‘हेलो तबस्सुम…ट्रेन में मुझे कुछ लोग गाली दे रहे हैं। मेरे साथ मारपीट भी कर रहे हैं। मेरी जान को खतरा है, तुम पुलिस को फोन कर बता दो।’ यह कहना था किशनगंज के मौलाना तौसीफ रजा मजहरी का…इन्होंने मौत से कुछ मिनट पहले ही अपनी पत्नी तबस्सुम खातून से आखिरी बार फोन कॉल पर बात की थी। इस मामले में मौलाना की पत्नी का कहना है, ट्रेन में मेरे पति के साथ मारपीट हुई। मैं पुलिस को फोन करती, लेकिन उससे पहले ही उनका फोन ऑफ हो गया। दूसरे दिन जानकारी मिली की उनका शव रेलवे ट्रैक पर मिला है। दरअसल, 26 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के बरेली में आयोजित उर्स ए ताजुश्शरिया में शामिल होने के बाद वे ट्रेन के जेनरल कोच में सफर कर रहे थे। 26 की रात वो किशनगंज पहुंचने वाले थे, लेकिन 27 अप्रैल को उनका शव बरेली में रेलवे ट्रैक के किनारे झाड़ियों में बरामद हुआ था। हालांकि, बरेली पुलिस ने इसे हादसा बताया है। मृतक की पहचान किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत भोगडावर पंचायत निवासी मौलाना तौसीफ रजा मजहरी (30) के रूप में हुई है। मौलाना तौसीफ उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इमामत की जिम्मेदारी निभाते थे। इससे पहले वे सीवान में मदरसा में शिक्षक भी रह चुके थे। ओवैसी ने पूछा- मुसलमानों को भारत में रहने का अधिकार नहीं इस मामले में AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा और केंद्रीय रेल मंत्री से सवाल पूछा है। प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इसे हत्या बताते हुए पूछा, क्या मुसलमानों को भारत में रहने का अधिकार नहीं है? उन्होंने केंद्र सरकार और रेल मंत्री से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ओवैसी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को ट्वीट कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, मुझे उम्मीद है कि रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw ट्रेन में मौलाना तौसीफ रजा की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। AIMIM के ऑफिशियल पेज से ट्वीट वहीं, AIMIM के ऑफिशियल पेज से भी इस मामले में ट्वीट हुआ है। उन्होंने लिखा किशनगंज के मौलाना तौसीफ रजा मजहरी साहब के साथ ट्रेन में हुई यह दर्दनाक घटना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आगे कहा कि हम मोदी सरकार और रेल मंत्री से मांग करते हैं कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जल्द से जल्द कराई जाए, जो भी दोषी हों उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए, ताकि पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो। सरकारी नौकरी और मुआवजे की मांग AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा, इसने पूरे समाज को झकझोर दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। आदिल हसन ने इस दौरान भाजपा और आरएसएस पर भी तंज कसते हुए कहा कि उन्हें दाढ़ी-टोपी से हमेशा दिक्कत रहती है। उन्होंने मस्जिद के सामने नारे लगाने और मॉब लिंचिंग के मामलों का जिक्र करते हुए इस घटना की भी जांच की मांग की। मौते से पहले का कॉल रिकॉर्डिंग आया सामने वहीं, मौलाना के मौत से पहले का एक वॉइस रिकॉर्डिंग सामने आया है। वो और उनकी पत्नी के बीच हुए मोबाइल पर बातचीत का रिकॉर्डिंग है। इसमें उन्होंने अपनी पत्नी से कहा, ट्रेन में नशे में धुत लोगों ने मुझे पकड़ लिया है। गाली-गलौज कर रहे है। मेरे साथ मारपीट कर रहे हैं। तुम पुलिस को फोन कर घटना की जानकारी दे दो। उन्होंने यह भी कहा कि डिब्बे में लोग थे, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया। ट्रेन में विवाद के बाद हुआ हमला? पत्नी के मुताबिक, बरेली कैंट क्षेत्र के पास ट्रेन में कुछ असामाजिक तत्वों के साथ उनका विवाद हुआ। इसके बाद उन्हें चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के अगले दिन बरेली जंक्शन के पास रेलवे ट्रैक के किनारे झाड़ियों में मौलाना का शव बरामद हुआ। शव पर चोट के कई निशान थे, जो मारपीट की ओर इशारा करते हैं। मेरे पति की हत्या की गई है। गर्मी में झपकी से गिरने से हुई मौत वहीं, बरेली पुलिस ने इस मामले को दुर्घटना करार दिया है। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया जांच में किसी प्रकार की मारपीट, झगड़े या साजिश के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के कारण मौलाना ट्रेन के गेट पर बैठे थे। झपकी आने के कारण असंतुलित होकर नीचे गिर गए। गिरने से सिर, पैर, कमर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि पीट-पीटकर हत्या या ट्रेन से फेंके जाने के दावों की पुष्टि नहीं हुई है।