चंडीगढ़ नगर निगम के 116.84 करोड़ रुपए की फर्जी एफडी घोटाले में जेल में बंद स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की पूर्व CFO नलिनी मलिक का बुडैल जेल में विवाद हो गया। जेल के अंदर उसकी बैरक में बंद ड्रग पैडलर बाला से कहासुनी हो गई, जो बाद में हाथापाई तक पहुंच गई। उस समय बैरक में अन्य महिला कैदी भी मौजूद थीं। उन्होंने दोनों को छुड़ाने की कोशिश की और तुरंत पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही पुलिस बैरक में पहुंची और नलिनी, बाला समेत अन्य महिला कैदियों को अलग-अलग किया। इसके बाद पुलिस नलिनी को बैरक से बाहर ले गई। जेल में मौजूद अन्य महिला कैदियों ने पुलिस को बताया कि विवाद की शुरुआत नलिनी ने की थी। उनका कहना था कि वह आते ही बहस करने लगी। उसे काफी समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वह नहीं मानी, जिसके बाद झगड़ा बढ़ गया। यह पूरी घटना करीब एक सप्ताह पहले हुई, जो अब सामने आई है। उसे सेक्टर-48 स्थित साइकेट्री विभाग में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, नलिनी जब से बुडैल जेल में गई, वह सोती नहीं थी और गुस्से में बात करती थी।..पढें पूरी रिपोर्ट अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला… IDFC फर्स्ट बैंक का ₹590 करोड़ घोटाला हरियाणा में IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला फरवरी 2026 में सामने आया था। यह पूरा मामला बैंक की चंडीगढ़ शाखा और हरियाणा सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े खातों में फंड की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। जांच आगे बढ़ने पर नगर निगम, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, शेल कंपनियों और कई अधिकारियों के नाम सामने आए। घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में अपना खाता बंद कर फंड दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन दिया। बैंक रिकॉर्ड और सरकारी फाइलों में मौजूद बैलेंस का मिलान किया गया तो दोनों में अंतर पाया गया। इसी दौरान अनियमितताओं की आशंका गहराई। मामला सामने आने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन की फाइनेंस सेक्रेटरी दीप्रवा लाकड़ा ने आदेश जारी किए कि जिन विभागों के इस बैंक में खाते हैं, वे अपना पैसा निकाल लें। नगर निगम की FD पर उठा शक इसके बाद नगर निगम ने स्मार्ट सिटी की 116.84 करोड़ रुपए की एफडी प्री-मैच्योर तोड़ने का फैसला लिया। यह एफडी मार्च में मैच्योर होनी थी। लेकिन बैंक की तरफ से कहा गया कि निगम की ऐसी कोई एफडी मौजूद ही नहीं है। मामला गंभीर होने पर बैंक ने 121 करोड़ रुपए ब्याज सहित नगर निगम को लौटा दिए। इसके बाद निगम ने अपने आउटसोर्स कर्मचारी अनुभव मिश्रा के खिलाफ धोखाधड़ी की FIR दर्ज करवाई, क्योंकि दस्तावेजों की वेरिफिकेशन उसी ने की थी। जांच में क्या सामने आया जांच में पता चला कि 116.84 करोड़ रुपए की एफडी फर्जी थी। यह भी सामने आया कि बैंक में जमा रकम बिना अनुमति चार शेल कंपनियों में ट्रांसफर की जाती रही। इन ट्रांजेक्शन का ओटीपी अनुभव मिश्रा के पास आता था। नगर निगम का दावा है कि अभी भी कुछ रकम और ब्याज बकाया है, क्योंकि लंबे समय तक पैसा खाते में नहीं रहा। नलिनी मलिक तक कैसे पहुंची जांच नलिनी मलिक चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड में चीफ फाइनेंस अफसर थी। अकाउंट से जुड़े अधिकांश काम उसके पास थे। जांच में सामने आया कि ‘सनलाइव सोलर सिस्टम’ नाम की एक शेल कंपनी के खाते से नलिनी के खाते में दो लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। यह भी पता चला कि चंडीगढ़ क्रेस्ट का फंड बिना अनुमति इसी कंपनी में ट्रांसफर किया गया था। पुलिस के मुताबिक, नलिनी मलिक ने आईडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि के जरिए करीब 50 करोड़ रुपए कैश लिए। पूछताछ में नलिनी ने दावा किया कि यह रकम कंसल्टेंट फीस थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि सरकारी कंपनी में रहते हुए वह किसी अन्य कंपनी को कंसल्टेंसी सेवाएं नहीं दे सकती थीं। 25 दिन बचती रही, फिर गिरफ्तारी हुई केस दर्ज होने के बाद नलिनी करीब 25 दिन तक पुलिस से बचती रही। 2 अप्रैल को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में पुलिस उसे इलाज के लिए सेक्टर-32 अस्पताल लेकर गई। डॉक्टरों की सलाह पर उसे सेक्टर-48 स्थित साइकेट्री विभाग में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, नलिनी जब से बुडैल जेल में गई, वह सोती नहीं थी। डॉक्टरों ने भी उससे कहा था कि अगर वह सो जाए तो उसकी तबीयत ठीक रहेगी, लेकिन वह कहती थी कि उसे नींद नहीं आती, जिसकी वजह से वह अन्य महिला कैदियों के साथ गुस्से में बात करती थी। पुलिस छापेमारी में क्या मिला पुलिस ने नलिनी की बहन के घर से उसकी कार, लैपटॉप, पेन ड्राइव, सीरियल नंबर वाला पैड और अन्य दस्तावेज जब्त किए। वहीं, घोटाले के दूसरे मामले में पुलिस प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह को साथ लेकर नोएडा पहुंची। वहां दीपक नाम के व्यक्ति के घर सर्च वारंट के तहत जांच की गई। सुखविंदर सिंह और शेल कंपनियों का कनेक्शन जांच में सामने आया कि शेल कंपनियों से भेजी गई रकम में से दो करोड़ रुपए से ज्यादा दीपक के खाते में ट्रांसफर हुए। पुलिस के मुताबिक यह ट्रांजेक्शन सुखविंदर सिंह के कहने पर किए गए। आईडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि ने पूछताछ में बताया कि सुखविंदर सिंह ने करीब 2.5 करोड़ रुपए अपने खाते, अपनी मां सुरिंदर कौर और दोस्त दीपक के खातों में ट्रांसफर करवाए। इसके अलावा ‘कैपको फिनटैक’ और ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ नाम की कंपनियों के जरिए भी करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ। आरोप है कि कुछ पैसा नकद लिया गया और बाद में एचडीएफसी बैंक में जमा कराया गया। जांच में शेल कंपनियों से जुड़े कर्मचारियों मनीष, भूपिंदर सिंह और अमरजीत पाल सिंह ने माना कि उन्होंने सुखविंदर को नकद रकम दी थी। IFS अधिकारी तक पहुंचे तार पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दीपक के संबंध एक IFS अधिकारी के रिश्तेदार से जुड़े हैं। सूत्रों के मुताबिक पुलिस को कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग और चैट्स मिली हैं, जिनमें संबंधित IFS अधिकारी द्वारा सुखविंदर को गिरफ्तारी से पहले भागने और अग्रिम जमानत लेने की सलाह देने की बात कही गई है। ऑडिट मैनेज करने के लिए सोलर पैनल लगाने का आरोप पूर्व बैंक मैनेजर रिभव ऋषि ने पूछताछ में बताया कि हर तीन महीने में बैंक की ऑडिट होती थी। ऑडिटर नरेश सुखीजा और दीपक कुमार को खुश रखने के लिए उनके घरों पर सोलर पैनल लगवाए गए। इसके लिए ऋषि ने अपने सेविंग अकाउंट से रकम ट्रांसफर कर क्रेस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर अबरोल के खाते में भेजी थी। पुलिस ने हाल ही में सुखविंदर अबरोल को गिरफ्तार कर पांच दिन के रिमांड पर लिया है। *********** ये खबर भी पढ़ें: चंडीगढ़ निगम में 116 करोड़ का IDFC बैंक घोटाला: मेयर-एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी, स्मार्ट सिटी फंड की 11 एफडी फर्जी, कमिश्नर बोले-ब्याज समेत मिले पैसे चंडीगढ़ नगर निगम में स्मार्ट सिटी फंड से जुड़े लगभग 116.84 करोड़ रुपए के घोटाले का मामले में मेयर सौरभ जोशी एक्शन में आ गए है। उन्होने कमिश्नर अमित कुमार से पूरी मामले की जल्द एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। आरोप है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के खाते से निकाली गई 116.84 करोड़ रुपये की राशि को 11 फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में दिखाया गया, लेकिन बाद में जांच में ये सभी एफडी फर्जी पाई गईं। (पढ़ें पूरी खबर)