साइकिल अपनी सेहत के लिए तो हर कोई चला लेता है, लेकिन कैंसर से पीड़ित बच्चों के लिए कोई ही सामने आता है। चंडीगढ़ साइक्लिंग ग्रुप – चंडीगढ़ रैंडोनियर्स क्लब के 35 साइक्लिस्ट्स ने 40 दिनों में अलग-अलग जगह साइक्लिंग करके 50,300 किमी पूरे किए। यह राइड साइकिल फॉर गोल्ड राइड कैन-किड्स एनजीओ की ओर से आयोजित की गई। यह राइड देश के अलग-अलग शहरों में हुई। वैसे तो चंडीगढ़ की टीम नौंवे नंबर पर रही और इंडिविजुअल कैटेगरी में चंडीगढ़ से देशभर में पहले नंबर पर रिपन कुमार आए, जिन्होंने 8094 किमी साइकिल चलाई तो दूसरे नंबर पर भी चंडीगढ़ की रजनी रही। रजनी ने 7716 किमी साइकिल चलाई। इस राइड के जरिए फंड रेज किया जाता है ताकि कैंसर से जूझ रहे बच्चों के इलाज में मदद हो सके। सभी ने एक महीने तक अकेले साइकिल चलाई और बाद में सभी एक-साथ चंडीगढ़ से सिसवां में साइक्लिंग के जरिए कैंसर पेशेंट किड्स के पास गए। मेल कैटेगरी में पहले नंबर पर आए रिपन कुमार ने बताया – मैंने 40 दिन साइकिल चलाई। किसी दिन दो सौ किमी तो कभी इससे ज्यादा साइक्लिंग भी की। काम के दौरान समय निकालना आसान नहीं था, लेकिन बच्चों के इलाज में योगदान देने के लिए अपने आप हिम्मत आ जाती है। हम साइक्लिंग के जरिए एक साथ कुदरत को सहेजने और बच्चों के इलाज में मदद कर पा रहे हैं, यह हमारी खुशकिस्मती है। पापा ने मोटिवेट किया इसके लिए 16 साल की रिजुल कलसी ने इस पहल के लिए 100 किमी साइकिल चलाई। उन्होंने बताया- मेरे पिता डॉ. रमन कलसी दिन में कई किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। उन्होंने ही मुझे कहा कि मैं भी बच्चों की मदद करूं, प्रकृति के लिए पैडल करूं आैर समाज के प्रति अपने कर्तव्य को समझूं। मैंने इसी साल साइकलिंग शुरू की है। इसके लिए 1 किमी पर 50 रुपए दिए गए।