गुरुग्राम नगर निगम की सोमवार को आयोजित सदन बैठक हंगामेदार रही। बैठक के दौरान पार्षदों और अधिकारियों के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सबसे पहले फोन नहीं उठाने को लेकर निगमायुक्त प्रदीप दहिया पर पार्षद भड़क गए। पार्षद नारायण भड़ाना बोले- “काल और वाट्एप का जवाब तक नहीं मिलता।” इस पर निगमायुक्त ने जवाब देते हुए कहा- “कंपैरिजन मत करिए, अधिकारी भी जवाब देना जानते हैं।” लंच के बाद सदन में फिर माहौल गरमा गया। मेयर राजरानी मल्होत्रा ने दलीप साहनी को टोका, जिस पर बहस बढ़ गई। निगमायुक्त प्रदीप दहिया बोले- “ऐसा हाउस मैंने नहीं देखा, नेता बनकर सुर्खियां बटोर लोगे।” अनूप पार्षद और दलीप साहनी के बीच भी तीखी बहस हुई। पानी की मोटर बंद-चालू करने की समस्या को लेकर भी सदन में बवाल हुआ। पार्षदों ने अधिकारियों को घेरते हुए शहर की पानी सप्लाई व्यवस्था पर सवाल उठाए। व्यापार सदन का लेकर निगम का बड़ा फैसला नगर निगम का बड़ा फैसला व्यापार सदन (सेक्टर-15) को लेकर है। निगम यहां स्थित अपनी खाली पड़ी जमीन का ऑक्शन करने जा रहा है। इसमें कमर्शियल टावर, एससीओ (SCO-Shops cum Offices) और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए प्लॉट शामिल हैं। इस नीलामी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि गुरुग्राम में कमर्शियल स्पेस की मांग लगातार बढ़ रही है। इस ऑक्शन के माध्यम से नगर निगम का लक्ष्य एकमुश्त बड़ा फंड जुटाना है। बिल्डरों की राह होगी आसान नगर निगम के अगले एजेंडे के अनुसार, सेक्टर 111, 113, और 114 जैसे उभरते हुए इलाकों में कई ऐसे पुराने राजस्व रास्ते हैं, जो अब केवल कागजों पर मौजूद हैं या जिनका भौतिक अस्तित्व समाप्त हो चुका है। ये रास्ते कई बड़े बिल्डर प्रोजेक्ट्स के बीच में आ रहे हैं, जिससे निर्माण कार्य बाधित होता है। निगम ने अब मंगलाम मल्टीप्लेक्स, नवज्योति डेवलपर्स और उत्तम बिल्डमार्ट, M3M जैसे कई निजी डेवलपर्स के प्रस्तावों को शामिल किया है। ये बिल्डर इन राजस्व रास्तों की जमीन को सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदने की मांग कर रहे हैं। यदि सदन इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो इन रास्तों का मालिकाना हक बिल्डरों को मिल जाएगा। शहर की प्लानिंग में सुधार का दावा निगम का मानना है कि रेवेन्यू रास्तों को बिल्डरों को बेचने से शहर की प्लानिंग में सुधार होगा। अक्सर इन रास्तों की वजह से बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का लेआउट ठीक से नहीं बन पाता था। अब इन रास्तों के एडजस्टमेंट से बिल्डर्स बेहतर और संगठित कॉलोनियां विकसित कर सकेंगे। हालांकि, विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों का तर्क है कि सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में देने से पहले जनता के हितों और भविष्य की कनेक्टिविटी का ध्यान रखा जाना चाहिए।