एक कोशिश इतिहास के योद्धाओं के संघर्ष को समाज के सामने लाने की…

सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में चल रहे नाटककार डॉ. हरचरण सिंह के रंगमंच उत्सव के तहत वीरवार को नाटक ‘सीस तली ते’ (हथेली पर शीश) की प्रस्तुति हुई। गुरशरण सिंह के लेखन पर आधारित इस नाटक को ब्यास के नव चिंतन कला मंच के कलाकारों ने मंचित किया, जबकि निर्देशन क्रांतिपात सिंह ने किया। कार्यक्रम में पूर्व आईएएस मालविंदर सिंह जग्गी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस तरह के नाटक हमारी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ‘सीस तली ते’ के जरिए इतिहास को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने आजादी की लड़ाई में महिलाओं की अहम भूमिका को भी उजागर किया। प्रस्तुति में दिखाया कि स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर मोर्चे पर संघर्ष किया। कहानी में दोआबा क्षेत्र में सक्रिय रही लहर और उससे जुड़े योद्धाओं के संघर्ष को दर्शाया गया, जिसे गदर लहर के बाद आजादी की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में पहचाना जाता है। इन्होंने किया एक्ट… नाटक में कुंदन सिंह, हरजीत कौर, सुरिंदरपाल सिंह, अमित शर्मा, सुखदेव सिंह, वरुण शर्मा, विक्रमजीत सिंह, क्रांतिपात सिंह, गुरचरण सिंह और इत्तेफाक ने एक्ट किया।

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