चंडीगढ़ | अनुसूचित जाति (एससी) विद्यार्थियों की पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना में सामने आए करोड़ों रुपए के कथित घोटाले पर पंजाब सरकार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आड़े हाथों लिया। चीफ जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि इतने गंभीर वित्तीय आरोपों के बावजूद करीब छह साल तक सिर्फ जांच चलती रही, एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामला 2020 से लंबित जनहित याचिका से जुड़ा है। लगातार न्यायिक सख्ती के बाद पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 15 अप्रैल 2026 को दो अलग अलग एफआईआर दर्ज की, लेकिन कोर्ट ने इस देरी को गंभीर प्रशासनिक विफलता माना।