 रुपए लीटर कमा रही, कीमत क्यों नहीं घटा रही, 3 पॉइंट में

देश के सबसे गरीब राज्यों में शुमार बिहार में आज पेट्रोल-डीजल के दाम दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे अमीर महानगरों से भी ज्यादा हैं। पटना से लेकर भागलपुर तक पेट्रोल जहां 113 से 114 रुपए लीटर बिक रहा है, वहीं डीजल भी शतक लगाने के करीब है। आखिर ऐसा क्यों है। महीने का 6 हजार रुपए कमाने वाले राज्य के लोगों को देश में सबसे महंगा तेल क्यों खरीदना पड़ रहा है। सम्राट सरकार कीमतों को कंट्रोल क्यों नहीं कर रही। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में जानिए बिहार में तेल के महंगे होने का पूरा गणित…। सवाल-1ः बिहार में पेट्रोल-डीजल की कीमत क्या है? जवाबः तेल कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपए प्रति लीटर महंगा कर दिया। इस बढ़ोतरी के बाद बिहार के मुख्य शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमत… बिहार में पेट्रोल-डीजल की कीमत उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई से भी ज्यादा है। सवाल-2ः दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई से महंगा पेट्रोल-डीजल बिहार में क्यों? जवाबः बिहार में ईंधन के महंगे होने के मुख्य रूप से 3 कारण हैं… 1. VAT और सरचार्ज: पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला मूल्य वर्धित कर (VAT) हर राज्य में अलग होता है। दिल्ली में पेट्रोल पर वैट काफी कम (करीब 19.4%) है। 2. रिफाइनरी से दूरी और फ्रेट चार्ज: बिहार में अपनी कोई बड़ी कच्चे तेल की रिफाइनरी नहीं है। ईंधन को बरौनी रिफाइनरी या पड़ोसी राज्यों (जैसे पश्चिम बंगाल या ओडिशा) से पाइपलाइन और टैंकरों के जरिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जाता है। इस लंबी दूरी के परिवहन का खर्च भी राज्य में तेल की कीमत में जुड़ जाता है। 3. डीलर कमीशन का अंतर: रिफाइनरी या डिपो से दूरी के आधार पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) का कमीशन और ढुलाई खर्च बदल जाता है, जिससे बिहार के भीतर भी अलग-अलग शहरों में दाम अलग होते हैं। सवाल-3ः बिहार सरकार VAT कम क्यों नहीं करती? जवाबः VAT कम न करने के पीछे विशुद्ध रूप से राजकोषीय कारण है। GST लागू होने के बाद राज्यों के पास खुद का टैक्स वसूलने के बहुत सीमित रास्ते बचे हैं। मुख्य रूप से पेट्रोल-डीजल पर वैट और शराब पर टैक्स। पेट्रोल-डीजल से सलाना 8 हजार करोड़ आमदनी पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के 2025-26 के आंकड़े के मुताबिक, बिहार में 1,236 हजार मीट्रिक टन पेट्रोल मतलब करीब 161 से 167 करोड़ लीटर और 2,509 हजार मीट्रिक डीजल यानी 295 से 306 करोड़ लीटर की खपत का अनुमान है। शराबबंदी से सालाना 20 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, जिसकी वजह से राज्य सरकार को आबकारी विभाग से मिलने वाला भारी-भरकम राजस्व पहले ही बंद हो चुका है। राज्य में चल रही सात निश्चय योजना, मुफ्त बिजली, पेंशन, महिलाओं को 10 हजार रुपए देना और बुनियादी ढांचे (सड़क, अस्पताल, स्कूल) के विकास के लिए सरकार पूरी तरह से पेट्रोल-डीजल से मिलने वाले वैट पर निर्भर है। अगर सरकार इसे कम करती है, तो विकास कार्यों के लिए बजट का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। सवाल-4ः पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से क्या होगा? जवाबः पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सवाल-5ः पेट्रोल डीजल के दाम क्यों बढ़ रहे? जवाबः इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से तीन-चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *