‘शिक्षक दिवस का दिन था। दोपहर 1 बजे मैं घर पर पढ़ाई कर रही थी। पापा स्कूल की गाड़ी से बच्चों को छोड़कर घर पहुंचे थे। मेरे पास ही घर के बाहर सो गए। इतने में पड़ोस के प्रकाश राय, धीरज राय, सत्यम कुमार, सकलदेव राय आए। प्रकाश राय ने मेरे पापा के सीने में गोली मारी। मैंने विरोध किया तो धीरज राय ने मेरे पीठ में गोली मार दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गए। मैं बेहोश हो गई थी, जब मेरी आंख खुली तो पता चला कि मेरे पापा पवन राय की मौत हो चुकी है, जबकि मुझे साहेबपुर कमाल से बेगूसराय फिर पटना रेफर कर दिया गया।’ बेगूसराय के रघुनाथपुर की रहने वाली 14 साल की दीपिका की इस गवाही पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 (ADJ) मनोज कुमार की कोर्ट ने 6 मई को मुख्य आरोपी प्रकाश राय को उम्रकैद की सजा सुनाई। केस में अन्य आरोपियों की संलिप्तता नहीं पाए जाने के बाद वे सजा से बच गए। कोर्ट ने प्रकाश राय को 5 मई को मामले में दोषी करार दिया था। पवन राय हत्या कब हुई थी? हत्या की वारदात को क्यों अंजाम दिया गया था? पवन राय की हत्या के बाद उनकी पत्नी ने कैसे केस लड़ा? पवन राय के परिवार में कौन-कौन है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए पवन राय हत्याकांड क्या था? साहेबपुर कमाल के रघुनाथपुर के रहने वाले 45 साल के पवन राय प्राइवेट स्कूल की वैन चलाता था। साथ में खेती किसानी भी करता था। पवन राय के परिवार में उनकी पत्नी गुंजन कुमार, बेटी दीपिका और तीन अन्य बच्चे हैं। पवन राय की सबसे बड़ी बेटी दीपिका के मुताबिक, घटना के वक्त मैं 7 साल की थी। उस दिन शिक्षक दिवस था। स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गई थी। मैं घर आकर बरामदे में पढ़ाई कर रही थी। इतने में पापा स्कूल के बच्चों को छोड़कर घर आए थे। दीपिका ने बताया कि मैं जहां पढ़ाई कर रही थी, वहां पापा बैठे और मुझसे पूछने लगे कि आज स्कूल में क्या-क्या हुआ। मैंने सब कुछ बताया। इसके बाद पापा ने कहा कि मैं थक गया हूं। वे मेरे पास ही चबूतरे पर आराम करने लगे। आराम करते-करते पापा की आंख लग गई। दोपहर करीब 1 बज रहे होंगे। इसी दौरान मेरे पड़ोसी प्रकाश राय के साथ सत्यम कुमार, धीरज राय और सकलदेव राय मेरे घर आए। मुझे लगा कि प्रकाश राय पापा के गोतिया हैं, कुछ काम होगा। मुझे लगा कि वे पापा को उठाएंगे। लेकिन मैंने देखा कि बिना कुछ बोले प्रकाश राय ने कमर से बंदूक निकाली और मेरे पिता के सीने में गोली मार दी। गोली चलता देख मैं जोर से चिल्लाई और पापा से जाकर लिपट गई। इसी दौरान प्रकाश राय के साथ मौजूद धीरज राय ने मेरे पीठ में गोली मार दी। वारदात को अंजाम देने के बाद चारों आरोपी फरार हो गए। ‘अस्पताल में आंख खुली तो पता चला पापा नहीं रहे’ दैनिक भास्कर से बातचीत में दीपिका ने बताया कि घटना के बाद परिजन और गांव के लोगों ने मुझे और मेरे पापा को साहेबपुर कमाल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एडमिट कराया। गोली लगने से मैं बहोश हो गई थी। अस्पताल में जब होश आया तो मुझे पता चला कि पापा नहीं रहे। डॉक्टरों ने मुझे बेगूसराय में कल्पना नर्सिंग होम में डॉक्टर अशोक शर्मा के पास रेफर कर दिया। फिर मुझे पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया गया, जहां मेरा 3 महीने तक इलाज चला। दीपिका ने कहा कि इलाज के बाद मैं ठीक हो गई तो मां के साथ कोर्ट गई। मेरी गवाही पर कोर्ट ने मेरे पिता की हत्या के दोषी प्रकाश राय को उम्रकैद की सजा हुई है। मैं चाहती हूं कि प्रकाश राय के साथ धीरज राय, सत्यम कुमार, सकलदेव राय थे, उन्हें भी सजा मिले। आरोपियों की ओर से मुझे धमकी दी जा रही थी कि जिस तरह तुम्हारे पिता की गोली मारकर हत्या की है, तुम्हें भी वैसे ही गोली मारी हत्या कर देंगे। इस धमकी के बावजूद मैं कोर्ट गई, मैं अपने पिता की हत्या के आरोपियों के खिलाफ गवाही दी और पिता को न्याय दिलाया। दीपिका के चाचा बोले- वकील को कभी-कभी फीस देता था, उन्होंने न्याय दिलाया मृतक पवन राय के छोटे भाई गोपी राय ने बताया कि मैं तो मुकदमा लड़ने की स्थिति में नहीं था। किसी ने मंसूर वकील के बारे में जानकारी दी। फिर मैंने वकील साहब से मुलाकात की। वकील साहब की मदद से ही मेरे भाई को न्याय मिला। इस पूरे सुनवाई के दौरान मैंने कभी वकील साहब को पूरा पैसे नहीं दिया। वहीं, पवन राय का केस लड़ने वाले वकील मंसूर आलम ने बताया कि मृतक का परिवार मुकदमा लड़ने में सक्षम नहीं था। मैंने पवन राय की विधवा पत्नी को कहा कि आप गवाह लेकर आइए, आपको इंसाफ मैं दिलाउंगा। फिर मामले में दीपिका, उसकी मां समेत 7 लोगों की गवाही हुई। गवाही के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलील सुनी, हम लोगों ने मृतक के पक्ष में गवाही को पुरजोर तरीके से रखा, जिसने आरोपियों की ओर से दिए गए वारदात का समर्थन किया। वकील मंसूर आलम ने कहा कि केस में सबसे अहम गवाही दीपिका की रही। दीपिका के पीठ में गोली लगी थी और उसने पूरी घटना कोर्ट में बताई। न्यायालय ने इस दलील को सुनने के साथ नियमावली का अध्ययन किया। आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हाईकोर्ट से 7 साल में 4 बार आरोपी की जमानत हुई खारिज पवन राय हत्याकांड में उनकी पत्नी गुंजन कुमारी ने 5 सितंबर 2019 को ही आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। केस दर्ज किए जाने के बाद साहेबपुर कमाल पुलिस ने ठीक एक महीने बाद यानी 5 अक्टूबर 2019 को आरोपी प्रकाश राय को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से प्रकाश राय लगातार जेल में बंद था। केस की सुनवाई के दौरान प्रकाश राय ने 7 साल में 4 बार जमानत के लिए पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन हाईकोर्ट ने हर बार उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। प्रकाश राय ने पहली बार 9 नवंबर 2020, दूसरी बार 20 जुलाई 2022, तीसरी बार 10 जनवरी 2024 और अंतिम बार 25 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट में बेल अपील की थी। लगातार जमानत खारिज होने के बाद निचली अदालत में मुकदमे की सुनवाई जारी रही। अब जानिए, आखिर प्रकाश राय ने पवन राय की हत्या क्यों की? दरअसल, पवन राय और प्रकाश राय गोतिया भाई हैं। दोनों के घर के बीच की दूरी करीब 200 मीटर है। पवन ने अपने खेत में मकई की फसल लगाई थी। अगस्त 2019 प्रकाश राय ने घोड़े पर बैठकर पवन राय की मकई की फसल को रौंद दिया था। पवन राय को इसकी जानकारी मिली तो उसने प्रकाश राय से इसकी शिकायत की। इसपर प्रकाश ने पवन के साथ मारपीट की। गांव के लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्ष को शांत कराया था। अगस्त 2019 में ही प्रकाश राय का छोटा भाई जब गांव में कही जा रहा था, तो पवन राय ने उसके साथ मारपीट की। प्रकाश में बदला लेने की धमकी दी थी। करीब एक महीने बाद 5 सितंबर 2019 को शिक्षक दिवस के दिन प्रकाश राय ने गोली मारकर पवन राय की हत्या कर दी।