रोहतास के सासाराम स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र से अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां बच्चों को पहले नई सरकारी ड्रेस पहनाकर फोटो खिंचवाई गई, फिर थोड़ी देर बाद कपड़े उतरवाकर न्यूड कर दिया गया। बच्चों की आपत्तिजनक स्थिति में तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमें कई छोटे बच्चे बिना कपड़ों के नजर आ रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बच्चों को सरकारी पोशाक पहनाकर कपड़े वापस ले लिए गए। मामला अनुमंडल अंतर्गत करगहर प्रखंड के सिरसिया गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का है। वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रोग्राम अधिकारी (DPO) की ओर से सफाई पेश की गई है। DPO का कहना है कि ये सारे बच्चे इस आंगनबाड़ी केंद्र के नहीं है। अब प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। देखें, मौके से आई PHOTOS… विभाग की ओर से मिली थी मुफ्त पोशाक ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्र पर विभाग की ओर से बच्चों के लिए मुफ्त पोशाक भेजी गई थी। बच्चों को नई ड्रेस पहनाकर उनकी तस्वीरें ली गईं। इसके बाद रजिस्टर में नाम दर्ज किए गए। आरोप है कि औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों से ड्रेस वापस उतरवा ली गई, जिसके बाद उनकी वीडियो बनाई गई और सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई। आगे पढ़ने से पहले पोल में हिस्सा लीजिए… ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल घटना के बाद ग्रामीणों ने केंद्र की सेविका और सहायिका सुनैना देवी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद शर्मनाक और अमानवीय है, जिससे पूरे गांव में आक्रोश का माहौल है। अन्य बच्चों के केंद्र पहुंचने पर दिक्कत वहीं, आंगनबाड़ी सेविका ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि विभागीय निर्देश के अनुसार केवल नामांकित बच्चों को ही पोशाक वितरित की जा रही थी। ड्रेस वितरण की जानकारी मिलने पर कुछ अन्य बच्चे भी केंद्र पर पहुंच गए थे। सेविका के मुताबिक, जब गैर-नामांकित बच्चों को पोशाक देने से मना किया गया, तो उनके परिजनों ने विरोध जताते हुए बच्चों के कपड़े खुद उतार दिए और हंगामा किया। आंगनबाड़ी सेविका ने खुद बच्चों को केंद्र पर भेजने के लिए कहा था पीड़िता पूजा देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी सेविका सुनैना देवी घर-घर जाकर बच्चों को केंद्र भेजने के लिए कह रही थीं। उन्होंने कहा था कि आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले बच्चों को पोशाक दी जाएगी। पूजा देवी के अनुसार, उनकी बच्ची भी केंद्र गई थी, जहां उसे पोशाक पहनाई गई। बाद में यह कहकर कपड़ा उतार लिया गया कि उसका नाम पोशाक वितरण सूची में नहीं है, जबकि बच्ची पहले से ही पोशाक पहन चुकी थी। बच्चे इस केंद्र के नहीं- आंगनबाड़ी सेविका आंगनबाड़ी सेविका सुनैना देवी ने कहा कि नग्न अवस्था में दिख रहे बच्चों का नाम आंगनबाड़ी केंद्र में दर्ज नहीं है। उनके अनुसार, ये गांव के ही बच्चे हैं, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र से उनका कोई संबंध नहीं है। सेविका का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने ही बच्चों के कपड़े उतरवाकर उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र के सामने खड़ा कर दिया और फिर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि मामले को जानबूझकर तूल दिया जा रहा है। DPO ने कहा- मामले की जांच की जा रही इस मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी विनीता कुमारी ने कहा कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वीडियो में दिख रहे सभी बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र के नामांकित लाभार्थी नहीं थे। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।