सात साल पहले जब जिंदगी ने सबसे कठिन मोड़ लिया और दोनों किडनियों ने जवाब दे दिया, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यही शख्स एक दिन देश का नाम रोशन करेगा। फतेहाबाद के गांव सिरढ़ान के सतबीर गिजरोइया ने दर्द, संघर्ष और पिता के त्याग को अपनी ताकत बनाया। पिता से मिले जीवनदान और खुद के अटूट हौसले के दम पर सतबीर ने थाइलैंड में दो कांस्य पदक जीतकर साबित कर दिया कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, जज्बा अगर जिंदा हो तो जीत निश्चित है। सतबीर गिजरोइया ने थाइलैंड में हुई दूसरी पेटांक ट्रांसप्लांट एशियन ओपन चैंपियनशिप में 2026 में दो कांस्य पदक जीते हैं। यह चैंपियनशिप 29 अप्रैल से 3 मई तक थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक में हुई। इसमें इंडिया के 14 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इंडियन खिलाड़ियों ने 6 पदक जीते हैं। इनमें से सतबीर गिजरोइया ने मेन्स सिंगल्स के नेशन्स ग्रुप और एशियन ग्रुप में कांस्य (ब्रोंज) मेडल जीता है। 9 देशों के 85 खिलाड़ियों ने लिया भाग प्राइवेट स्कूल में टीचर सतबीर के बड़े भाई सुनील गिजरोइया ने बताया कि इस चैंपियनशिप में 9 देशों के 85 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इंडियन खिलाड़ियों ने थाइलैंड, आस्ट्रेलिया, हांगकांग, चीन, हंगरी, मलेशिया, भूटान और नेपाल के खिलाड़ियों के खिलाफ अपने खेल का प्रदर्शन किया। जानिए…सतबीर के संघर्ष की कहानी जानिए… क्या है पैटांक खेल पैटांक खेल अपने स्टील के गोलों को एक छोटी लकड़ी की गेंद (जिसे ‘जैक’ या ‘कोकोनेट’ कहा जाता है) के सबसे करीब फेंकना होता है। खिलाड़ी एक छोटे से घेरे में खड़े होकर अपने पैरों को जमीन पर टिकाए रखते हुए गेंद फेंकते हैं। यह खेल सख्त मिट्टी या बजरी पर खेला जाता है। इसे 1vs1 (सिंगल्स), 2vs2 (डबल्स), या 3vs3 (ट्रिपल्स) में खेला जा सकता है। जो टीम अपने सभी गोले फेंकने के बाद विरोधी टीम की तुलना में जैक के सबसे करीब गेंदें पहुंचाती है, उसे अंक मिलते हैं। आमतौर पर 13 अंक तक पहुंचने वाली पहली टीम जीतती है।