शिमला में भालू का आतंक:बागवानों को लाखों का नुकसान, तोड़े प्लम के पेड़, शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर लोग

शिमला जिले के रामपुर उपमंडल की तकलेच पंचायत के कुबन गांव में इन दिनों भालू के आतंक से बागवान बेहद परेशान हैं। जंगली भालू ने रिहायशी इलाकों के साथ लगते बगीचों में घुसकर प्लम के फलदार पेड़ों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। स्थानीय बागवान गुमान कायथ के बगीचे में ही 30 से अधिक पेड़ भालू ने तोड़ डाले हैं। बागवानों का कहना है कि प्लम की फसल तैयार होने वाली थी, लेकिन इस तबाही से उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से भालू रात के समय लगातार गांव के पास देखा जा रहा है। भालू के खौफ के कारण लोग शाम ढलते ही अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भालू के बार-बार आने से न केवल फसलों और पेड़ों को खतरा है, बल्कि अब ग्रामीणों की जान पर भी बन आई है। डर के कारण लोग अपने खेतों और बगीचों में जाने से भी कतरा रहे हैं। वन विभाग ने शुरू किया नुकसान का आकलन घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने कुबन गांव का दौरा किया और प्रभावित बगीचों का निरीक्षण किया। विभागीय अधिकारियों ने भालू द्वारा तोड़े गए पेड़ों और फसल के नुकसान का आकलन करना शुरू कर दिया है। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है और विभाग को रिपोर्ट सौंपने की बात कही है ताकि आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा सके। मुआवजे और गश्त बढ़ाने की उठी मांग प्रभावित बागवानों और ग्रामीणों ने सरकार व वन विभाग से उचित मुआवजे की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का तर्क है कि बागवान साल भर मेहनत कर फसल तैयार करते हैं और ऐसे में जंगली जानवरों द्वारा किया गया नुकसान उनकी कमर तोड़ देता है। उन्होंने मांग की है कि वन विभाग क्षेत्र में गश्त बढ़ाए और भालू को आबादी वाले क्षेत्र से दूर खदेड़ने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की चेतावनी कुबन गांव के निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते भालू के आतंक पर काबू नहीं पाया गया, तो किसी भी समय कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि संवेदनशील इलाकों में पिंजरे लगाए जाएं या अन्य सुरक्षा उपाय किए जाएं। फिलहाल, गांव में डर का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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