धर्मशाला के चराण खड्ड पर बिल्डरों का कब्जा:स्टेडियम के पास हो रहा अवैध निर्माण, खुदाई में NGT के नियमों की अनदेखी, केस दर्ज

कांगड़ा जिले के धर्मशाला इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के ठीक नीचे दाड़ी-आईटीआई रोड पर नियमों का उल्लंघन कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस मामले में चराण खड्ड के किनारे अवैज्ञानिक ढंग से खुदाई करने वाली कंपनी और ठेकेदार के खिलाफ धर्मशाला पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। यह निर्माण चराण खड्ड पुल के पास शांति प्रॉपर्टी डेवलपर्स द्वारा कॉलोनी बनाने के नाम पर हो रहा है। इसमें भू-विज्ञानियों की चेतावनियों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों की अनदेखी की जा रही है। एनजीटी ने जल निकायों के प्राकृतिक बहाव को रोकने और खड्डों के किनारे मलबा डालने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। जेसीबी से की जा रही खुदाई इसके बावजूद, यहां जेसीबी मशीनों से अवैज्ञानिक खुदाई कर मलबा सीधे खड्ड में डाला जा रहा है। सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी खड्ड के अधिकतम बाढ़ स्तर (HFL) से 7 मीटर के दायरे में स्थायी निर्माण प्रतिबंधित है। इस नियम का भी उल्लंघन किया जा रहा है।
सरकारी पैरापेट्स को भी हटा दिया गया मलबा खड्ड में डालने के लिए सड़क किनारे लगे सरकारी पैरापेट्स को भी हटा दिया गया है, जिससे यह क्षेत्र वाहन चालकों के लिए असुरक्षित हो गया है। इस मामले में बडोल रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त सचिव और आरटीआई कार्यकर्ता ई. कुलतार चंद गुलेरिया ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नही आरटीआई कार्यकर्ता ने एक पत्र के माध्यम से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के बावजूद अधिकारी लंबे समय तक चुप क्यों रहे। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद भी कार्रवाई में देरी प्रशासनिक मिलीभगत का संकेत देती है। अवैध निर्माण पर तुरंत रोक लगाई लगाने की मांग गुलेरिया ने मांग की है कि इस अवैध निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई संबंधित बिल्डर से की जाए। पुलिस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों में उम्मीद जगी है, हालांकि अधिकारियों की पिछली निष्क्रियता पर सवाल बने हुए हैं।

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