कहते हैं प्रतिभाएं किसी की मोहताज नहीं होती। ऐसा कर दिखाया पंजाब के उन स्टूडेंट्स ने जिनके घरों में पढ़ाई के लिए पर्याप्त संससाधन नहीं थे। कमियों के बावजूद वो स्टेट टॉपर्स बन गए और अब अन्य बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। फरीदकोर्ट के एक छोटे से गांव चैना के रहने वाले साधारण किसान की बेटी स्टेट में टॉपर बन गई। जालंधर में ई रिक्शा चलाने वाले अपने बच्चों को ऐसा माहौल दे रहा है कि वो लगातार मेरिट में आ रहे हैं। वहीं लुधियाना में कारपेंटर की बेटी स्टेट में पांचवीं रैंक पर आ गई। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के टॉपर्स की सक्सेस स्टोरी एक-एक करके जानिए… पंजाब की टॉपर बोली-मां सपने देखती है, मैं उन्हें पूरा करती हूं फरीदकोट के छोटे से गांव चैना के एक साधारण किसान की बेटी हरलीन शर्मा ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा में टॉप कर दिया। माता-पिता के पास पर्याप्त संसाधन न होने के बावजूद हरलीन ने पढ़ाई के साथ-साथ अन्य एक्टिविटी में हिस्सा लिया और बोर्ड की टॉपर बन गई। हरलीन बताती है कि उसके लिए सपना मां देखती है और वो मां के सपनों को पूरा करने में जुट जाती है। आठवीं में मेरिट में नहीं आई तो मां व पिता दोनों काफी नर्वस थे। बस वहीं से ठान लिया था कि दसवीं में मेरिट में आना है और मां को निराश नहीं करना है। अब टॉप किया है तो मेरी मां की खुशी का ठिाना नहीं है। हरलीन शर्मा जैतो के सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्टूडेंट है। उसने 650 में से 646 अंक हासिल कर यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। हरलीन के पिता देवेंद्र कुमार एक साधारण किसान हैं, जबकि माता रेनू बाला गृहिणी हैं। दो भाई-बहनों में बड़ी हरलीन को पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी विशेष रुचि है। हरलीन शर्मा ने बताया कि उसके पिता साधारण किसान हैं ऐसे में बच्चों का पढ़ाई का खर्च उठाना उनके लिए काफी मुश्किल है फिर भी उन्होंने पढ़ाई के लिए कभी कोई कमी आने नहीं दी। यही नहीं पिता व मां उसे एक्स्ट्रा एक्टिविटी में भी भाग लेने को कहते रहे। हरलीन स्क्वेश खेलती है और इस बार स्टेट में तीसरे स्थान पर रही है। मां का सपना है जज बनूं तो वहीं करूंगी पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की टॉपर हरलीन शर्मा का कहना है कि मेरी इस सफलता में पढ़ाई के साथ गेम्स का विशेष योगदान है। मैं बड़ी होकर जज बनना चाहती हूं। मेरे पेरेंट्स खासकर मेरी मां का सपना है कि मैं जज बनूं। मैं अपनी मां के सपने को जरूर पूरा करूं। मेरा सभी को संदेश है कि पढ़ाई के साथ गेम्स पर भी ध्यान दें। गेम्स में अच्छी परफोरमेंस हो तो उसके भी अंक मिलते हैं और मेरिट में आप भी ऊपर आ सकते हो। उसने बताया कि वो चार बजे उठ जाती थी और रात को दस बजे तक पढ़ती थी। मेाबाइल का प्रयोग सिर्फ पढ़ाई के लिए करती थी। पिता ई रिक्शा चलाते हैं बेटे पढ़ाई में कर रहे टॉप जालंधर के संजय कुमार ठाकुर ई रिक्शा चला रहे हैं और उनके बच्चे पढ़ाई में टॉप कर रहे हैं। पहले बड़े बेटे ने मेरिट हासिल की और वो अब बीएड कर रहा है वहीं अब छोटे बेटे महेश कुमार ठाकुर ने जिले में टॉप किया है। अपने चारों भाई-बहनों में महेश सबसे छोटा है। 8वीं क्लास में भी मैरिट लिस्ट में रहा है। भाई भी मैरिट में रह चुका है और बीएड कर रहा है। महेश का परिवार जालंधर में रह रहा लेकिन मूल रूप से बिहार का रहने वाला है।
महेश कुमार की पढ़ाई संघर्ष भरी रही है। आर्थिक रूप से संपन्न न होने के बावजूद महेश के पिता ने उसे पढ़ा रहे हैं। पिता की दिहाड़ी लगे या न लगे लेकिन कभी स्कूल फीस, वर्दी और अन्य चीजों के लिए पैसे को आड़े नहीं आने दिया।
बेटे के टॉपर आने पर पिता संजय कुमार ठाकुर उसे आटो से ही स्कूल से लेने आए। स्कूल में आटो खड़ा कर महेश बेटे का इंतजार कर रहे थे। जब महेश से पूछा तो कहने लगे कि मुझे पढ़ाई की वैल्यू का पता है। मैं नहीं चाहता कि बच्चे भी मेरी तरह मजदूरी करें। मैं खुद 10वीं क्लास तक पढ़ा हूं। सभी बच्चों को पढ़ा रहा हूं। कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता है महेश
महेश ने बताया कि वह कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता है। जब उससे पूछा कि कार्डियोलॉजिस्ट ही क्यों तो तपाक से महेशन ने जवाब दिया कि इंडिया में हार्ट अटैक के मरीज बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों की कमी के चलते कई बार लोगों की जान चली जाती है। अब डॉक्टर बनकर लोगों की जान बचाने का इरादा है। महेश ने बताया कि वह 6 घंटे स्कूल में पढ़ाई के बाद टीचरों द्वारा पढ़ाया गया सब रिवाइज करता था। इसके अलावा घर पर भी 2 से 3 घंटे पढ़ाई करता था। महेश ने बताया कि वह मोबाइल भी देखता है लेकिन इस पर ज्यादातर पढ़ाई की वीडियो ही देखता था।
कारपेंटर की बेटी ने हासिल किए 98.46% नंबर लुधियाना में कारपेंटर की बेटी तरनप्रीत कौर ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की दसवीं कक्षा की परीक्षा में 98.46 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। तेजा सिंह स्वतंत्र मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्टूडेंट तरनप्रीत ने 650 में से 640 अंक हासिल किए, जो यह साबित करता है कि समर्पण से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। तरनप्रीत कौर एक साधारण परिवार से है। परिवार की मासिक आय लगभग 10,000 रुपये है। उसने इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए सेल्फ स्टडी पर जोर दिया। तरनप्रीत ने जिले में तीसरा स्थान हासिल किया जबकि बोर्ड की मेरिट सूची में 5 वीं रैंक हासिल की। तरनप्रीत ने अब आगे की पढ़ाई के लिए कॉमर्स स्ट्रीम को चुना है और वह चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनना चाहती हैं। तरनप्रीत ने कहा कि वो कंसेप्ट को बेस बनाकर पढ़ती है और नियमित तौर पर मेहनत करी है। मां के साथ निभाती हैं घर की जिम्मेदारियां सीमित संसाधनों के बावजूद, तरनप्रीत ने अपनी पढ़ाई और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखा। वह अपनी तैयारी जारी रखने के साथ-साथ अपनी मां के दैनिक कामकाज में भी नियमित रूप से मदद करती थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों को भी दिया, जिन्होंने उन्हें निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग दिया।उनके पिता ने उनकी इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि यह उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। तरनप्रीत का एक छोटा भाई भी है जो आठवीं कक्षा में पढ़ता है। क्राफ्ट व किताबें पढ़ने का शौक तरनप्रीत ने कहा कि उसे पढ़ाई के अलावा हेंड क्राफ्ट की गतिविधियों और किताबें पढ़ने का शौक है। उनका कहना है कि इससे उन्हें एकाग्र रहने और तनावमुक्त होने में मदद मिलती है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि उनके स्कूल में भी खुशी की लहर दौड़ा दी है, जहां शिक्षकों ने उन्हें एक ईमानदार और अनुशासित छात्रा बताया। तरनप्रीत की सफलता अन्य छात्रों के लिए एक प्रेरणा है, जो यह दर्शाती है कि कैसे समर्पण, अनुशासन और उचित मार्गदर्शन कठिन परिस्थितियों पर विजय पाने में मदद कर सकते हैं।