अक्सर लोग लाखों के पैकेज और एयर-कंडीशंड दफ्तरों के लिए तरसते हैं, लेकिन चंडीगढ़ के 28 वर्षीय सोहम वर्मा ने इसी चमक-धमक को छोड़कर एक कठिन रास्ता चुना है। सोहम अपनी साइकिल पर सवार होकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक की 4,000 किलोमीटर लंबी यात्रा पर निकल चुके हैं। यात्रा का मकसद देश के छोटे-छोटे गांव और कस्टम और गांव में छुपे हुनर को पहचानना है। कौन हैं सोहम वर्मा? सोहम वर्मा मूल रूप से एक कुशल मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं। पिछले 6 सालों से वे बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों में शानदार पदों पर काम कर रहे थे। एक स्थिर करियर होने के बावजूद,उनके मन में कुछ ऐसा करने की इच्छा थी जो किताबी ज्ञान से परे हो। मिशन देसी मैनेजमेंट की खोज सोहम का यह सफर सिर्फ घूमने के लिए नहीं है बल्कि भारत के उस सिस्टम को समझने के लिए है जो बिना किसी बड़ी डिग्री या तकनीक के सालों से सटीक चल रहा है। भारत के गांवों और छोटे शहरों में छिपे उन छोटे व्यवसायों और जुगाड़ तकनीक को समझना जिनसे आम आदमी अपनी आजीविका चलाता है। प्रेरणा:सोहम को सबसे बड़ी प्रेरणा मुंबई के डब्बावालों से मिली। वे कहते हैं कि अगर हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटी डब्बावालों के बिना तकनीक वाले मैनेजमेंट को देखकर हैरान हो सकती है तो देश के कोने-कोने में ऐसे और भी कई अनसंग हीरोज होंगे। यात्रा का रोडमैप 45 दिन, 4,000 KM यह सफर कोई आसान चुनौती नहीं है। सोहम ने अपनी इस पूरी यात्रा के लिए 45 दिन का लक्ष्य रखा है। रूट उत्तर में बर्फिले कश्मीर से लेकर दक्षिण के आखिरी छोर कन्याकुमारी तक। सिर्फ अपनी साइकिल और जरूरी गियर। उनका मानना है कि ट्रेन या फ्लाइट से हम रास्ते की उन बारीकियों को नहीं देख पाते जो साइकिल से संभव हैं। परिवार का सहयोग किसी भी युवा के लिए जमी-जमाई नौकरी छोड़ना रिस्की होता है, लेकिन सोहम के इस साहसी फैसले में उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया। उनके परिवार का मानना है कि जीवन में अपने सपनों को जीना और समाज के लिए कुछ अलग खोज कर लाना सबसे बड़ी उपलब्धि है। अब तक का अनुभव: गन्ने के कोल्हू से ट्रक ड्राइवरों तक अपनी यात्रा के शुरुआती चरणों में सोहम ने पठानकोट और जालंधर के बीच काफी समय बिताया है। उन्होंने देखा कि कैसे खेतों में गन्ने से गुड़ बनाने की प्रक्रिया (कोल्हू) आज भी प्रभावी ढंग से काम कर रही है।लॉजिस्टिक्स:वे ट्रक ड्राइवरों के जीवन और उनके लॉजिस्टिक्स सिस्टम को करीब से समझ रहे हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सोशल मीडिया के लिए छोटा कैप्शन सपनों की कोई सीमा नहीं होती! 28 साल के सोहम वर्मा ने अपनी कॉर्पोरेट जॉब छोड़ी और अब साइकिल पर 4,000 किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है भारत के गांवों में छिपे ‘मैनेजमेंट गुरुओं’ को दुनिया के सामने लाना। सलाम है ऐसे जज्बे को