पेरेंटिंग- 13 साल की बेटी चैट-GPT से होमवर्क करती है:हर सवाल AI से पूछती है, उसकी लर्निंग एबिलिटी कमजोर न हो जाए, क्या करूं?

सवाल- मैं पटना का रहने वाला हूं। मेरी 13 साल की बेटी सातवीं कक्षा में पढ़ती है। पिछले कुछ समय से अपने होमवर्क और प्रोजेक्ट के लिए वह AI टूल्स का इस्तेमाल करने लगी है। उसे कुछ भी पूछना-जानना हो तो सीधे चैट जीपीटी से पूछकर जवाब कॉपी कर लेती है। खुद सोचने या मेहनत करने से बचने लगी है। मुझे लगता है कि जैसे वह अब इसी पर निर्भर हो गई है। हमें डर है कि कहीं इससे उसकी सोचने-समझने की क्षमता और लर्निंग एबिलिटी कम न हो जाए। हमें क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- आपकी चिंता बिल्कुल वाजिब है। आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। इसलिए बच्चों का AI टूल यूज करना स्वाभाविक है। लेकिन उन्हें इसका सही इस्तेमाल सिखाना जरूरी है। AI का सही इस्तेमाल सिखाना जरूरी आपने बताया कि आपकी बेटी पढ़ाई में अच्छी है। लेकिन अब वह मेहनत से बचने के लिए सीधे AI टूल्स से जवाब लेने लगी है। यह डिपेंडेंसी का एक संकेत है। लेकिन आपने सही समय पर इसे नोटिस किया है। इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है। इसे समझदारी के साथ आसानी से हैंडल किया जा सकता है। ध्यान रखें, AI एक महत्वपूर्ण तकनीक है और आगे इसका इस्तेमाल बढ़ेगा। इसलिए पेरेंट्स का उद्देश्य उसे AI से दूर रखना नहीं, बल्कि सही यूज सिखाना होना चाहिए। बच्चों को AI टूल्स क्यों मजेदार लगते हैं? मनोवैज्ञानिक रूप से यह आकर्षण स्वाभाविक है। लेकिन सही दिशा न मिले तो यह आदत धीरे-धीरे निर्भरता बन सकती है। इसलिए पेरेंट्स का रोल यहां बेहद अहम हो जाता है। बच्चे के AI टूल्स की ओर आकर्षण के कई कारण हैं- बच्चे के AI टूल्स की ओर आकर्षित होने के कई कारण हैं- AI का यूज करना गलत नहीं है, लेकिन जब ये डिपेंडेंसी बन जाती है, तभी समस्या बढ़ती है। AI पर डिपेंडेंसी का बच्चे पर प्रभाव बच्चों पर AI के नेगेटिव इफेक्ट्स ग्राफिक में देखिए- बच्चे को AI का सही उपयोग कैसे सिखाएं? पेरेंट्स बच्चे को समझाएं कि AI एक लर्निंग टूल है, जो उनकी पढ़ाई और समझ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन यह कभी भी टीचर या उनके अपने दिमाग का विकल्प नहीं बन सकता। AI के सही यूज के साथ बच्चों में क्रिएटिव सोच भी डेवलप करना जरूरी है। बच्चों में क्रिएटिव सोच कैसे डेवलप करें? पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चे की कोशिश और सोचने की प्रक्रिया को सराहें। आप अपनी बेटी से कह सकते हैं कि पहले वह खुद सवाल हल करने की कोशिश करे और बाद में AI से अपने जवाब की तुलना करे। इससे उसे दो फायदे होंगे- इसके अलावा बच्ची को ऐसी एक्टिविटीज में शामिल करें, जो उसकी इमैजिनेशन और क्रिएटिविटी को बढ़ाए। इसे ग्राफिक में देखिए- बच्चे से बातचीत जरूरी अंत में यही कहूंगी कि आप अपनी बच्ची को समझाएं कि AI एक ‘टॉर्च’ की तरह है, जो रास्ता दिखा सकती है, लेकिन चलना उसे खुद ही होता है। जब वह समझेगी कि AI सिर्फ हेल्पिंग टूल है। उसे अपनी सोच-समझ के लिए मेहनत और जिज्ञासा बनाए रखनी होगी, तभी वह तकनीक का संतुलित और सही उपयोग करना सीख पाएगी। ……………………. पेरेंटिंग की ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 10 साल की बेटी एकदम मुंहफट है: जो मुंह में आए, बोल देती है, ये उसकी साफगोई है या संवेदना की कमी, उसे कैसे 10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन ‘सोशल इंटेलिजेंस’ (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। पूरी खबर पढ़िए…

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