करनाल में दो सरंपच निलंबित:फसल पोर्टल में की गड़बड़ी; जांच अधिकारी नियुक्त, 30 दिन में रिपोर्ट के निर्देश

करनाल में दो ग्राम पंचायतों में बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां सरकारी व गैर काश्त योग्य जमीन पर कागजों में फसल उगाकर उसे पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि श्मशान घाट, स्कूल व गौचरान जैसी जमीन तक को खेती योग्य दिखाया गया और फर्जी तरीके से पंजीकरण कर आर्थिक लाभ लिया गया। मामले की जांच के बाद जिला उपायुक्त ने सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों पंचायतों के सरपंचों को निलंबित कर दिया। जिला उपायुक्त ने ग्राम पंचायत अमुपुर व ग्राम पंचायत सांभली के सरपंचों को सस्पेंड कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि पंचायत की चल-अचल संपत्ति बहुमत प्राप्त पंच को सौंपी जाए। इसके साथ ही उपमंडल अधिकारी (ना०) नीलोखेड़ी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें 30 दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… शिकायत से शुरू हुआ पूरा मामला गांव सांभली निवासी पंच बलराज शर्मा ने 9 जुलाई, 2025 को जिला उपायुक्त को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत सांभली और ग्राम पंचायत अमुपुर के सरपंचों ने गैर काश्त, गैर मुमकिन और बंजर जमीन को भी “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर गेहूं व धान सीजन 2023-24 और 2024-25 में निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करवा दिया। सरकारी जमीन पर कागजों में उगाई फसल शिकायत में यह भी कहा गया कि पंचायतों ने सरकारी जमीन पर कागजों में फसल उगाकर उसे मंडी तक पहुंचाया और बेच भी दिया। इस पूरे खेल में एक आढ़ती और उसके परिवार को किसान दिखाकर पोर्टल कराया गया, जबकि असल में जमीन पर पट्टेदार कोई अन्य व्यक्ति था। जांच के बाद नोटिस और सुनवाई शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच करवाई गई। संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर 1 दिसंबर 2025 को दोनों सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 11 मार्च को सुबह 10 बजे निजी सुनवाई के लिए बुलाया गया और 27 मार्च को दोनों सरपंचों की सुनवाई पूरी की गई। रिपोर्ट में सामने आई जमीन की हकीकत बलराज शर्मा ने बताया कि जांच रिपोर्ट के अनुसार गांव अमुपुर में कुल लगभग 94 एकड़ जमीन थी। इसमें से 6 एकड़ 5 कनाल 18 मरले जमीन गैर काश्त या गैर मुमकिन थी, जिस पर खेती संभव नहीं थी। जबकि 87 एकड़ 5 कनाल 42 मरले जमीन काश्त योग्य थी, लेकिन इस पूरी जमीन को ईश्वर चंद के नाम पोर्टल कर दिया गया, जबकि असल पट्टेदार कोई और था।
इसी प्रकार गांव सांभली में कुल 48 एकड़ 7 कनाल 19 मरले जमीन थी। इसमें से 30 एकड़ 3 कनाल 1 मरला जमीन गैर काश्त या गैर मुमकिन थी और 18 एकड़ 4 कनाल 18 मरले जमीन काश्त योग्य थी। जांच में पाया गया कि इस पूरी जमीन को ईश्वर, उसके पुत्र नवीस कुमार और पुत्रवधु पूनम के नाम पोर्टल कर दिया गया था, जबकि जमीन पर खेती करने वाले अन्य लोग थे। आढ़ती परिवार को किसान दिखाकर किया फर्जीवाड़ा जांच में साफ हुआ कि आढ़ती ईश्वर चंद और उसके परिवार को किसान दिखाकर पोर्टल किया गया। गैर काश्त योग्य जमीन को भी कागजों में खेती योग्य दिखाया गया और फसल उगने का रिकॉर्ड तैयार किया गया। इस फर्जीवाड़े के जरिए मंडी में फसल बेची गई और आर्थिक लाभ उठाया गया। अधिकारियों को भेजी गई थी जांच रिपोर्ट मामले की जांच के लिए आवेदन को खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, निसिंग और उप-निदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, करनाल को भेजा गया था। 29 जून 2025 और 29 अगस्त 2025 को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बाद 8 दिसंबर 2025 और 10 दिसंबर 2025 को कृषि विभाग की रिपोर्ट और 11 दिसंबर 2025 को बीडीपीओ निसिंग की रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिनमें गड़बड़ी की पुष्टि हुई। सरकार को लगाया आर्थिक नुकसान शिकायतकर्ता बलराज शर्मा ने आरोप लगाया था कि इस फर्जीवाड़े से सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया और नियमों की अनदेखी कर पद का दुरुपयोग किया गया। जांच में ये आरोप सही पाए गए, जिसके बाद जिला उपायुक्त ने कार्रवाई की। डीसी का सख्त संदेश, 30 दिन में पूरी होगी जांच जिला उपायुक्त ने साफ कहा है कि मामले में पूरी पारदर्शिता से जांच की जाएगी और दोषियों पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। उपमंडल अधिकारी को 30 दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद जिले में हड़कंप मच गया है और अन्य पंचायतों में भी ऐसे मामलों की जांच की संभावना बढ़ गई है।

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