बेटी संग टंकी चढ़ी महिला की हालत बिगड़ी:बरनाला में घरेलू कलह में 6 दिन से हाई वोल्टेज ड्रामा, बारिश-ओले के बाद भी नहीं उतरी

बरनाला के गांव रुड़ेके कलां में पति व घरेलू कलह में बीते छह दिन से पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन कर रही गुरजीत कौर की तबीयत बिगड़ गई है। बीते छह दिनों से बारिश में भीगने से उनकी हालत खराब हो गई है। उनकी हालत को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने डॉक्टरों की टीम बुलाई, जिसने टंकी पर चढ़कर उनका इलाज किया। छह दिन पहले पति पर प्रताड़ना और पुलिस पर सुनवाई न करने का आरोप लगाकर गुरजीत कौर अपनी 18 साल की बेटी मनवीर कौर के साथ टंकी पर चढ़ गई। साथ में पेट्रोल भरी बोतल ले कर गई हैं। न्याय न मिलने पर आग लगा जान देने की धमकी दी है। गांव में बीते छह दिन से हंगामा चल रहा है। पुलिस व प्रशासन की टीम गांव में मौजूद है। आंधी बारिश में भी नहीं आई नीचे इन दिनों में हुई तेज हवाओं के साथ बारिश और ओले गिरने के दौरान वह टंकी पर ही रहीं। पुलिस प्रशासन और गांव वालों के कहने के बाद वह नीचे नहीं आईं हैं। इसमें भीगने के कारण उनकी हालत खराब हो गई है। उनकी हालत को देखते हुए डॉक्टरों की टीम बुलाई गई है, जिसने टंकी पर चढ़कर उनका इलाज किया। पति पर बच्चों का हक न देने का आरोप गुरजीत कौर का आरोप है कि उनके पति उन्हें और उनके दो बच्चों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति की पहले दो शादियां हो चुकी हैं, जिनसे कोई संतान नहीं है। गुरजीत कौर के दो बच्चे हैं, लेकिन उनके पति बच्चों के हक का हनन कर रहे हैं और रिश्तेदार संपत्ति हड़प रहे हैं। पीड़िता के अनुसार, परिवार के पास 28 एकड़ जमीन है, फिर भी उन्हें अपने बच्चों के भविष्य के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है। बेटी बोली- मां की हालत के लिए प्रशासन जिम्मेदार गुरजीत कौर की 18 वर्षीय बेटी मनवीर कौर ने अपनी मां की बिगड़ती हालत के लिए अपने पिता और जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। मां-बेटी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज्ज से अपील की है कि वे इस गुरसिख परिवार के साथ हो रहे अन्याय पर ध्यान दें और मौके पर पहुंचकर उनकी मदद करें। दशमेश तरना दल समर्थन में उतरा इस संघर्ष को दशमेश तरना दल, बुड्ढा दल (96 करोड़) और अन्य निहंग सिंह संगठनों का समर्थन मिल रहा है। दशमेश तरना दल के जत्थेदार नरदेव सिंह ने प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि बैसाखी तक मां-बेटी को न्याय नहीं मिला, तो सभी संगठन कड़ा संघर्ष शुरू करेंगे। जत्थेदार नरदेव सिंह ने स्पष्ट किया कि निहंग सिंह जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों और घरों के बाहर अपने घोड़े बांधेंगे और तब तक नहीं हटेंगे, जब तक मां-बेटी को उनका हक नहीं मिल जाता। पीड़िता ने यह भी बताया कि महिला आयोग ने उन्हें बुलाया था, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *