जज को ब्लैकमेल करने के आरोपी एडवोकेट को बेल:50 हजार का बांड भरकर देने होंगे वॉयस सैंपल; जांच में शामिल होने के निर्देश

चंडीगढ़ में चोरी, आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने और 1.5 करोड़ रुपये की मांग से जुड़े दो महीने पुराने मामले में आरोपी एडवोकेट को बड़ी राहत मिली है। आरोपी वकील ने अदालत में दलील दी कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। वह रोहतक जिला अदालत में प्रैक्टिस करता है और उसका इस केस से कोई सीधा संबंध नहीं है। सभी पक्षों और दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को 50,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। साथ ही उसे जांच में सहयोग करने और वॉयस सैंपल देने के निर्देश भी दिए गए हैं। 18 फरवरी को दर्ज हुआ था केस यह मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार की शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार, 18 फरवरी को उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आई। इसके बाद व्हाट्सएप पर मैसेज भेजे गए, जिनमें उनकी मार्फ्ड और आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाई गईं। फिर दूसरे नंबर से कॉल कर 1.5 करोड़ रुपये की मांग की गई और पैसे न देने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई। पैसे की वसूली साबित नहीं कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि कोई रकम वसूली गई थी, इसलिए एक्सटॉर्शन (रंगदारी) का पूरा मामला नहीं बनता। इसी आधार पर जमानत दी गई। कोर्ट ने यह भी माना कि डराने-धमकाने का मामला अलग अपराध हो सकता है, लेकिन फिलहाल आरोपी को हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है। चालान पेश, जेल में रखने की जरूरत नहीं कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “आवेदक 11.04.2025 से हिरासत में है और चालान पेश हो चुका है, मुकदमा चलने में समय लगेगा। आरोपी से कुछ भी बरामद नहीं होना है। ऐसे में उसे आगे जेल में रखना उचित नहीं है।” इसी आधार पर अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए आरोपी को 50,000 रुपये के मुचलके और एक जमानती के साथ रिहा करने का आदेश दिया।

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