साध्वियों के यौन उत्पीड़न और एक पत्रकार की हत्या से संबंधित मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम इन्सां को एक बार फिर पैरोल मिल गई है। राम रहीम के 30 दिनों के लिए पैराल पर जेल से बाहर आ गया है। इससे पहले डेरा प्रमुख 15 बार पैरोल एवं फरलो पर आ चुका है। यह 16वीं पैरोल है। इस साल में उसकी यह दूसरी पैरोल है। इससे पहले जनवरी माह में पैरोल मिली थी। आज मंगलवार सुबह 6.30 बजे राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा हुआ। सुबह करीब 8.45 से सवा 9 बजे तक वह काफिले के साथ सिरसा डेरा पहुंचेगा। सुबह सुनारिया जेल के बाहर जेल प्रशासन की ओर से पुलिसबल तैनात रहा। सिरसा में भी पुलिस प्रशासन अलर्ट है। इसे लेकर सिरसा डेरे में तैयारियां शुरू हो गई है और साध-संगत व डेरा प्रेमी तैयारी में जुटे हैं। हालांकि, डेरा कमेटी से इस बारे में बात की गई तो अभी जानकारी न होने की बात कही गई। 5 जनवरी को मिली थी 40 दिन की पैरोल जानकारी के अनुसार, साध्वी यौन शोषण मामले में राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई गई थी, जो अभी सुनारिया जेल में काट रहा है। बीती 5 जनवरी को 40 दिन की पैराल पर जेल से बाहर आया था। उस वक्त शाह सतनाम दिवस था। वह सिरसा में डेरा के हेडक्वार्टर में रहा था। पहले भी, जब वह जेल से बाहर था, तो वह उत्तर प्रदेश के बागपत में डेरा के आश्रम में रहा था। इससे पहले सिरसा पहुंचने के तुरंत बाद, उन्होंने अपने फॉलोअर्स को एक वीडियो मैसेज जारी किया जिसमें उनसे डेरा अधिकारियों द्वारा जारी किए जाने वाले निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया। साल 2017 से जेल में बंद दरअसल, दोषी राम रहीम 25 अगस्त, 2017 से जेल में हैं, जब उन्हें साध्वियों के यौन उत्पीड़न से संबंधित दो मामलों में 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। 17 जनवरी 2019 को उन्हें पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अक्टूबर 2021 में, सीबीआई कोर्ट ने डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, तीन साल बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। क्या होती हैं पैरोल-फरलो, जिन पर राम रहीम बाहर आता है… पैरोल: अगर कैदी ने अपनी सजा का एक हिस्सा पूरा कर लिया है, तो उसे पैरोल मिल सकती है। स्पेशल कंडीशंस में ही कैदियों को पैरोल मिलती है, जैसे- परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए या बीमारी हो, किसी करीबी की शादी हो, या अन्य जरूरी वजह हों। पैरोल 2 तरह की होती है- रेगुलर और कस्टडी। रेगुलर पैरोल में कैदी आजाद रह सकता है, लेकिन कस्टडी पैरोल में कैदी के साथ पुलिस होती है। फरलो के बारे में भी जानिए: फरलो के लिए कैदी को किसी तरह की स्पेशल कंडीशन की जरूरत नहीं होती है। यह उसका कानूनी अधिकार है। हर राज्य ने फरलो के लिए अपने रूल्स और गाइडलाइंस बनाई हैं। कई राज्यों के रूल्स और गाइडलाइंस कमोबेश एक जैसे ही हैं, केवल फरलो पाने की प्रोसेस अलग-अलग है।