रेवाड़ी-धारूहेड़ा के करीब 1.45 लाख मतदाता आज अपने शहरों की सरकार चुनेंगे। चुनाव दो चेयरमैन व 50 पार्षद के लिए होगा। इस चुनाव में असली परीक्षा केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव की होगी। आज होने वाला चुनाव से पता चलेगा शहर के मतदाता दोनों में से किसका साथ देंगे। भाजपा उम्मीदवार जीते तो पार्टी में और का कद और बढेगा। कांग्रेस जीती तो कैप्टन की न केवल पार्टी में स्थिति मजबूत होगी, बल्कि सीधे शहरी मतदाताओं से जुड़ने का रास्ता भी खुल जाएगा। रेवाड़ी में 10 साल से भाजपा की सरकार धारूहेड़ा में पांच और रेवाड़ी में 10 साल से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की सरकार रही है। रेवाड़ी में विनिता पीपल और पूनम यादव व धारूहेड़ा में कंवर सिंह यादव भाजपा का चेहरा रहे हैं। विनिता पीपल अब भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं तो कंवर सिंह यादव निर्दलीय चुनाव लड़कर भाजपा को चुनौती दे रहे हैं। रेवाड़ी में आमने-सामने, धारूहेड़ा में तिकोना मुकाबला एससी महिला के लिए आरक्षित रेवाड़ी में कहने को तो 6 महिला उम्मीदवार हैं। असली मुकाबला भाजपा की विनिता पीपल और कांग्रेस के नेहारिका चौधरी के बीच माना जा रहा है। धारूहेड़ा में निर्दलीय चुनाव में उतरे निवर्तमान चेयरमैन कंवर सिंह यादव और बाबू लाल लांबा ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। यहां मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है। जानिए…कमजोर और मजबूत पक्ष प्रदेश में 2014 से भाजपा की सरकार है। राव इंद्रजीत सिंह भी अहीवारवाल ही नहीं, दक्षिणी हरियाणा के सबसे बड़ा चेहरा माने जाते है। शहरी मतदाताओं पर कैप्टन अजय यादव की भी अच्छी पकड़ मानी जाती है। चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों के साथ मजबूती के साथ कमजोरी भी जुड़ी हुई हैं। रेवाड़ी; भाजपा उम्मीदवार विनिता पीपल : सत्ता और, पॉवरफुल नेताओं का साथ, परिवार की राजनीतिक पृष्टभूमि, चेयरपर्सन रहते हुए बना जनता से सीधा जुड़ाव मजबूत पक्ष है। अपने डेढ़ साल सहित पिछले 11 साल में नप में हुए भ्रष्टाचार के आरोप, पार्टी के एंटी राव खेमे से भितरीघात का डर, संगठन की बजाय राव इंद्रजीत सिंह में आस्था व पार्टी कार्यकर्ताओं से तालमेल का अभाव और टिकट मिलने के बाद स्थानीय विधायक लक्ष्मण यादव का नाम न लेने पर बना विवाद कमजोर पक्ष हैं। रेवाड़ी; कांग्रेस उम्मीदवार नेहारिका चौधरी : परिवार की राजनीतिक पृष्टभूमि, शहरी मतदाताओं में मजबूत माने जाने वाले कैप्टन अजय यादव का साथ, राजनीति में पति और समाज में ससुर की सक्रियता मजबूत पक्ष हैं। पार्टी की गुटबाजी, पूर्व चेयरपर्सन शकुंतला भांडोरिया के मानने के बावजूद उनके समर्थकों की नाराजगी और सत्ता के खिलाफ लड़ना कमजोर पक्ष है। धारूहेड़ा; कांग्रेस उम्मीदवार कुमारी राज : नगर पालिका बनने से पहले धारूहेड़ा की राजनीति में परिवार की सक्रियता, कैप्टन अजय यादव से नजदीकी मजबूत पक्ष है। टिकट ना मिलने से संगठन से जुड़े नेताओं की नाराजगी, अहीर समाज के 5 उम्मीदवार, टिकट मिलने से पहले लोगों से सीधा जुड़ाव न होना और सत्ता के खिलाफ लड़ना कमजोर पक्ष है। धारूहेड़ा; भाजपा उम्मीदवार अजय जांगड़ा : सत्ता और पॉवरफुल नेताओं का साथ, पांच साल तक वाइस चेयरमैन की भूमिका में निभाना, अहीर उम्मीदवारों में अकेले गैरअहीर होना मजबूत पक्ष है। पार्टी व संगठन की गतिविधियों से अधिक जुड़ाव न होना, राव इंद्रजीत समर्थक होने से भितरीघात की संभावना, अपने साथ चेयरमैन रहे कंवर का निर्दलीय चुनाव में उतारना कमजोर पक्ष है। धारूहेड़ा; कंवर सिंह निर्दलीय : नगर पालिका बनने से पूर्व गांव की राजनीति में सक्रियता, आम लोगों से सीधा जुड़ाव, पांच चेयरमैन रहते सत्ता की चकाचौंध से दूरी मजबूत पक्ष माना जा रहा है। 2020 में निर्दलीय चुनाव जीतकर भाजपा के साथ आना, टिकट नहीं मिलने पर फिर मैदान में उतरना, चेयरमैन रहते हुए शहर को समस्याओं विशेषकर भिवाड़ी से आने वाले गंदे पानी से निजात न दिलवा पाना कमजोर पक्ष है।