700 गाड़ियां-3500 लोग, धूमधाम से निकाली दादी की शवयात्रा:भोजपुर में पोतों ने 10 लौंडा डांसर, 30 बैंड बुलाए; बोले-अब वो कुछ लेने नहीं आएंगी

भोजपुर के शाहपुर प्रखंड में शुक्रवार को 95 साल की बुजुर्ग महिला के निधन के बाद धूमधाम से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। शवयात्रा में 700 से अधिक गाड़ियां और 3500 लोगों की भीड़ चल रही थी। 80 से ज्यादा ड्रोन कैमरों से हर एक मूवमेंट की शूटिंग की जा रही थी। शव यात्रा में 10 से अधिक लौंडा डांसर डांस कर रहे थे। 30 से अधिक अलग-अलग बैंड को बुलाया गया था। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग महिला लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थी। उनके निधन के बाद अंतिम यात्रा में शामिल उनके पोतों ने कहा कि वो हमारे घर की छत थीं। दादा हमें पहले ही छोड़कर जा चुके हैं। दादी बची थी, उनका प्यार हमारे लिए अनमोल था। हमने दादी खोई और पापा ने अपनी मां। घर से लेकर श्मशान घाट तक करीब 4 किलोमीटर की दूरी के बीच 30 पिकअप वैन पर लाउडस्पीकर बांधे गए थे। इन लाउडस्पीकर पर ‘हम आंखि देखनी, सुंदर शरीरिया अगिया में जरेला ये राम…’ और ‘माटी के ई बनल शरीरिया, माटी में मिल जाई…’ जैसे निर्गुण बज रहे थे। शवयात्रा की हर दृश्य को कैद करने के लिए बुजुर्ग महिला के पोते ने 80 से अधिक ड्रोन कर्मियों को वीडियो बनाने का ठेका दिया था। बुजुर्ग महिला की अंतिम यात्रा की 3 तस्वीरें देखिए अब जानिए 95 साल की बुजुर्ग महिला कौन थी, जिनकी धूमधाम से अंतिम यात्रा निकाली गई बुजुर्ग महिला कौशल्या देवी शाहपुर प्रखंड के दिलमनपुर गांव की रहने वाली थी, जो पिछले तीन साल से कैंसर से जूझ रही थीं। उनके पति डॉक्टर जनार्दन पांडे का करीब 7 साल पहले निधन हो चुका है। कौशल्या और जनार्दन पांडे के दो बेटे हैं, जिनमें बड़े बेटे वृंदानंद पांडे पेशे से वकील हैं, जबकि छोटे बेटे नारद पांडे घर पर ही रहते हैं। कौशल्या और जर्नादन पांडे के कुल 6 पोते हैं, जिनमें वृंदानंद पांडे के बेटे अजय और अमर पांडेय धनबाद में कोयला कारोबारी हैं, जबकि नारद पांडे के चार बेटों में गणेश पांडेय कोयला व्यवसाय करते हैं, जबकि मंटू पांडेय का कोक इंडस्ट्री का कारोबार है। वहीं रमेश पांडेय एक सैटेलाइट चैनल TV 45 के मालिक हैं। दिनेश पांडेय ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनके पास 50 से 60 गाड़ियां है। कौशल्या के पति धनबाद में पेशे से होमियोपैथिक डॉक्टर थे जनार्दन पांडे धनबाद में होमियोपैथिक डॉक्टर थे, जो डॉक्टरी के साथ-साथ सामाजिक कार्यों के लिए शाहपुर प्रखंड में जाने जाते थे। गरीबों की बेटियों की शादी करनी हो, गरीबों के बच्चों की पढ़ाई करानी हो, हर तरह से जनार्दन पांडे मदद करते थे। उनके तरह ही बेटे और पोते भी सामाजिक कार्यों में जुटे रहते हैं। कौशल्या देवी की अंतिम यात्रा में न सिर्फ उनके गांव के लोग, बल्कि आसपास के प्रखंड के लोग भी शामिल हुए। धूमधाम से निकाली गई अंतिम यात्रा कौशल्या देवी की ख्वाहिश थी कि मैं जिस घर में 80 साल पहले दुल्हन बनकर आई थीं, उस घर से मेरी आखिरी विदाई धूमधाम से हो। दादी की इसी इच्छा को उनके दोनों बेटों और 6 पोतों ने पूरा किया है। कौशल्या देवी के पोते रमेश पांडेय ने कहा कि हमने एक अनमोल खजाना खोया है, परिवार ने एक छत खो दी है। आज गम तो है, लेकिन हम चाहते हैं कि दादी को ऐसी विदाई दें, जिसे लोग याद रखें। आज के बाद दादी हमसे कुछ लेने नहीं आएगी। रमेश ने बताया कि दादी का जाना परिवार के लिए बड़ी क्षति है। 95 साल की उम्र में दादी हम लोगों से काफी ज्यादा प्यार करती थी। गलती करने पर डांट-फटकार भी करती थी। आज दादी को पूरा परिवार मिस कर रहा है। लोग शादी, बर्थडे धूमधाम से मनाते हैं, लेकिन जो इस दुनिया से चला जाता है, हम उनके लिए क्या करते हैं, ये सबसे बड़ा सवाल है। हमारा परिवार दादा-दादी के सपनों को आगे भी पूरा करता रहेगा।

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