बंगाल के रिजल्ट का बिहार पर क्या होगा असर:बिहार में नीतीश नहीं भाजपा मॉडल चलेगा, तेजस्वी और कमजोर होंगे, नीतीश का पाला बदलना मुश्किल

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की है। ममता बनर्जी की पार्टी TMC लगातार चौथी बार सरकार बनाने से बहुत दूर रह गई है। पार्टी 100 के आंकड़े को भी नहीं छू सकी है। बंगाल में ममता बनर्जी की हार और भाजपा के जीत का बिहार की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में भाजपा के जीतने पर कैसे बदलेगी बिहार की राजनीति…। भाजपा की बंगाल में शानदार जीत, अब 3 चीजें होनी तय 1. बिहार में विपक्ष और कमजोर होगा ममता बनर्जी की हार केवल एक राज्य की हार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय क्षत्रपों के उस मॉडल की हार है, जो भाजपा के विजय रथ को रोकने का दावा करते थे। ममता बनर्जी ने अक्सर दिल्ली में विपक्षी नेताओं को एकजुट करने की कोशिश की। कांग्रेस के बाद ममता बनर्जी ही विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है। अब उनका किला ढह गया है तो 2029 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष काफी कमजोर हो गया। चूंकि बिहार, बंगाल और ओडिशा में भाजपा की सरकार है। 2. NDA में भाजपा की बढ़ेगी ताकत, नीतीश कमजोर होंगे बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA (भाजपा+जेडीयू) ने पहले ही बड़ी जीत दर्ज की है। अब 2026 में बंगाल में भी ‘कमल’ खिल गया है, तो बिहार में भाजपा का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा। बिहार में भाजपा अब तक नीतीश कुमार की बैसाखी पर रही है, लेकिन बंगाल की जीत के बाद वह बिहार में भी पूरी तरह अपने एजेंडे पर सरकार चलाने की दिशा में और आक्रामक हो जाएगी। मनमुताबिक मंत्रालय का बंटवारा होगा। साथ ही भाजपा आने वाले MLC चुनावों में JDU को कम सीटें देने का दबाव बनाएगी। अपने मुख्यमंत्री को नीतीश मॉडल को छोड़कर भाजपा के पिच पर खेलने का इशारा कर देगी। वह राज्य में अपनी स्थिति और मजबूत करेगी। नीतीश कुमार के पाला बदलने की संभावना खत्म 3. बिहार में तेज होगा ध्रुवीकरण बिहार का पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया पश्चिम बंगाल के मालदा और दिनाजपुर जिलों से सटा हुआ है। भाजपा बंगाल में अवैध घुसपैठ को सबसे बड़ा मुद्दा बनाती है। बिहार के किशनगंज (67% मुस्लिम आबादी), कटिहार (44%) और अररिया (42%) जैसे जिलों की सीमाएं सीधे बंगाल से लगती हैं। बंगाल में भाजपा की जीत इन मुद्दों को प्रशासनिक रूप से भी धार देगी, जिससे बिहार के इन जिलों में ध्रुवीकरण तेज होगा। बंगाल में जय श्री राम का नारा एक राजनीतिक हथियार बन चुका है। बंगाल की जीत के बाद बिहार के ग्रामीण इलाकों में हिंदू वोटों की एकजुटता बढ़ेगी, जिससे राजद-कांग्रेस का ‘M-Y’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण दबाव में आ जाएगा। बिहार से अलग हो सकता है सीमांचल भाजपा की जीत पर मोटे तौर पर 3 काम होंगे…

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