पंजाब में स्वगणना के फार्म में अनुसूचित जाति के कॉलम में एक जातिसूचक शब्द लिखे जाने पर लुधियाना के MLA को कुलवंत सिंह सिद्धू को एतराज है। कुलवंत सिंह सिद्धू ने सीएम मान को पत्र लिखा और इसमें हस्तक्षेप करने की मांग की है। वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि ऑनलाइन फार्म से इस शब्द को हटाया जाए और जिसने यह शब्द लिखा है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। विधायक का कहना है कि यह जातिसूचक शब्द है और इसे कहने पर पंजाब में एससी एक्ट के तहत पर्चा दर्ज हो जाता है। MLA कुलवंत सिद्धू के अलावा अन्य संगठन भी परफार्मा में दर्ज जाति को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करवा चुके हैं। उनकी डिमांड भी है कि फार्म से उक्त शब्द को हटाया जाए। इससे पूरी कम्युनिटी की भावनाओं को ठेस पहुंची है। विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू के बयान की चार सबसे अहम बातें जनगणना पोर्टल पर अपमानजनक शब्दावली: विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने प्रमुखता से यह मुद्दा उठाया कि भारत सरकार की आधिकारिक जनगणना वेबसाइट census.gov.in पर अनुसूचित जाति (SC) की सूची में बाल्मीकि भाईचारे के लिए एक ‘शर्मनाक’ शब्द का प्रयोग किया गया है। उन्होंने इसे एक बहुत बड़ी प्रशासनिक चूक करार दिया है। उस शब्द को कहने पर होता है केस: कुलवंत सिद्धू ने कहा कि परफार्मा में वो शब्द लिखा गया है जिसे कहने पर पंजाब में एफआईआर तक दर्ज हो जाती है। जब यह शब्द कानूनन तौर पर प्रतिबंधित है तो फार्म में कैसे रखा गया। प्रधानमंत्री से तत्काल सुधार की अपील: विधायक ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विनती की है कि इस अपमानजनक शब्द को वेबसाइट से तुरंत हटाया जाए। उनकी मुख्य मांग यह है कि दलित भाईचारे की भावनाओं का सम्मान करते हुए, पोर्टल पर गरिमापूर्ण और उचित शब्दों का प्रयोग किया जाए ताकि समाज के आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे। जवाबदेही तय करने की मांग: सिद्धू ने केवल शब्द हटाने की मांग नहीं की, बल्कि उस व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है जिसने यह ‘गलती’ की है। इस संबंध में उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को लिखित पत्र भेजकर सभी सबूत (प्रूफ) साझा किए हैं, ताकि राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र पर इस मुद्दे को हल करने के लिए दबाव बनाया जा सके।