जालंधर के प्रवर्तन निदेशालय में एक साथ 13 अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। पंजाब के बड़े राजनेताओं पर हालिया कार्रवाई के बीच हुए इस बड़े बदलाव ने विभाग के कामकाज को प्रभावित किया है। फिलहाल महत्वपूर्ण मामलों की निगरानी दिल्ली मुख्यालय से की जा रही है। स्थिति सामान्य होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। जालंधर ईडी कार्यालय में हाल ही में प्रशासनिक बदलाव देखा गया है। सामान्य तौर पर वार्षिक तबादलों के दौरान एक स्टेशन से केवल दो या तीन अधिकारियों का ही स्थानांतरण होता है। इस बार, विभिन्न रैंक के 13 अधिकारियों को एक साथ जालंधर से बाहर भेज दिया गया है। अधूरे कार्यकाल में ही रवानगी हैरानी की बात यह है कि इन 13 अधिकारियों में से कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने मात्र एक साल पहले ही जालंधर में अपना कार्यभार संभाला था। इतने बड़े पैमाने पर और समय से पहले हुए इन तबादलों ने विभाग के भीतर और बाहर कई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। वरिष्ठ पदों पर अतिरिक्त प्रभार का सहारा जालंधर जोन के सबसे वरिष्ठ अधिकारी, जॉइंट डायरेक्टर रवि तेवारी का तबादला चेन्नई कर दिया गया है। उनके जाने के बाद, उनके उत्तराधिकारी दिनेश पुरुचुरी फिलहाल दिल्ली से ही इस जोन का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की कमी से प्रशासनिक स्थिरता पर असर पड़ा है। देशभर के अलग-अलग शहरों में भेजी गई टीम मार्च के अंत तक कुल 12 अन्य स्टाफ सदस्यों को भी रिलीव कर दिया गया। इनमें कई असिस्टेंट डायरेक्टर शामिल हैं, जिन्हें बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और जम्मू जैसे शहरों में भेजा गया है। साथ ही, कम से कम पांच प्रवर्तन अधिकारियों (EO) का भी स्थानांतरण किया गया है। जांच की रफ्तार पर ब्रेक अधिकारियों का मानना है कि इस बड़े फेरबदल के कारण वर्तमान में चल रही जांच की गति धीमी हुई है। हालांकि, चंडीगढ़, जम्मू और बेंगलुरु से नए अधिकारियों की जॉइनिंग होनी है, लेकिन नई टीम को पूरी तरह सेटल होने और केस फाइलों को समझने में 20 से 30 दिन का समय लग सकता है।