सरकार आपसे 16500 करोड़ वसूलने जा रही है। बालू की कीमत बढ़ने से घर बनाना महंगा हो गया है। जमीन का सर्किल रेट भी 3-4 गुना बढ़ने जा रहा है। अब सम्राट सरकार ने 8 साल पहले के नीतीश कुमार के फैसले को पलटते हुए स्टेट हाईवे पर भी टोल टैक्स वसूलना शुरू करने का फैसला किया है। यह सब मुफ्त बिजली, जीविका दीदियों को 2 लाख रुपए, 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को 1100 रुपए महीने पेंशन, जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च के लिए पैसे जुटाने को किया जा रहा है। मंडे स्पेशल में जानिए सम्राट सरकार ने टैक्स वसूली के लिए कौन से 3 बड़े पहल किए हैं? बिहार सरकार की सड़कों पर गाड़ी चलाने के लिए आपको कितना टोल देना होगा? पहल 1- 2018 में नीतीश ने खत्म किया था, सम्राट सरकार करेगी टोल वसूली पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने 1 अप्रैल 2018 को राज्य सरकार के सभी पुलों और स्टेट हाईवे से टोल टैक्स वसूली पूरी तरह हटा दी थी। उस समय 54 सड़कों और 116 पुलों पर टोल टैक्स लिया जाता था। अब राज्य में सरकार का चेहरा बदल गया है। नीतीश की जगह भाजपा के सम्राट चौधरी सीएम हैं। उनकी सरकार फिर से पुलों और सड़कों पर चलने के लिए टैक्स लेने जा रही है। लंबी दूरी के स्टेट हाईवे से लेकर कम दूरी के स्टेट हाईवे तक पर टोल वसूलने की तैयारी है। नई पॉलिसी ड्राफ्ट के मुताबिक, सिर्फ ग्रामीण सड़क टोल से बाहर होंगे। बिहार सड़क उपयोगकर्ता शुल्क 2026 पॉलिसी लाने की तैयारी सम्राट सरकार एसएच और महत्वपूर्ण पुलों के रख-रखाव के लिए लिए बिहार सड़क उपयोगकर्ता शुल्क 2016 पॉलिसी लेकर आ रही है। इसके तहत प्रमुख सड़कों पर टोल टैक्स वसूला जाएगा। इससे 500 करोड़ रुपए से अधिक आमदनी होने की उम्मीद है। पथ निर्माण विभाग के एजेंडा पर कैबिनेट की मुहर लगनी बाकी है। इसे आने वाले कैबिनेट मीटिंग में भेजकर पास कराया जाएगा। नई पॉलिसी की अधिसूचना के तीन महीने के अंदर एजेंसी का चयन कर टोल वसूली शुरू हो जाएगी। कितने रुपए तक टोल भरना होगा? पथ निर्माण विभाग के सूत्रों की मानें तो टोल राशि तय करने के लिए एनएचएआई के फार्मुला को अपनाया जाएगा। राज्य सरकार की सड़कों की लंबाई कम होने की वजह से यह राशि कम जरूर होगी। विभाग की मानें तो टोल की राशि 35 रुपए से लेकर 105 रुपए तक हो सकती है। कम दूरी तय करने पर कम और अधिक दूरी तय करने पर अधिक रुपए देने होंगे। टोल टैक्स लगाने का फार्मुला जानिए एनएचएआई द्वारा इन 5 बातों के आधार पर टोल टैक्स तय किया जाता है। 1- बेस प्राइस: इसे बुनियादी दर कहते हैं। साल 2007-08 को आधार वर्ष मानकर प्रति किलोमीटर एक बेस रेट फिक्स है। इसमें कहा गया है कि कार, जीप, वैन या हल्की गाड़ियों (LMV) को 0.65 रुपए/किमी की दर से टोल भरना होगा। लाइट कॉमर्शअल व्हिकल (LCV) जैसे मिनी बस के लिए यह राशि 1.05 रुपए/किमी है। बस या ट्रक (2 एक्सेल) गाड़ियों के लिए यह दर 2.20 रुपए/किमी है। मल्टी-एक्सेल और भारी वाहन का फिक्स रेट 3.45 से 4.20 रुपए/किमी है। 2. एक्सप्रेस वे पर अधिक टोल: सड़क के प्रकार के आधार पर टोल तय किया जाता है। एक्सप्रेस वे पर सामान्य 4-लेन सड़क की तुलना में सवा गुणा ज्यादा टोल लगता है। यदि टू लेन सड़क की क्वालिटी बेहतर की गई है तो वहां भी टोल राशि ली जाती है। 3. बायपास का टोल: किसी शहर में बायपास बना है, जिसकी लागत 10 करोड़ रुपए से अधिक हो तो वहां सामान्य से 1.5 गुना अधिक शुल्क चुकाना होता है। 4. पुल, फ्लाईओवर और टनल का टोल: यदि सड़क पर 60 मीटर से लंबा पुल, फ्लाई ओवर या टनल (सुरंग) बना हो तो उसके निर्माण की भारी लागत निकालने के लिए उसकी लंबाई को 10 से गुणा करके उतने किलोमीटर का टोल लिया जाता था। जैसे अगर कोई पुल 10 km लंबा है तो उसपर चलने के लिए 100 km लंबी सड़क जितना टोल टैक्स देना होगा। 5. राउंडिंग ऑफटोल: टोल तय करने के फाइनल पर राउंडिंग में राशि कम की जाती है। सारे गुणा-भाग के बाद जो भी फाइनल राशि आती है, उसके अनुसार निकटतम 5 के गुणक में राउंड ऑफ कर दिया जाता है। इसे इस तरह से समझ सकते हैं। यदि गणना 43 रुपए का दर आता है तो टोल 45 या 40 रुपए वसूला जाएगा। पहल 2- 4 गुना बढ़ेगा जमीन का सर्किल रेट, 11 हजार करोड़ रुपए होगी कमाई सरकार अपना खजाना भरने के लिए जमीन की सर्किल रेट को 3-4 गुना बढ़ाने की तैयारी कर रही है। 2013 के बाद से ग्रामीण क्षेत्र और 2016 के बाद से शहरी क्षेत्र में जमीन के सर्किल रेल में वृद्धि नहीं की गई है। इस बीच बाजार मूल्य कई गुना बढ़ गई है। इससे जमीन की खरीद बिक्री से सरकार को कम आमदनी हो रही है। वित्त वर्ष 2026-27 में बिहार सरकार ने जमीन-मकान की रजिस्ट्री से 11 हजार करोड़ रुपए राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 में निबंधन विभाग ने 8403.46 करोड़ रुपए की कमाई की थी। सरकार को उम्मीद है कि सर्किल रेट बढ़ाने से कमाई पिछले साल की तुलना में करीब 2.5 हजार करोड़ रुपए ज्यादा होगी। सर्किल रेट बढ़ाने से खरीदार की जेब पर कितना असर? अगर आप कोई जमीन खरीदते हैं तो इसकी रजिस्ट्री करानी पड़ती है। इसके लिए स्टांप ड्यूटी और कोर्ट फीस देना होता है। बिहार में शहरी इलाके के लिए स्टांप शुल्क 8% और कोर्ट फीस 2% है। यह रेट तब है, जब बेचने और खरीदने वाला पुरुष हो। इसे पटना के बोरिंग रोड की जमीन के उदाहरण से समझते हैं। अगर एक पुरुष बोरिंग रोड में एक कट्ठा जमीन खरीदता है। उसे 2 करोड़ रुपए/डिसमिल की दर (सरकार द्वारा अनुमानित बाजार मूल्य) से जमीन मिली तो एक कट्ठा के लिए 6.25 करोड़ रुपए लगेंगे। उसे 50 लाख रुपए स्टांप ड्यूटी और 12.50 लाख रुपए कोर्ट फीस देना होगा। इस तरह सरकार को स्टांप ड्यूटी+कोर्ट फीस से 62.50 लाख रुपए मिलेंगे। वर्तमान में मेन बोरिंग रोड के लिए सर्किल रेट 40 लाख रुपए/डिसमिल है। इस रेट से 1 कट्ठा जमीन खरीदने में 1.25 करोड़ रुपए लगेंगे। स्टांप ड्यूटी 10 लाख और रजिस्ट्रेशन फीस 2.5 लाख रुपए कोर्ट फीस लगेंगे। सरकार को स्टांप ड्यूटी+कोर्ट फीस से 12.50 लाख रुपए मिलेंगे। अगर सरकार ने बाजार मूल्य के अनुसार बोरिंग रोड के लिए सर्किल रेट 400% बढ़ाकर 1.60 करोड़ रुपए प्रति डिसमिल कर दिया तो उसे 1 कट्ठा जमीन की बिक्री से 50 लाख रुपए ज्यादा मिलेंगे। पहल 3- खनन दर बढ़ाया गया, 5000 करोड़ रुपए होगी कमाई राज्य सरकार ने बालू-पत्थर-मिट्टी खनन की कीमत बढ़ाई है। खान एवं भूतत्व विभाग की सालाना आमदनी 3,850 करोड़ रुपए है। विभाग के मुताबिक 2028 तक इसे 5000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस बड़े नए टारगेट को हासिल करने के लिए नीतिगत और प्रशासनिक स्तर पर कई पहल किए गए हैं। जो हैं.. 1. रॉयल्टी टारगेट: सरकार ने पत्थर खनन के लिए रॉयल्टी दर बढ़ाया है। पहले यह 60 रुपए प्रति 500 मीटर था। अब इसे बढ़ाकर 85 रुपए रुपए प्रति 500 घन मीटर किया गया है। 2. ई-नीलामी: बिचौलियों को दूर करने के लिए अब पत्थर और बालू के सभी नए माइनिंग ब्लॉकों का आवंटन केवल पारदर्शी ई-नीलामी (E-Auction) के जरिए किया जा रहा है। 3. बंद खदानों को खोलना: रोहतास जिले के प्रसिद्ध करवंदिया पहाड़ सहित करीब 25 वर्षों से बंद पड़ी पत्थर खदानों का पर्यावरण और वन विभाग से एनओसी लेकर तेजी से नए सिरे से आवंटन किया जा रहा है।