पंजाब सरकार के नए बेअदबी कानून के खिलाफ अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने मोर्चा खोल दिया है। प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने आज अमृतसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए कानून पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह संशोधन श्री आनंदपुर साहिब में विधानसभा सत्र के दौरान पारित किए लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में SGPC और श्री अकाल तख्त साहिब से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया जोकि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। एसजीपीसी ने अब 31 मई को गुरुद्वारा श्री बाबा बकाला साहिब में एक बड़ा पंथक सम्मेलन बुलाया गया है, जिसमें निहंग सिंह जत्थे, दमदमी टकसाल, विभिन्न सिंह सभाएं और अन्य धार्मिक संगठन शामिल होंगे। यह सम्मेलन किसी टकराव के लिए नहीं बल्कि सिख संस्थाओं की स्वायत्तता और धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए आयोजित किया जा रहा है। धामी ने पंजाब सरकार से अपील की कि विवादित प्रावधानों को वापस लिया जाए और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप से बचा जाए। कई प्रावधानों को लेकर एसजीपीसी की आपत्ति धामी ने कहा कि पहला प्रस्ताव यह है कि पावन स्वरूपों की देखरेख करने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई की बात कही गई है, जबकि दूसरा प्रस्ताव एसजीपीसी को एक महीने के भीतर सभी पावन स्वरूपों का पूरा रिकॉर्ड वेबसाइट पर डालने के निर्देश देता है। उन्होंने कहा कि इन दोनों बिंदुओं को लेकर सिख संस्थाओं में चिंता है। हर जानकारी को सार्वजनिक करना ठीक नहीं SGPC अध्यक्ष ने कहा कि संस्था के पास पहले से ही स्वरूपों की सुरक्षा और रिकॉर्ड के लिए आधुनिक और मजबूत प्रणाली मौजूद है। हर स्वरूप को देने से पहले गुरुद्वारा की जांच, CCTV व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा और ग्रंथी सिंहों की पुष्टि जैसे सभी मानकों का पालन किया जाता है। ऐसे में इन जानकारियों को सार्वजनिक करना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है और इससे धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंच सकती है। धार्मिक निर्णय श्री अकाल तख्त साहिब का अधिकार धामी ने यह भी कहा कि सिख मर्यादा और धार्मिक निर्णय श्री अकाल तख्त साहिब के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, न कि सरकारी कानून के तहत तय किए जाने चाहिए। इस मुद्दे पर पहले तख्त श्री दमदमा साहिब में बैठक हो चुकी है, जिसमें कई पंथक संगठनों ने भाग लिया था।