हरियाणा के करनाल में एनडीआरआई चौक के पास प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। यहां भाजपा नेता विजय वेदपाल के घर के बाहर बने पुलिस सुरक्षा कक्ष को तोड़ दिया। यह कार्रवाई एनएचएआई की परिधि में आने वाली जमीन पर की गई। जानकारी के मुताबिक, भाजपा नेता ने ही केंद्रीय मंत्री को ट्रैफिक और प्रदूषण के संबंध में एक शिकायत की थी, लेकिन इसकी गाज भाजपा नेता के घर के बाहर बने अवैध अतिक्रमण पर ही गिर गई। मौके पर किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा, हालांकि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। बता दें कि भाजपा नेता विजय के पिता चौधरी वेदपाल हरियाणा विधानसभा के छठे डिप्टी स्पीकर (उपाध्यक्ष) रह चुके है। 1982 में कांग्रेस से घरौंडा विधानसभा से चुनाव जीतकर हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर बने थे। जनवरी, 2023 में उनका 84 साल की उम्र में निधन हो गया था। यहां जानिए कैसे हुई भाजपा नेता के अतिक्रम पर कार्रवाई… चौधरी वेदपाल, घरौंडा से विधायक बनकर पहुंचे थे विधानसभा पंच से शुरू किया राजनीतिक सफर
चौधरी वेदपाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत गांव कैड़रौली (यमुनानगर) से पंच के रूप में की थी। इसके बाद वे धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए और 1967-68 में मार्केट कमेटी रादौर के चेयरमैन बने। यहीं से उनकी सक्रिय राजनीति को मजबूती मिली। घरौंडा से विधायक बनकर राजनीति में बनाई पहचान
चौधरी वेदपाल 1982 में घरौंडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। इसी कार्यकाल के दौरान उन्हें हरियाणा विधानसभा का डिप्टी स्पीकर बनाया गया। वे 24 जून 1982 से 23 जून 1987 तक इस पद पर रहे। यह समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार का था और उस दौरान मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल थे। कैबिनेट दर्जा प्राप्त कर संभाले बड़े पद
डिप्टी स्पीकर रहने के अलावा उन्होंने हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन के रूप में भी काम किया। यह जिम्मेदारी उन्हें चौधरी बंसीलाल सरकार के दौरान मिली, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। इसके अलावा वे ऑल इंडिया मार्केटिंग बोर्ड काउंसिल के चेयरमैन भी रहे। राष्ट्रीय स्तर पर भी रही सक्रियता
चौधरी वेदपाल ने प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष रहे और राष्ट्रवादी किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर भी रहे। इसके साथ ही उन्होंने DAV पीजी कॉलेज करनाल के प्रधान के रूप में भी चार बार जिम्मेदारी निभाई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी किया प्रतिनिधित्व
उन्होंने अपने जीवनकाल में 44 देशों का दौरा किया और भारत का प्रतिनिधित्व किया। देश के कई पूर्व राष्ट्रपतियों के साथ उनके अच्छे संबंध रहे, जिनमें ज्ञानी जैल सिंह, केआर नारायणन, शंकर दयाल शर्मा, प्रणव मुखर्जी और एपीजे अब्दुल कलाम शामिल हैं। आतंकी हमले में बाल-बाल बचे
9 मार्च 1984 को मधुबन के पास उन पर आतंकी हमला हुआ था। उनकी गाड़ी पर करीब 80 गोलियां चलाई गईं, लेकिन वे इस हमले में बाल-बाल बच गए। गाड़ी चालक की मौत हो गई थी और गनमैन घायल हो गया था। यह घटना उस समय काफी चर्चा में रही थी।