पंजाब- 25 साल बाद घर लौटा व्यक्ति:पत्नी ने उसे मरा समझ देवर से शादी कर ली, 2 बच्चे भी हो गए; कपूर..शब्द से परिवार मिला

कपूरथला से लापता हुआ हंसा सिंह 25 साल बाद मिला। उसके मिलने की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। गुमनामी के अंधेरों में भटकते हुए हंसा सिंह उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पहुंचा, जहां एक पुलिस वाले के सवाल और उनके मुंह से निकले एक शब्द ने उसकी किस्मत बदल दी। ‘कपूर…’, यही वह शब्द था जिसने सालों से बिछड़े हंसा को उसके घर का रास्ता दिखाया। पुलिस ने फिर कहा कपूरथला से। इस पर हंसा ने सहमति में सिर हिलाया। कपूरथला पुलिस से संपर्क किया गया, पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए और आखिरकार हंसा सिंह की पहचान हो गई। समाजसेवी सुरेंद्र सिंह फलौदिया की मदद से 13 अप्रैल को हंसा सिंह अपने गांव शिव दयालवाला पहुंचा, लेकिन 25 सालों के अंदर उसके घर के रिश्ते और हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। घर आकर पता चला कि पत्नी ने छोटे भाई से शादी कर ली है और उसके 2 बच्चे भी हो गए हैं। गांव के सरपंच ने बताया कि हंसा सिंह ने सबसे पहले अपने भाई को पहचाना और उसे देख जोर-जोर से रोने लगा।
भाई जरनैल बोला- पत्नी ने अभी अपनाने से इनकार कर दिया है। अब एक के साथ ही रहना पड़ेगा। अभी तो मैं ही इसकी देखरेख करुंगा। अब पढ़िए हंसा के गायब होने और मिलने की कहानी… समाजसेवी ने वीडियो पोस्ट किया था
हंसा सिंह के मिलने पर समाजसेवी सुरिंदर सिंह फलौदिया ने वीडियो पोस्ट कर कहा था कि हमें पंजाब का एक व्यक्ति मिला है। ये मानसिक रूप से ठीक नहीं है। खुद को कपूरथला का बता रहा है। वीडियो में कहा- सभी भाइयों को सत श्री अकाल, नमस्कार, आदाब। इस भाई को हमने रेस्क्यू किया है। मैं सुरिंदर सिंह फलोदिया और ये सरदार जगप्रीत सिंह फलोदिया वरदान है जो मेरा बेटा है। हमने इस भाई को सड़क से रेस्क्यू किया है। ये हमें नहटौर में मिला। अभी हम नहटौर में ही हैं। इसकी हालत बहुत खराब है और ये अपने आप को कपूरथला का बता रहे हैं। लौटने पर हंसा सिंह ने 3 सवालों के दिए जवाब सवाल: घर वापस आ गए हो, अब कैसा लग रहा है?
हंसा सिंह: अच्छा लग रहा है।
सवाल: इतने समय परिवार की याद आई?
हंसा सिंह: हां।
सवाल: कौन लेकर आया आपको?
हंसा सिंह: मेरा भाई। भाई को मरा मान भाभी को दिया नया सहारा
2004 में पति के लौटने की उम्मीद में पत्नी की आंखों का पानी सूख चुका था। बूढ़े मां-बाप और भाइयों को लगा कि शायद हंसा अब इस दुनिया में नहीं रहा। सामाजिक लोक-लाज और विमला के भविष्य को देखते हुए पंचायत ने एक फैसला लिया। हंसा के छोटे भाई सुख सिंह के साथ विमला की शादी कर दी गई। अब सुख सिंह और विमला के 2 बच्चे हैं। हंसा सिंह को तो अब गांव वाले भी भूल चुके थे। जब वह लौटा तो नए युवा तो उसे पहचान भी नहीं पाए।

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