आज शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के कुछ सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल मास्टर मिठू सिंह काहनेके के नेतृत्व में श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने जत्थेदार साहिब को एक मांग पत्र सौंपते हुए शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल को दोबारा तलब करने की मांग की। सुखबीर सिंह बादल के बयानों पर सख्त कार्रवाई की मांग प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि हाल ही में सुखबीर सिंह बादल द्वारा दिए गए बयानों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाल तख्त साहिब के आदेश को मानने के बाद उसे साजिश बताना सिख परंपराओं और मर्यादा के खिलाफ है। इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अकाल तख्त साहिब के आदेशों पर सवाल उठाने की हिम्मत न कर सके। सदस्यों ने मीडिया से बातचीत में सिख इतिहास के कई उदाहरणों का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि बड़ी-बड़ी हस्तियों ने भी अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होकर अपनी गलतियों को स्वीकार किया और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह परंपरा सिख पंथ की मर्यादा और अनुशासन को दर्शाती है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि सुखबीर सिंह बादल को “तनखैया” घोषित कर उचित दंड दिया जाए। उनका कहना था कि केवल सख्त कार्रवाई से ही पंथ की गरिमा और अनुशासन बनाए रखा जा सकता है।
एसजीपीसी अध्यक्ष की भूमिका पर भी उठे सवाल इसके साथ ही एसजीपीसी अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। सदस्यों ने आरोप लगाया कि 2 दिसंबर 2024 को जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित करना अध्यक्ष की जिम्मेदारी थी, लेकिन इसमें लापरवाही बरती गई। इसलिए अध्यक्ष को भी अकाल तख्त साहिब में तलब कर जवाबदेही तय करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह गलत उदाहरण बनेगा और भविष्य में अकाल तख्त साहिब के आदेशों की अनदेखी बढ़ सकती है।