अफ्रीका के कांगो और युगांडा में इबोला वायरस फैलने के बाद बिहार हाई अलर्ट पर है। केंद्र की एडवाइजरी के बाद राज्य सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। दुनिया के सबसे खतरनाक और जानलेवा वायरस में से एक इबोला के अफ्रिकी देशों में तेजी से फैलाव के बाद बिहार हाई अलर्ट पर है। केंद्र की एडवाइजरी जारी करने के बाद राज्य सरकार ने भी सभी 38 जिलों को अलर्ट जारी कर दिया है। शरीर की नसों को खोखला करने वाले इस वायरस के होने पर आधे से ज्यादा मरीज जिंदा नहीं बच रहे हैं। इबोला वायरस का संक्रमण कितना खतरनाक है, क्या इससे कोरोना जैसी महामारी फैल सकती है और बिहार में इससे कितना खतरा है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में… सवाल-1ः अफ्रीका में फैले इबोला वायरस का मामला क्या है? जवाबः फिलहाल मध्य अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC), युगांडा और दक्षिण सूडान में इबोला वायरस तेजी से फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, इस बार यह वायरस इबोला के बेहद दुर्लभ और खतरनाक ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ के कारण फैला है। सवाल-2ः इबोला वायरस क्या है और बिहार सरकार ने क्या एडवाइजरी जारी की है? जवाबः यह एक घातक और गंभीर वायरल बीमारी है, जिसे ‘इबोला हेमोरेजिक फीवर’ भी कहा जाता है। यह वायरस जंगली जानवरों (जैसे फ्रूट बैट्स या चमगादड़) से इंसानों में आता है और फिर इंसानों से इंसानों में फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, बदन दर्द, उल्टी, डायरिया और गंभीर मामलों में आंतरिक या बाहरी ब्रीडिंग (खून बहना) शामिल है। हालांकि, अच्छी बात है कि भारत में अब तक इबोला वायरस का एक भी केस सामने नहीं आया है। अफ्रिकी देशों में जाने से बचने की सलाह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने राज्य सरकारों के लिए SOPs जारी किए हैं… बिहार में हाई अलर्ट 22 मई को इबोला वायरस को लेकर बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित राज्य स्वास्थ्य समिति ने हाई लेवल मीटिंग की। इसमें राज्य सरकार ने अपनी SOP बनाई। सवाल-3ः इबोला वायरस कितना खतरनाक है? जवाबः विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इबोला वायरस दुनिया के सबसे जानलेवा वायरसों में से एक है। इसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50% है। पिछले कुछ वायरसों में मृत्यु दर 25% से लेकर 90% तक है। यानी अगर सही समय पर इलाज न मिले, तो अधिकांश संक्रमित मरीजों की जान जाने का खतरा है। यह इतना घातक क्यों है… सवाल-4ः इबोला वायरस का इलाज क्या है? जवाबः कोई निश्चित इलाज नहीं है। इबोला के ‘जायरे स्ट्रेन’ के लिए पहले दो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाएं (Inmazeb और Ebanga) और ‘Ervebo’ नाम की वैक्सीन स्वीकृत हैं। लेकिन वर्तमान में अफ्रीका में फैल रहे ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। सवाल-5ः तो क्या इससे कोरोना जैसी महामारी भी फैल सकती है? जवाबः नहीं, इबोला के कोरोना की तरह फैलने की आशंका बेहद कम है। इसे ऐसे समझिए… कोरोनाः यह हवा से फैलता है। कोई व्यक्ति बिना लक्षण के भी दूसरों को संक्रमित कर सकता था। लक्षण दिखने से पहले ही फैल सकता है। बहुत तेजी से फैलता है। इबोलाः यह हवा से नहीं फैलता। यह केवल संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थ (खून, लार, पसीना, उल्टी, मल) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। मरीज केवल तभी संक्रमण फैला सकता है जब उसमें बीमारी के लक्षण (जैसे बुखार या ब्लीडिंग) दिखने शुरू हो चुके हों। इसके फैलने की रफ्तार धीमी है। यह आदमी टू आदमी फैलेगा। सवाल-6ः बिहार को इबोला वायरस से कितना खतरा? जवाबः वैज्ञानिक और भौगोलिक दृष्टि से बिहार को इबोला से सीधा या तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं है। इसके 2 कारण हैं… हालांकि… मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीकी देशों (मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका, सूडान और दक्षिण सूडान) में लगभग 70 हजार से अधिक बिहारी मूल के लोग रहते हैं। अकेले दक्षिण अफ्रीका में ही लगभग 63 हजार भोजपुरी बिहारी समुदाय के लोग बसे हुए हैं। अफ्रीका से अगर प्रवासी लोग सीधे बिहार लौटे तो वायरस फैल सकता है। अफ्रीका के करीब अरब देश हैं, जहां बिहार के ज्यादा प्रवासी काम करने जाते हैं। अगर यह वायरस अरब में पहुंचता है तो बिहारियों की जान को खतरा हो सकता है। अरब से लौटने वाले लोग भी वायरस ला सकते हैं।