बिहार में नई सरकार के गठन से ठीक दो दिन पहले केंद्र सरकार ने राज्य को करों की हिस्सेदारी के रूप में 8732 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इस बड़ी राशि के मिलने से राज्य के खजाने पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है। इसके बावजूद, अप्रैल के 17 दिन बीत जाने के बाद भी करीब डेढ़ लाख सरकारी कर्मियों को मार्च का वेतन नहीं मिल सका है। सरकार ने वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए ‘स्लो पेमेंट’ की रणनीति अपना रखी है। वेतन से वंचित इन डेढ़ लाख कर्मचारियों में से एक लाख केवल शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हैं। इनमें 80 हजार नवनियुक्त शिक्षक और 25 हजार चिकित्साकर्मी शामिल हैं। कई जिलों में अभी तक वेतन का आवंटन (अलॉटमेंट) ही नहीं पहुंचा है। राज्य के कुल 10 लाख कर्मचारियों में से अब तक केवल साढ़े आठ लाख को ही मार्च का पैसा मिल पाया है। सूत्रों के अनुसार, बाकी बचे कर्मचारियों का भुगतान अगले हफ्ते तक होने की उम्मीद है। खजाने की स्थिति को देखते हुए सरकार ने बड़े भुगतानों पर लगी रोक को जारी रखा है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ‘मार्च लूट’ को रोकने के नाम पर यह कड़ा रुख अपनाया गया है। जिलों की ट्रेजरी से मिली जानकारी के मुताबिक, निर्माण विभागों का बजट आवंटन नहीं पहुंचने से कई छोटी-बड़ी विकास परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। निर्माण एजेंसियों को भुगतान नहीं होने से काम की रफ्तार सुस्त हो गई है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के बिना 58 हजार छात्रों का नाम कटने की नौबत
बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम में नए एमडी के रूप में प्रमोटी आईएएस अफसर महावीर शर्मा की नियुक्ति तो हो गई है, लेकिन समस्या कम नहीं हुई। राज्य के 58 हजार विद्यार्थियों का वर्ष 2026-27 का शुल्क स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अब तक कॉलेजों को नहीं भेजा गया है। फीस जमा नहीं होने के कारण इन छात्र-छात्राओं का नाम कटने की नौबत आ गई है। परेशान अभिभावक रोज शिक्षा और वित्त विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। उन्हें उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं मिल रहा है।