जालंधर में आज 1984 के दंगा पीड़ितों ने पंजाब की भगवंत मान सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पीड़ितों का आरोप है कि पंजाब सरकार ने पुनर्वास के वादे करके अधिसूचना जारी होते ही उन्हें रद्द कर दिया, जो उनके साथ एक बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर पुनर्वास के फैसलों को लागू नहीं किया गया, तो पांच दंगा पीड़ित विधवाएं चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर आमरण अनशन पर बैठेंगी। दंगा पीड़ितों के नेताओं ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को आए लगभग साढ़े चार साल हो चुके हैं। लेकिन, इतने लंबे समय के बाद भी 1984 के नरसंहार के पीड़ित परिवारों के पुनर्वास को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
पिछली सरकार के फैसलों को लागू करने की मांग पीड़ितों ने बताया कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशानुसार, पिछली सरकार ने पंजाब में रह रहे लगभग 25 हजार दंगा पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए थे। वर्तमान भगवंत मान सरकार से संस्था ने कई बार इन फैसलों को लागू करने की अपील की और विरोध प्रदर्शन भी किए। छह बार बैठकें देकर की गईं रद्द नेताओं का आरोप है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनके संगठन को मुलाकात के लिए छह बार का समय दिया। लेकिन हर बार, बाद में उन बैठकों को बिना किसी ठोस कारण के रद्द कर दिया गया। केंद्र की मोदी सरकार पर भी साधा निशाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार को भी घेरा गया। पीड़ितों ने कहा कि पीएम मोदी ने केंद्र में भाजपा सरकार बनते ही 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए SIT बनाने की बात कही थी। लेकिन सच्चाई यह है कि सिर्फ सज्जन कुमार के खिलाफ कार्रवाई हुई, जबकि बाकी के मुख्य आरोपियों के खिलाफ कोई सख्त एक्शन नहीं लिया गया। 15 सितंबर 2025 की बैठक पीड़ितों ने बताया कि पंजाब सरकार के साथ उनकी आखिरी बैठक 15 सितंबर 2025 को वित्त मंत्री के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में हुई थी। इस बैठक में पुनर्वास से जुड़े सभी फैसलों को लागू करने पर सहमति बनी थी। इन प्रमुख मांगों पर बनी थी सहमति पंजाब में रहने वाले सभी दंगा पीड़ित परिवारों को घर आवंटित करना। पंजाब के प्रत्येक जिले में पीड़ितों को व्यापार के लिए बूथ बनाकर देना। शिक्षित पीड़ित परिवारों के बच्चों को रोजगार देना। लुधियाना में कांग्रेस सरकार के समय रद्द किए गए 150 रेड कार्डों को बहाल करना। अधिसूचना जारी होते ही फैसले रद्द पीड़ितों का कहना है कि विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े इन सभी महत्वपूर्ण फैसलों को लागू करने के बजाय, पंजाब सरकार ने जैसे ही इसकी अधिसूचना जारी की, वैसे ही सभी फैसलों को रद्द कर दिया। दंगा पीड़ितों ने इसे सरकार द्वारा किया गया एक बड़ा विश्वासघात और क्रूर मजाक बताया है। 15 दिनों का अल्टीमेटम और आमरण अनशन की चेतावनी पंजाब में रह रहे करीब 25,000 दंगा पीड़ित परिवारों में इस फैसले को लेकर भारी रोष है। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से मांग की है कि अगले 15 दिनों के भीतर कमेटी की बैठक बुलाकर इन फैसलों को तुरंत लागू किया जाए। यदि सरकार ने 15 दिनों में उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो 1984 के दंगा पीड़ितों की पांच विधवाएं चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर आमरण अनशन पर बैठ जाएंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी।