संदीप पाठक की याचिका पर HC में आज सुनवाई:पंजाब सरकार दाखिल करेगी जवाब; बताएगी किन मामलों में कौन-कौन सी धाराएं लगाईं

आम आदमी पार्टी छोड़कर BJP में शामिल हुए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक द्वारा दायर याचिका पर आज पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस दौरान पंजाब सरकार की तरफ से जवाब दाखिल किया जाएगा कि उन पर किसी तरह कोई केस दर्ज किया है या नहीं। इससे पहले अदालत ने सोमवार तक उन पर किसी भी तरह के एक्शन पर रोक लगा दी थी। दरअसल, पाठक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब सरकार द्वारा उनके खिलाफ दर्ज केस की कॉपी मांगी थी। पाठक ने कहा था कि उन्हें यह बताया जाए कि दो केस कहां रजिस्टर किए और उनमें कौन सी धाराएं लगाई गईं। याचिका में पाठक ने रखी है तीन दलीलें FIR कहां दर्ज हुई, इसकी जानकारी मांगी –
संदीप पाठक ने याचिका में लिखा है कि पिछले कुछ दिनों मीडिया में अचानक खबरें आई कि पंजाब सरकार ने उनके खिलाफ दो FIR गैरजमानती धाराओं में दर्ज की हैं। उन्हें पंजाब सरकार व पुलिस ने अभी तक नहीं बताया कि एफआईआर कहां और किन धाराओं में दर्ज हुई हैं। मैंने कोई गलत काम नहीं किया – दो दिन बाद संदीप पाठक सामने आए और उन्होंने कहा कि उन्हें पता ही नहीं है कि उनके खिलाफ कहां पर पर्चा दर्ज हुआ है। पाठक ने कहा था कि उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिसकी वजह से उनके खिलाफ एफआईआर हो। संदीप पाठक दिल्ली स्थित अपने घर में थे और जब उन्हें यह सूचना मिली तो वो घर के पिछले दरवाजे से निकल गए थे, ताकि पंजाब पुलिस उन्हें गिरफ्तार न कर सके। AAP सरकार के खिलाफ खोला था मोर्चा –
FIR की सूचना से भाजपा समेत तमाम विरोधी दलों ने आप सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। आम आदमी पार्टी के नेताओं और मुख्यमंत्री ने भी यहां तक कह दिया था कि, जिसने गलत काम किए होंगे उनके खिलाफ तो कार्रवाई होगी ही। मुख्यमंत्री के इस तरह के बयान के बाद पाठक को लगा कि पंजाब पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है, लेकिन पुलिस उन्हें बता नहीं रही है। उन्होंने अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। 24 अप्रैल को छोड़ी थी AAP संदीप पाठक ने 24 अप्रैल 2026 को ‘आप’ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया, जिसके तुरंत बाद 2 मई को पंजाब पुलिस ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में दो गैर-जमानती एफआईआर दर्ज कीं। गिरफ्तारी के डर से पाठक ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया, जहां उन्होंने इन एफआईआर को “सीक्रेट” बताते हुए इनकी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए 11 मई 2026 तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और पंजाब सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।

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