NEET-2024: पेपर लीक की कैसे डॉयवर्ट कर दी गई इन्वेस्टिगेशन:EOU ने पूछा-पेपर कहां छपा, NTA बोला- ये नहीं बता सकते; दो साल बाद फिर पेपर लीक

दो साल पहले अगर नेशनल टेस्ट एजेंसी (NTA) ने ‘सिक्रेसी’ का ढोंग छोड़कर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को पूरा सहयोग दिया होता, तो शायद NEET-UG का पेपर लीक नहीं होता। NEET UG-2024 का पेपर लीक कांड से देशव्यापी माफिया सिंडिकेट का पूरा पर्दाफाश होता। EOU उस वक्त पेपर लीक के मास्टर माइंड तक पहुंच चुकी थी, लेकिन केस CBI को ट्रांसफर कर दिया गया और फिर सब कुछ ठंडा पड़ गया। नतीजा-2026 में फिर वही खेल दोहराया गया। संडे बिग स्टोरी में वो काला सच जो NTA, CBI और सिस्टम की मिलीभगत को बेनकाब करता है। सिलसिलेवार कहानी पढ़िए… 5 मई 2024: पटना में पकड़ा गया पहला सुराग 5 मई 2024। पूरे देश में NEET UG की परीक्षा चल रही थी। पटना में अचानक खबर आई कि झारखंड नंबर वाली एक डस्टर कार संदिग्ध तरीके से परीक्षा केंद्र के आसपास घूम रही है। पटना पुलिस अलर्ट हो गई। बेली रोड पर JH01BW-0019 नंबर की गाड़ी रोकी गई। अंदर सिकंदर प्रसाद यादवेंदु (दानापुर नगर परिषद का जूनियर इंजीनियर), अखिलेश कुमार और बिट्टू कुमार थे। 5वें दिन केस में EOU की हुई एंट्री खेमनीचक इलाके में छापेमारी के बाद पुलिस ने यह मान लिया कि NEET UG-2024 का क्वेश्चन पेपर कुख्यात शातिरों का संगठित गिरोह लीक कर चुका है। पटना पुलिस ने अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाया। कई जगहों पर छापेमारी की। EOU की जांच की आंच झारखंड से संजीव मुखिया तक EOU ने जूनियर इंजीनियर सिकंदर प्रसाद को रिमांड पर लिया। उसके मोबाइल की पड़ताल की तो झारखंड का कनेक्शन निकला। क्योंकि, परीक्षा से पहले जिसके मोबाइल पर क्वेश्चन पेपर और उसके जवाब का PDF भेजा गया था, वह देवघर के देवीपुर थाना क्षेत्र के फार्म हाउस में बलदेव कुमार उर्फ चिंटू छिपा हुआ था। चिंटू नालंदा के बिहारशरीफ थाना के तहत मुरौरा का रहने वाला था। टैक्सी चलाने वाला मुकेश कुमार भी चिंटू के इलाके का रहने वाला था। EOU ने इसे भी गिरफ्तार किया था। साथ ही देवघर से ही उसके तीन साथियों राजीव कुमार उर्फ कारू, पंकु कुमार और परमजीत सिंह को भी पकड़ा था। तीनों पेपर लीक करने वाले गिरोह को फर्जी नाम-पते पर सीमकार्ड, मोबाइल और ठहरने की जगह उपलब्ध कराते थे। सीरियल कोड से हुई थी हजारीबाग सेंटर की पहचान लर्न बॉयज हॉस्टल एंड लर्न प्ले स्कूल से जब्त क्वेश्चन पेपर के टुकड़ों में सीरियल नंबर भी था। EOU ने तब उसे NTA को भेजा था। सीरियल नंबर के मिलान से ही पता चला कि वो क्वेश्चन पेपर झारखंड के हजारीबाग में ओएसिस स्कूल में बने परीक्षा सेंटर का है। 11 महीने बाद पकड़ा गया संजीव मुखिया पेपर लीक के मामले में संजीव मुखिया का गैंग बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में अपने जड़ें जमा चुका है। इसके कांटैक्ट्स छोटे से लेकर बड़े स्तर तक हैं। NEET UG-2024 के पेपर लीक में इसका नाम और भूमिका EOU की जांच में पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी थी। टर्निंग पॉइंट: CBI को सौंपा गया केस, फिर सब ठंडा EOU अपनी जांच को आगे बढ़ा रही थी तब ही 23 जून 2024 को केस CBI को ट्रांसफर कर दिया गया। EOU ने तब तक 13 शातिरों को गिरफ्तार कर लिया था। CBI ने EOU के दस्तावेज ले लिए, लेकिन जांच की रफ्तार सुस्त पड़ गई। EOU ने 11 महीने की मशक्कत के बाद अप्रैल 2025 में संजीव मुखिया को गिरफ्तार किया, जब वो फिर नया पेपर लीक करने निकला था। लेकिन CBI ने उसके खिलाफ NEET मामले में चार्जशीट तक दाखिल नहीं की। नतीजा उसे NEET केस में जमानत मिल गई। EOU की जांच के 4 पॉइंट, जिसे अब तक नहीं खोज पाई CBI पेपर लीक को बड़े स्तर पर मानने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार EOU की जांच को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट में परीक्षा को कैंसिल कराने, फिर से परीक्षा लेने की मांग को लेकर स्टूडेंट्स, स्टूडेंट्स यूनियन और शिक्षण संस्थानों की तरफ से 26 याचिकाएं दाखिल की गई थी। पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनवाई की। EOU ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि पेपर लीक हुआ है, लेकिन 2 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पेपर लीक को बड़े स्तर पर मानने से इनकार कर दिया।

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