झज्जर में हिसार से पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा झज्जर में राजनीतिक संदेश के साथ-साथ कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को भी उजागर कर गई। सुबह ग्वालिशन गांव से शुरू हुई यात्रा में जहां कुछ पुराने कांग्रेसी नेता नजर आए, वहीं हुड्डा गुट ने इससे दूरी बनाए रखी। यात्रा की शुरुआत सुबह ग्वालिशन गांव से हुई और शहर में प्रवेश करते हुए शहीद भगत सिंह चौक, छिक्कारा चौक होते हुए अंबेडकर चौक पहुंची। यहां बृजेंद्र सिंह ने महापुरुषों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इसके बाद उन्होंने झज्जर बार में वकीलों से मुलाकात की। पुराने कांग्रेसी आए नजर यात्रा के दौरान झज्जर हल्के की विधायक, जिला अध्यक्ष और कई पदाधिकारी कार्यक्रम से दूरी बनाते नजर आए। स्थानीय स्तर पर नेताओं की कम मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि, कुछ वरिष्ठ और पुराने कांग्रेसी नेता यात्रा में शामिल हुए। इनमें उदयभान पुनिया, सुदेश कौशिक, ओम प्रकाश धनखड़, बाला धनखड़ सहित कुछ अन्य चेहरे नजर आए। वहीं टीम दीपेंद्र से जुड़े कुछ युवा कार्यकर्ता भी यात्रा में दिखे, जिनमें पूर्व पार्षद भूपेश गहलोत, रामानंद दलाल, चिराग लोहचब और बल्लू सहित गिने-चुने लोग शामिल रहे। कांग्रेस से जुड़े, इसलिए आए- कौशिक कांग्रेस के समर्थक सुदेश कौशिक ने कहा कि हम कांग्रेस से जुड़े हैं, इसलिए यहां आए हैं। जो खुद को कांग्रेस नहीं मानते, वे पदाधिकारी नहीं आए। वहीं पूर्व पार्षद भूपेश गहलोत ने कहा प्रदेश कांग्रेस में कार्यकर्ता एक हो सकते हैं, लेकिन नेता नहीं। इन बयानों ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को खुलकर सामने ला दिया। सद्भाव यात्रा का उद्देश्य जहां एकता और जनसंपर्क बताया गया, वहीं झज्जर में यह कार्यक्रम कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी को लेकर ज्यादा चर्चा में रहा।