लुधियाना में 3 साल की एक बच्ची ने घर में माचिस से खेलते वक्त खुद को ही आग लगा ली। बच्ची ने नायलॉन की फ्रॉक पहनी हुई थी, जिसने चंद सेकेंड में ही आग पकड़ ली। फ्रॉक उसकी बॉडी पर चिपक गई थी। इसके बाद वह आग में झुलती और तड़पती रही। मासूम को बचाने उसके पिता पहुंचे, जिनके हाथ भी बुरी तरह झुलस गए। इसके बाद बच्ची को एक निजी क्लिनिक ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने फर्स्ट एड देकर बच्ची को अस्पताल ले जाने की सलाह दी। घटना के करीब 6 घंटे बाद बच्ची को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्ची करीब 60% तक झुलस चुकी है। पिता काम से घर लौटे, बेटी तड़पती मिली यह हादसा लुधियाना के चंदन नगर स्थित भाटिया डेयरी के पास घर में हुआ। यूपी में कासगंज के रहने वाले बच्ची के पिता सतपाल ने बताया कि वह काम से घर पहुंचे थे। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, सामने उनकी मासूम बेटी आग की लपटों में घिरी हुई तड़प रही थी। सतपाल ने बिना अपनी जान की परवाह किए नंगे हाथों से ही आग बुझाने की कोशिश की। इस दौरान उनकी उंगलियां और हाथ भी जल गए। सतपाल ने कहा- अगर मैं दो मिनट की भी देरी कर देता, तो बच्ची की जान चली जाती। सतपाल ने बताया कि हादसे के समय घर में उनके सभी बच्चे मौजूद थे। उनके कुल 5 बच्चे हैं, जिनमें सबसे बड़ी बेटी 17 साल की है। हालांकि, छोटी बेटी के पास कोई नहीं था, इसलिए किसी को आग लगने का पता ही नहीं चला। 6 घंटे तक तड़पती रही मासूम, पैसे नहीं थे इसलिए अस्पताल ले जाने में हुई देरी हैरान कर देने वाली बात यह है कि हादसा बुधवार शाम 4 बजे हुआ, लेकिन बच्ची को रात 10 बजे के बाद सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। करीब 6 घंटे तक मासूम दर्द से कराहती रही। देरी की वजह पूछने पर बच्ची की मां ममता देवी ने कहा- हम बहुत गरीब हैं। हमारे पास इलाज के लिए फूटी कौड़ी नहीं थी। मैं कोठियों में झाड़ू-पोछा करने गई थी। जब मुझे पता चला कि बेटी को आग लग गई है तो मैं रोने लगी। मैं दौड़कर घर पहुंची और बच्ची को हम क्लिनिक में ले गए। उन्होंने बताया- बच्ची को अस्पताल ले जाने और बेहतर इलाज दिलाने के लिए मैंने अपनी मालकिन से बात की। उन्होंने मदद की तो बच्ची को अस्पताल ले जाने का इंतजाम हुआ। डॉक्टर ने सिविल अस्पताल ले जाने को कहा ममता देवी ने कहा कि पहले बच्ची को पास के ही एक लोकल डॉक्टर को दिखाया था, लेकिन बच्ची 60% तक झुलस चुकी थी। हालत गंभीर देख डॉक्टर ने उसे तुरंत बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। फिलहाल बच्ची लुधियाना के सिविल अस्पताल में उपचाराधीन है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। नायलॉन के कपड़े से जल्दी आग पकड़ी, एक्सपर्ट क्या बोले… लुधियाना फायर ब्रिगेड में तैनात फायर अफसर दिनेश कुमार ने बताया कि आजकल बच्चों के कपड़े नायलॉन व सिंथेटिक फाइबर से बने होते हैं। नाइलॉन वाले कपड़े जल्दी आग पकड़ते हैं और पिघलकर बॉडी पर चिपक जाते हैं। इससे ज्यादा नुकसान होता है। इसलिए बच्चों को कॉटन के कपड़े पहनाना बेहतर है। खासकर तब जब बच्चे रसोई में घुस जाते हों। उन्हें ढीले व झूलते कपड़े पहनाने से बचें, गैस चूल्हे, दीये, माचिस, लाइटर और हीटर से बच्चों को दूर रखें। साथ ही उन्हें “रुको-लेटो-लुढ़को” का नियम सिखाएं।