जलमग्न रहने वाला ताल खजूरी बना अंडा हब:रोज 50,000 का है उत्पादन, फार्म में पाली गई बीएच-300 नस्ल की मुर्गियां एक साल 300 अंडे देती हैं

दो दशक पूर्व बिहार पड़ोसी राज्यों से अंडे आयात करने वाला राज्य था। आज सरकार की बेहतर तकनीक, प्रोत्साहन और सुरक्षा नीतियों के दम पर यह अंडा उत्पादन में सबसे तेज वृद्धि दर वाले टॉप-10 राज्यों में शुमार हो गया है। आत्मनिर्भरता की इस यात्रा का जीता-जागता उदाहरण है मुजफ्फरपुर जिले के पश्चिमी क्षेत्र का ताल खजूरी। कभी सालों भर जलमग्न रहने वाला यह इलाका अब “अंडा हब’ बन चुका है। सरैया प्रखंड के बखड़ा गांव के निवासी मो. जहांगीर की मेहनत रंग लाई है। वे कभी आंध्र प्रदेश से अंडे आयात करते थे, लेकिन आज अपने सहयोगियों के साथ ताल खजूरी में प्रतिदिन 50,000 अंडे उत्पादन करने वाला आधुनिक फार्म हाउस चला रहे हैं। वर्ष 1915 में मात्र 10,000 अंडे उत्पादन के साथ शुरू हुआ ‘ बिहार मुर्गा फार्म’ आज जिले का अग्रणी फार्म हाउस बन चुका है। यहां से उत्पादित अंडे मुजफ्फरपुर, सुपौल, कूच बिहार और वर्धमान की मंडियों तक पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय किसानों को नई आय का स्रोत मिला है। फार्म में बेंकिस(बीएच-300) लेयर नस्ल की उन्नत
मुर्गियां पाली जाती हैं, जो कम खर्च में बेहतर रखरखाव और संतुलित पर्यावरण में एक साल में लगभग 300 अंडे देती हैं। इनका जीवनकाल 18-20 माह होता है, जो उत्पादकता को बढ़ाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में युवाओं के पास रोजगार के भी अवसर उपलब्ध हैं। पहले आयात पर निर्भर था, अब उत्पादन में टॉप-10 पर
यहां प्रशिक्षित लोग खुद के फार्म चला रहे : डॉ. मंडल
सरकार की पोल्ट्री मिशन और सब्सिडी योजनाओं ने इस प्रगति को गति दी है। राज्य में अंडा उत्पादन अब 20% सालाना बढ़ रहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। वहीं मुर्गी के बीट जैविक उर्वरक बनाने, बेहतर फसल उगाने और तालाबों में मछलियों के तेजी से विकास में काफी उपयोगी साबित हो रहा है। आमतौर पर गांवों में मुर्गी फार्म से दुर्गंध और मक्खियों की समस्या होती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं। फार्म में मुर्गियों को संतुलित आहार देने के लिए मिनी फीड मिल भी स्थापित है। यहां प्रशिक्षित लोग खुद के फार्म चला रहे : डॉ. मंडल
बिहार मुर्गा फार्म के मुर्गी विशेषज्ञ डॉ. रामभरोस मंडल ने बताया कि 1915 में स्थापित यह फार्म सूबे को अंडा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू हुआ था। आज यहां से प्रशिक्षित लोग खुद के फार्म चला रहे हैं और बेहतर परिणाम हासिल कर रहे हैं। फार्म में 20-25 मजदूर रोजगार पा चुके हैं। स्वचालित आधुनिक तकनीक से लैस यह केंद्र आसपास
नए फार्म खुलने की प्रेरणा बन रहा है।

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