मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित भगत मार्केट के प्रोप्राइटर मनोज भगत और उनकी पत्नी मीनू देवी के रहस्यमय ढंग से लापता होने के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। बीते 20 मई से लापता दंपती की तलाश में पुलिस लगातार छानबीन कर रही है। मामले में संपत्ति विवाद, पुराने आपराधिक मामले और लेनदेन समेत कई बिंदुओं पर जांच चल रही है। पुलिस का कहना है कि परिजनों और रिश्तेदारों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। सोमवार को एसडीपीओ टाउन-2 बिनीता सिन्हा ने उस कमरे का भी निरीक्षण किया, जहां से दंपती रहस्यमय तरीके से गायब हुए थे। परिजन का दावा- कमरे में मिले खून के धब्बे परिजनों का दावा है कि कमरे के बेड पर खून के धब्बे मिले थे, जिससे हत्या की आशंका और गहरा गई है। हालांकि, पुलिस ने मौके से सैंपल जुटाकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। अब एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कमरे में मिले धब्बे वास्तव में खून के हैं या कुछ और। दंपती की बेटी शिफाली कुमारी ने अपने सगे चाचा पर संदेह जताया है। उसने बताया कि उसके माता-पिता शादी को लेकर मुजफ्फरपुर आए थे। 19 मई को उसकी आखिरी बार माता-पिता से बात हुई थी और तब सबकुछ सामान्य था। लेकिन 20 मई से दोनों के मोबाइल लगातार बंद आने लगे, जिसके बाद अनहोनी की आशंका हुई और पुलिस को सूचना दी गई। शिफाली का कहना है कि उसके पिता और चाचा के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। उसने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपए की मार्केट संपत्ति पर कब्जे की नीयत से उसके चाचा ने कुछ कराया हो सकता है। जीजा ने बताई पुरानी रंजिश मनोज भगत के बहनोई ने बताया कि मनोज का ज्यादातर समय दिल्ली में गुजरता था। उनके खिलाफ पहले से कुछ मामले दर्ज थे। हत्या के एक मामले में वह जेल भी जा चुके थे और सजा काटकर लौटे थे। दिल्ली के कुछ कारोबारियों के साथ लेनदेन को लेकर विवाद भी चल रहा था। उन्होंने कहा कि पुलिस को हर एंगल से निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, क्योंकि अचानक दोनों का गायब हो जाना कई सवाल खड़े करता है। मनोज के भाई ने भतीजी के आरोपों को बताया गलत वहीं, मनोज भगत के भाई ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उसने पुलिस को बताया कि बड़े भाई लंबे समय से दिल्ली में रहते थे और पुराने मामलों में उसने ही उनकी मदद की थी। भाई का कहना है कि मनोज बड़े लेनदेन का काम करते थे और बाहर से कई लोगों का आना-जाना लगा रहता था। घटना वाले दिन पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो रहा था। इसके बाद क्या हुआ, इसकी उसे जानकारी नहीं है। उसने आशंका जताई कि दोनों रात में चुपचाप कहीं चले गए होंगे। परिजनों ने सवाल उठाया है कि जब कमरे का ताला बाहर से बंद था तो दंपति आखिर कहां गए। उनका कहना है कि कमरे के पीछे का रास्ता छोटे भाई के कमरे से होकर गुजरता है। ऐसे में संदेह और गहरा जाता है। परिजनों के मुताबिक, बाहर निकलने के लिए केवल एक सीढ़ी वाला रास्ता है। ऐसे में बिना किसी की जानकारी के दोनों का गायब हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस कई एंगल पर कर रही जांच एसडीपीओ टाउन-2 बिनीता सिन्हा ने बताया कि मामले की जांच में टेक्निकल टीम, डीआईयू और एफएसएल की मदद ली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कमरे में मिले खून के धब्बे वास्तविक हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि दंपति की बेटी और अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। कुछ लोगों पर संदेह भी जताया गया है। एसडीपीओ ने कहा कि मनोज भगत पर पहले से हत्या और रुपये के लेनदेन से जुड़े मामले दर्ज थे। वे वर्ष 2012 में जेल भी जा चुके थे। लंबे समय से दिल्ली में रह रहे थे और बेटी की शादी के सिलसिले में मुजफ्फरपुर आए थे। उन्होंने बताया कि बेटी ने अपने चाचा पर संदेह जताया है, जिनका कमरा गायब दंपति के कमरे के पास है। पुलिस ने उनसे भी पूछताछ की है। पूरे मार्केट में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है, इसलिए आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की हर बिंदु पर गंभीरता से जांच की जा रही है।