‘अधिकारी बाबू ये सुल्तानगंज नहीं शैतानगंज है’:4 महीने पहले अफसर को दी धमकी, लाश जलाने से मठ की जमीन तक की कमाई रोकी, हत्याकांड की कहानी

‘अधिकारी बाबू ये सुल्तानगंज नहीं शैतानगंज है, जरा होश में रहा कीजिए…’ सुल्तानगंज नगर परिषद के दिवंगत कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्णा भूषण को ये धमकी 4 महीने पहले नगर परिषद के डिप्टी चेयरमैन नीलम देवी के पति कुख्यात रामधनी यादव ने दी थी। कृष्णा भूषण ने धमकी को ऑफिस के प्रोसिडिंग पेपर में लिखा था। इसकी शिकायत अपने आला अधिकारी से की थी। रामधनी की धमकी से डरे बिना कृष्णा भूषण नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्‌डु के साथ मिलकर उसकी इच्छा के खिलाफ काम करते रहे। नतीजा 28 अप्रैल को रामधनी ने अपने गुर्गों के साथ नगर परिषद कार्यालय में हमला किया। चेयरमैन और कार्यपालक पदाधिकारी को गोलियों से भून दिया। कृष्णा भूषण की मौत हो चुकी है। चेयरमैन राजकुमार गुड्‌डू पटना के एक निजी हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने 12 घंटे के भीतर घटना के मास्टर माइंड रामधनी यादव का एनकाउंटर कर दिया। डिप्टी चेयरमैन समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। भास्कर मामले की पड़ताल करने सुल्तानगंज शहर पहुंचा। हमने ये समझने की कोशिश की कि शहर के सबसे बड़े ऑफिस में खून क्यों बहाए गए? मामला कहां से बिगड़ा? किस मुद्दे पर विवाद था? पद, पावर, पैसा और रसूख के इस खूनी रंजिश की पूरी कहानी अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए… सबसे पहले नगर परिषद कार्यालय का भयावह मंजर देखिए सुल्तानगंज हत्याकांड हुए 24 घंटे से ज्यादा हो गए, लेकिन यहां का सफेद फर्श अभी भी EO के खून से लाल है। सुल्तानगंज के नगर परिषद ऑफिस में एंट्री करते ही चारों तरफ खून ही खून दिखाई देता है। EO के चैंबर से लेकर मेन गेट तक खून के दाग हैं। इसी बरामदे में चेयरमैन राजकुमार गुड्डु का खून से सना गमछा भी पड़ा है। ये दाग इस बात की गवाही दे रहे हैं कि मंगलवार की शाम यहां का मंजर कितना भयावह था। यहां से निकलकर हम चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन के घर पहुंचे। दोनों जगह सन्नाटा पसरा है। मेन गेट बंद है। न कोई बोलने के लिए राजी है और न घर के भीतर जाने की इजाजत। वहां मौजूद कुछ वार्ड पार्षदों से हमने बात करने की कोशिश की। घटना के बाद पूरे शहर में भय का माहौल है। लोग कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। 10 से ज्यादा पार्षदों से हमने ऑफ द रिकॉर्ड बात की। उन्होंने नगर परिषद के भीतर पिछले दो साल से चल रही पूरी कहानी बताई, जिसके चलते यह खूनी खेल खेला गया। नगर परिषद से रामधनी के ठेकेदारों और एजेंसी की छुट्टी रामधनी भले अपनी पत्नी नीलम देवी को चेयरमैन नहीं बनवा पाया, लेकिन जोड़-तोड़ की गणित से उसे डिप्टी चेयरमैन बनाने में सफल रहा। उसे लगा कि पत्नी के डिप्टी बनने के बाद शहर पर उसका कब्जा बरकरार रहेगा, लेकिन राजकुमार गुड्डु के सामने उसकी एक नहीं चल रही थी। गुड्‌डु ने सबसे पहले ऑफिस से रामधनी के घर पहुंचने वाली कमीशन की राशि बंद करा दी। दरअसल, पहले हर फंड में रामधनी का अलग हिस्सा होता था। ब्लीचिंग पाउडर से लेकर, हर छोटी-बड़ी खरीदारी में एक हिस्सा उसके घर पहुंचाया जाता था। इसके बाद रामधनी यादव की पसंद की सफाई एजेंसी का टेंडर रद्द कर दिया गया। नई एजेंसी को टेंडर दिया गया। शहर के 50 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी तो दूर भनक तक नहीं लगी नीलम देवी खेमे के ही एक वार्ड पार्षद ने भास्कर को ऑफ द रिकॉर्ड बताया, ’राजकुमार गुड्‌डु के चेयरमैन बनने के बाद शहर में डेवलपमेंट प्रोजेक्ट रफ्तार पकड़ने लगे थे। कई ऐसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने वाले थे, जो वर्षों से या तो पेंडिंग थे या अभी तक संभव नहीं थे। इसमें 50 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने वाले थे। रामधनी को कमीशन तो दूर भनक तक नहीं लगी।’ उन्होंने कहा, ‘इससे रामधनी बौखला गया था। उसे चिंता सता रही थी कि पहली बार चुनाव जीतकर चेयरमैन बने राजकुमार उसकी पॉलिटिक्स को बर्बाद कर देंगे। रामधनी, उसकी पत्नी नीलम देवी और बेटे ने कई बार EO कृष्णा भूषण के साथ कहासुनी की थी। कृष्णा ने इसकी शिकायत अपने विभाग से की थी।’ पार्किंग का टेंडर छिना, लाश जलाने पर वसूली रुकी तो बौखलाया रामधनी सुल्तानगंज शहर में कमाई का सबसे बड़ा जरिया श्रावणी मेला है। मेले की पार्किंग का टेंडर जिला से होता है। इस पर रामधनी का कब्जा होता था। अपने गुर्गे के माध्यम से वह यहां अवैध उगाही करता था। हर साल अपने आदमी को टेंडर दिलाने में सफल रहता था। इस बार नगर परिषद ने इसमें संशोधन किया। चेयरमैन ने श्रावणी मेला के मद्देनजर गंगा घाट और नमामि गंगे घाट की बोली नगर परिषद के माध्यम से लगवाई। असरगंज के एक ठेकेदार ने टेंडर जीता। मतलब, रामधनी के हाथ से पार्किंग का टेंडर छिन गया। बात केवल घाटों की पार्किंग तक सीमित नहीं रही। सुल्तानगंज के मुक्तिधाम पर रामधनी यादव का कब्जा था। वहां शव जलाने आने वालों से अलग-अलग गुर्गे मनमानी वसूली करते थे। इसका एक हिस्सा रामधनी यादव के घर पहुंचता था। नगर परिषद चेयरमैन की तरफ से पहली बार इसका सरकारीकरण कर रेट फिक्स कर दिया गया। रेट बीपीएल वालों से 500 रुपए और जनरल वालों से 1 हजार रुपए तय किया गया था। रामधनी यादव पर इसका इतना असर पड़ा कि उसकी डिप्टी चेयरमैन पत्नी ने भरी मीटिंग में विरोध किया। वह विरोध करने वाली इकलौती पार्षद थी। बाकी सभी पार्षदों ने निगम के फैसले का समर्थन किया था। मामला यहीं नहीं रुका, नगर परिषद की तरफ से शहर में लगने वाले होर्डिंग और मछली पालन के लिए तालाबों का भी टेंडर कर दिया गया। अभी तक होर्डिंग का टेंडर सुल्तानगंज के ही आदमी को मिलता था, लेकिन अब इसे देवघर के ठेकेदार को दिया गया था। रामधनी के सबसे बड़े इनकम सोर्स मठ की 15 बीघा जमीन छीनने की थी तैयारी अजगैबी नाथ मठ के नाम से सुल्तानगंज में शहर के बीचों-बीच करीब 15 बीघा जमीन है। इस पर वर्षों से रामधनी का कब्जा था। यह उसकी कमाई का सबसे बड़ा सोर्स था। जमीन रामधनी के घर के आगे और पीछे है। घर के आगे वाली जमीन पर 16 दुकानें हैं। सारी दुकानें किराया पर हैं। लगभग एक बीघा से ज्यादा के प्लॉट पर रामधनी के परिवार के लोग हाउस मटेरियल का कारोबार करते हैं। घर के पीछे लगभग 5-6 बीघा जमीन पर आम का बगीचा है। मठ की 3-4 बीघा जमीन सुल्तानगंज थाना के ठीक सामने है। यहां रामधनी यादव मैरिज हॉल खोलना चाहता था। उसने इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। भास्कर से बातचीत में इसकी पुष्टी अजगैबी नाथ मठ के महंत परमानंद गिरी ने की। उन्होंने बताया, ‘शहर की जमीन रामधनी यादव के पास थी। उसने इस पर दुकान बनवाए थे। मैरिज हॉल भी खोलना चाहता था, लेकिन रोक दिया गया था। किराया और आम की कमाई का कुछ हिस्सा मंदिर को भी मिलता था।’ नगर परिषद उनकी कमाई के इस सबसे बड़े सोर्स पर चोट करने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए धार्मिक न्यास बोर्ड से राय ली जा रही थी। थाना के आगे मठ की खाली जमीन पर नगर परिषद गौशाला बनाने की तैयारी कर रहा था। इसका प्रस्ताव भी तैयार हो गया था। इसके बाद एक-एक कर मठ की जमीन से रामधनी का कब्जा हटाना था। 2022 से शुरू हुई राजकुमार गुड्‌डू और रामधनी की अदावत दरअसल, सुल्तानगंज में 2020 से रामधनी यादव का एकछत्र राज था। सुल्तानगंज के तत्कालीन चेयरमैन दयावती देवी को विश्वास मत में हराकर उसने इस कुर्सी पर कब्जा जमाया था। इसके बाद शहर के हर ठेका से लेकर टेंडर पर अवैध रूप से रामधनी यादव का कब्जा था। शहर में उसका अपना साम्राज्य था। शहर की सफाई से लेकर श्रावणी मेले की अवैध कमाई तक सबका हिस्सा उसके घर पहुंचता था। 2022 में उसे झटका तब लगा जब नगर निकाय चुनाव में उसकी पत्नी हार गई। राजकुमार गुड्‌डू को जनता का समर्थन मिला और वे नगर परिषद के चेयरमैन बन गए। इसके बाद तब रामधनी के कट्टर विरोधी और पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष के पति कनबुच्चा यादव राजकुमार के करीब आ गए। कनबुच्चा और रामधनी के बीच पहले से विवाद था। नगर परिषद की कुर्सी से हटने के बाद विवाद इतना बढ़ा कि 2023 में रामधनी पर जानलेवा हमला हुआ। रामधनी ने इसका आरोप चेयरमैन गुड्‌डु पर लगाया। इसके बाद दोनों की अदावत बढ़ती चली गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *