बिहार और झारखंड में राजनीतिक दलों को चंदा देने के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। सैकड़ों लोगों ने किसी भी पार्टी को चंदा दिए बिना ही इनकम टैक्स रिटर्न में भारी छूट का दावा कर दिया। आयकर विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों राज्यों के 2,000 से अधिक संदिग्ध करदाताओं को नोटिस जारी किया है। जांच में सामने आया है कि अधिकतर फर्जी दावे उन राजनीतिक दलों के नाम पर किए गए हैं, जो पंजीकृत गैर मान्यताप्राप्त दल हैं। जब आयकर विभाग ने इन पार्टियों से संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि संबंधित व्यक्तियों से उन्हें कोई चंदा नहीं मिला है। नोटिस का जवाब मिलने के बाद विभाग इन लोगों को ‘अपडेटेड रिटर्न’ भरने का मौका देगा। अगर टैक्सपेयर अपना दावा वापस नहीं लेते हैं, तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बिहार-झारखंड रीजन के नए प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त डी सुधाकर राव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 17,580 करोड़ का टैक्स संग्रह हुआ। यह पिछले साल (18,780 करोड़) की तुलना में थोड़ा कम है। दिलचस्प बात यह है कि कुल टैक्स में 75 फीसदी हिस्सा (13,435 करोड़) टीडीएस से आया है। साफ है कि इस क्षेत्र में ईमानदारी से टैक्स देने वालों में वेतनभोगी कर्मी आगे हैं। बचने का एक ही रास्ता अपडेटेड रिटर्न
आयकर कानून की धारा 80 जीजीसी के तहत राजनीतिक चंदे पर टैक्स छूट का नियम है। इसकी कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है, लेकिन यह केवल ‘ओल्ड टैक्स रिजीम’ में ही मिलता है।
भारी जुर्माना: अगर जांच में चंदे का दावा फर्जी निकलता है, तो विभाग टैक्स की राशि पर 200 फीसदी तक पेनाल्टी वसूल सकता है।
बचाव: जिनको नोटिस मिला है, वे ‘अपडेटेड रिटर्न’ फाइल कर दावा वापस ले सकते हैं। इससे वे जुर्माने व कानूनी पचड़ों से बच सकेंगे।