लखनऊ में भाजपा नेता और यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने शुक्रवार देर रात विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा बिल गिरने को लेकर आयोग के पदाधिकारियों और समर्थकों के साथ बीच सड़क पर सपा और कांग्रेस का झंडा जलाया। नारेबाजी की। अपर्णा ने कहा- सुबह हम लोग जश्न मनाने वाले थे। लेकिन, आज की रात काली साबित हुई। ये लोग दुर्योधन और दुःशासन जैसे हैं। इसलिए इनका झंडा जल रहे हैं। यह विरोध हम लोग इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि नारी शक्ति अधिनियम का बिल पास नहीं हुआ। अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा। अखिलेश को बोलीं- उनका चेहरा दिखावटी बिल पास न होने दिया यह महिलाओं के लिए बेहद कलंकित करने वाला काम किया है। नारी शक्ति इन लोगों को कभी माफ नहीं करेगी। अखिलेश यादव ने यह कहा कि यह बिल दिखावटी है तो हम उन्हें जवाब देते हैं कि उन सभी लोगों का चेहरा ही दिखावटी है। 1991 से लेकर 2026 तक ये सारे विपक्षी यही काम करते आए हैं। कभी नहीं चाहते कि आम घर की बेटी और बहू निकलकर आए और सदन तक पहुंचे। वह सिर्फ अपने परिवार को प्रमोट करना चाहते हैं। विपक्ष का कुरूपी चेहरा उजागर हुआ अपर्णा ने कहा कि अगर यह बिल पास हो जाता तो सुबह जश्न होता। इसी से संबंधित कार्यक्रमों के लिए हम प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जा रहे थे। हमें पूरा विश्वास था कि पास होगा। प्रधानमंत्री को हम बार-बार धन्यवाद देते हैं कि विपक्ष के कुरूपी चेहरे को उजागर किया। नारी शक्ति अधिनियम को पास करवाने के लिए पीएम ने बहुत प्रयास किया था। लेकिन, आज जो कुछ हुआ है कलंकित कर देने वाली रात है। हमारे यहां जहां भारत माता की जय का नारा लगाया जाता है। नारी शक्ति इन्हें माफ नहीं करेंगी कुचल देगी। दो-तिहाई बहुमत से पास होना था बिल महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। —————————— संबंधित खबर भी पढ़िए- महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा : पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। (पूरी खबर पढ़िए)