करनाल के घरौंडा में चल रही सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथा आयोजन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। कथा में करोड़ों रुपये की मांग और लेन-देन के कथित आरोपों पर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने मीडिया के सामने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। वहीं पूर्व आयोजन समिति के सदस्य सतीश कुमार ने इसके उलट कई गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान वीआईपी पास और पत्रकारों के साथ हुए व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े हुए। कथा के लिए कोई राशि तय नहीं: पंडित प्रदीप मिश्रा
वीरवार देर शाम पंडित प्रदीप मिश्रा करनाल के अग्रसेन भवन में मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि कथा के लिए 1.21 करोड़ या 71 लाख रुपये जैसी कोई भी राशि तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि कथा में जो टीमें आती हैं और जो इंतजाम किए जाते हैं, आयोजक समिति उन टीमों को अपनी क्षमता के अनुसार भुगतान करती है और वे लेकर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग बड़ी रकम की बात करते हैं, वे कम से कम कोई प्रमाण तो दें कि इतनी राशि दी गई है। मीडिया की भूमिका की सराहना, वीआईपी कल्चर पर भी बोले
मीडिया से बातचीत में उन्होंने घरौंडा मीडिया की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह की जागरूकता यहां दिखाई गई है, वैसी पूरे देश में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कथा में अमीर और गरीब सभी लोग आते हैं और सभी के लिए व्यवस्था समान होती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न तो पास खरीदे जाते हैं और न बेचे जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई धार्मिक स्थलों पर वीआईपी कल्चर देखने को मिलता है, लेकिन इसे खत्म करने के लिए पत्रकारों द्वारा चलाई जा रही मुहिम सराहनीय है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने समाज को जागरूक कर एकजुट करने का काम किया है और इसके लिए वे उनके आभारी हैं। एजेंसी और विवाद पर दिया जवाब
जब उनसे पूछा गया कि कथा किसी एजेंसी के माध्यम से हो रही थी और बाद में विवाद सामने आया, तो क्या इससे उनकी छवि पर असर पड़ा, इस पर उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल सही बात है। उन्होंने बताया कि कुछ लोग कथा बुक कराने के लिए आए थे, जिन्हें वे व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे।उन्होंने कहा कि जब भी कथा दी जाती है तो एक फॉर्म भरवाया जाता है, जिसमें स्पष्ट लिखा होता है कि वीआईपी पास नहीं बनाए जाएंगे, न बेचे जाएंगे और न ही चंदा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कथा करवाने वाले लोगों को यह भी बताया जाता है कि कर्ज लेकर या चंदा लेकर कथा नहीं करवानी चाहिए। दान और झोली को लेकर दी सफाई
पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि जहां कथा होती है, वहां विठ्ठलेश सेवा समिति का कार्यालय भी लगाया जाता है, ताकि जो लोग समिति से जुड़े हैं, वे वहां दान दे सकें। इसके अलावा कथा के दौरान एक झोली भी चलाई जाती है, जिसमें श्रद्धालु पत्र और बेलपत्र डालते हैं और कुछ लोग दान भी देते हैं। यह दान भी समिति के कार्यालय में जमा होता है। उन्होंने कहा कि लोग यह कहते हैं कि वे करोड़ों रुपये लेते हैं, लेकिन जो देने वाला है, वह सामने आकर बताए कि उसने कितनी राशि दी। उन्होंने कहा कि कथा में आने वाली टीमों, जैसे संगीतकार, पंडित, साउंड सिस्टम और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च आयोजकों द्वारा उठाया जाता है और अंत में उन्हें विदाई के रूप में भुगतान किया जाता है और जो दिया जाता है वह लेकर चले जाते है। व्यवस्थाओं को लेकर आयोजकों की जिम्मेदारी
उन्होंने बताया कि कथा के लिए आयोजकों को पहले से बताया जाता है कि करीब एक लाख श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में शौचालय, पानी, स्नानघर और भंडारे की व्यवस्था आयोजकों को करनी होती है। अगर भंडारे की व्यवस्था कमजोर पड़ती है तो समिति की ओर से सिहोर से अनाज भेजा जाता है और महाराष्ट्र से रसोइये बुलाकर भोजन बनवाया जाता है, ताकि कोई श्रद्धालु भूखा न रहे। माफी को लेकर नहीं हुई कोई बात
जब उनसे पूछा गया कि पहले वाली आयोजन समिति की ओर से कोई माफी मांगी गई है या नहीं, तो उन्होंने कहा कि न तो कोई माफी मांगी गई है और न ही इस बारे में कोई बातचीत हुई है। उन्होंने बताया कि कथा के दौरान पहले चार दिन वे व्यासपीठ पर रहते हैं और किसी से नहीं मिलते, जबकि पांचवें और छठे दिन ही लोगों से मुलाकात होती है। अब सुनिए पूर्व आयोजन समिति के सदस्य के खुलासे…
सतीश कुमार ने लगाए गंभीर आरोप
वहीं विवेकानंद सोशल चाइल्ड वेल्फेयर सोसाइटी के हेड सतीश कुमार ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने दावा किया कि कथा बुक करने के लिए पहले 1.25 करोड़ रुपये की मांग की जाती है, जो बाद में 71 लाख रुपये तक आ जाती है। उन्होंने कहा कि उनकी सोसाइटी के अकाउंट से श्री विठ्ठलेश समिति के खाते में अलग-अलग तारीखों में करीब 27 लाख रुपये जमा करवाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनसे कोई फॉर्म नहीं भरवाया गया और न ही कोई फॉर्म दिया गया। झोली में चिट्ठियां नहीं, लाखों का दान: सतीश
सतीश कुमार ने कहा कि झोली में डाली जाने वाली चिट्ठियां केवल एक दिखावा होती हैं, जबकि असल में उसमें लाखों रुपये का दान जमा होता है। उन्होंने कहा कि चिट्ठियों का नाम लेकर लोगों से पैसे एकत्रित किए जाते हैं। उन्होंने साउंड सिस्टम को लेकर भी दावा किया कि इसे पंडित प्रदीप मिश्रा की टीम ही लगाती है और आयोजकों की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। अगर आयोजक अपना साउंड सिस्टम लगाते हैं तो उसमें कमियां निकाल दी जाती हैं। वीआईपी पास और अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल
घरौंडा मंडी में कथा के दौरान वीआईपी पास को लेकर भी विवाद सामने आया। वीआईपी एंट्री के दौरान कई लोग पास लिए नजर आए, लेकिन उन्हें भी अंदर जाने में परेशानी हुई। बाउंसरों द्वारा श्रद्धालुओं को रोकने के कारण अव्यवस्था का माहौल बन गया। इसी दौरान एक पत्रकार ने अपने मोबाइल से वीडियो बनानी चाही, तो बाउंसरों ने उसे रोक दिया और मोबाइल छीनने का प्रयास किया। पत्रकार ने प्रेस कार्ड भी दिखाया, लेकिन बाउंसरों ने उसे अनदेखा करते हुए वीडियो बनाने से मना कर दिया। बाद में अन्य लोगों के हस्तक्षेप से पत्रकार को वहां से सुरक्षित निकाला गया। पत्रकारों की तारीफ और जमीनी हकीकत में फर्क
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सवाल यह उठ रहा है कि एक तरफ पंडित प्रदीप मिश्रा पत्रकारों की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मौके पर पत्रकारों को पंडाल में प्रवेश तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में कथा आयोजन, आर्थिक पारदर्शिता और व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब अब आने वाले समय में सामने आ सकता है।